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डिजिटल अरेस्ट और AI डीपफेक पर सख्त कानून लाने की तैयारी, संसद में जल्द आ सकता है नया बिल

केंद्र सरकार डिजिटल अरेस्ट और AI डीपफेक को अलग अपराध घोषित करने के लिए नया कानून ला सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून इन अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करते। सरकार ने संसद के मौजूदा सत्र में बिल लाने के संकेत दिए हैं।

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सांकेतिक फोटो

Photo : iStock

केंद्र सरकार देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों 'डिजिटल अरेस्ट' और एआई-जनरेटेड 'डीपफेक' (AI Deepfake) पर लगाम लगाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए केंद्र सरकार संसद के चालू सत्र में एक नया विधेयक (Bill) ला सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इन मुद्दों के लिए खास अपराध तय करने को कहा है। जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मौजूदा आपराधिक कानूनों में डिजिटल अरेस्ट और AI डीपफेक जैसे नए साइबर अपराधों की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है। ऐसे में इन्हें अलग अपराध के रूप में कानून में शामिल करने की जरूरत है।

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े आरोपियों को जमानत देने में कड़ा रुख अपना रही है, लेकिन मौजूदा कानून में इस अपराध की स्पष्ट पहचान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट में जबरन वसूली, लूट और संगठित अपराध के तत्व शामिल हैं। इसलिए इसे एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने और आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने जैसे कड़े प्रावधानों की जरूरत है। जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों के बावजूद कोर्ट न तो कोई नया अपराध परिभाषित कर सकती है और न ही नया कानून बना सकती है। यह काम पूरी तरह सरकार का है।

सरकार ने क्या बताया?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर नया कानून लाने पर काम कर रही है। संसद के चालू सत्र में ही डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक को अलग अपराध घोषित करने वाला विधेयक पेश किया जा सकता है। प्रस्तावित कानून में डिजिटल अरेस्ट और AI डीपफेक को अलग-अलग अपराध माना जाएगा और इनके लिए सख्त सजा का प्रावधान होगा।

डिजिटल अरेस्ट के मामले घटे

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों की संयुक्त कार्रवाई के कारण डिजिटल अरेस्ट के मामलों में काफी कमी आई है। साथ ही एक उच्च स्तरीय समिति इस पूरे सिस्टम की समीक्षा कर रही है और जल्द अपनी रिपोर्ट देगी।

रिटायर्ड लोगों को निशाना बना रहे साइबर ठग

गौरतलब है कि डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक जैसी ठगी का शिकार सबसे ज्यादा बुजुर्ग और रिटायर्ड लोग हो रहे हैं, जिनसे उनकी जिंदगी भर की कमाई ठग ली जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसका स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सीबीआई (CBI) को ऐसे मामलों की जांच का जिम्मा सौंपा है। व्हाट्सएप (WhatsApp) की ओर से भी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि कंपनी भी सरकार के साथ मिलकर प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए काम कर रही है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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