फरीदाबाद

Bulldozer in Faridabad: 5000 घरों पर टला बुलडोजर का खतरा, केंद्रीय मंत्री ने कही ये बात

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 28, 2023, 06:46 PM IST

Faridabad Bulldozer Threat: देश की राजधानी दिल्ली सीमा से सटे फरीदाबाद में यमुना किनारे बसी बस्तियों पर बुलडोजर का खतरा टल गया है, ऐसा बताया जा रहा है।

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फरीदाबाद में यमुना किनारे बसी बस्तियों पर बुलडोजर का खतरा टला (प्रतीकात्मक फोटो)

Faridabad Nagar Nigam News: केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने बुधवार को कहा कि इन बस्तियों को तोड़ा नहीं जाएगा बल्कि अमृत-दो योजना के तहत विकास कार्य कराए जाएंगे, बुधवार को फरीदाबाद के बसंतपुर में आयोजित अभिनंदन समारोह में उन्होंने यह भरोसा दिया गौर हो कि यमुना के डूब इलाकों में बहुत तेजी से अतिक्रमण हुआ है।

यहां लोगों ने अवैध तरीक से मकान बनाए हैं और 5 किलोमीटर के दायरे में पांच कॉलोनियां बसा दी गईं, अधिकारियों का कहना है कि यहां करीब 5000 घर बने हुए हैं, जो दो से तीन मंजिला हैं।

नोटिस के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा

इससे पहले नगर निगम के नोटिस के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है। इन लोगों का कहना है कि उन्होंने अपना मकान बनाने में अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी, अब सरकार उन्हें तोड़ने जा रही है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि डूब क्षेत्र में निर्माण के लिए लोगों ने कोई अनुमति नहीं ली थी, ऐसे में ये सभी मकान अवैध हैं, जिसके चलते निवासियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

मकान खाली कर दूसरे स्थान पर जाने को कहा

अधिकारियों का कहना है कि कॉलोनी के अवैध मकानों को खाली करने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर भी नोटिस लगाए गए हैं और सभी को मकान खाली कर दूसरे स्थान पर जाने को कहा गया है।

मकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी पूरी

पहले फरीदाबाद नगर निगम ने अवैध मकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी पूरी कर ली थी जानकारी के मुताबिक, यमुना के डूब क्षेत्र में बसी बसंतपुर, अटल चौक, नूर चौक, शिव एंक्लेव पार्ट दो व तीन, अजय नगर कॉलोनियो में बने अवैध मकानों नोटिस जारी किए गए थे, फरीदाबाद नगर निगम ने इन लोगों को मकान खाली करने के लिए पांच दिन का समय दिया था।

यमुना का जलस्तर बढ़ने से इन इलाकों में बाढ़ आ गई थी

अधिकारियों के मुताबिक, यमुना के डूब इलाकों में बहुत तेजी से अतिक्रमण हुआ है। यहां लोगों ने अवैध तरीक से मकान बनाए हैं। ये सभी इमारतें अवैध तरीके से बसाई गई थीं, जिसके चलते यहां मानकों का पालन नहीं हुआ। बता दें, बीते जुलाई में यमुना का जलस्तर बढ़ने से इन इलाकों में बाढ़ आ गई थी और कई घर डूब गए थे।

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