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पुरानी पेंशन स्कीम से बढ़ेगा सरकार पर बोझ, नई पेंशन स्कीम के मुकाबले 4 गुना से ज्यादा होगा खर्च

Old Pension Scheme: राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों ने एनपीएस की जगह फिर से ओपीएस लागू करने की घोषणा की, जिसे पेंशन सुधारों के तहत एक दशक पहले लागू किया गया था।

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पुरानी पेंशन स्कीम से बढ़ेगा सरकार का खर्च

Photo : BCCL
KEY HIGHLIGHTS
  • पुरानी पेंशन स्कीम से बढ़ेगा सरकार का खर्च
  • आरबीआई के अर्थशास्त्रियों ने चेताया
  • जीडीपी पर पड़ेगा ज्यादा बोझ

Old Pension Scheme: केंद्र सरकार पूरे भारत में नई पेंशन स्कीम (New Pension Scheme) को लागू करने को लेकर काफी प्रयास कर रही है। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अर्थशास्त्रियों की एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) के बहुत अधिक खर्चीला होने का खुलासा हुआ है।

आरबीआई के अर्थशास्त्रियों की इस स्टडी के मुताबिक यदि सभी राज्य 2023 में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू कर दें, तो संचयी राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden) न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) का 4.5 गुना तक हो सकता है। वहीं 2060 तक अतिरिक्त बोझ सालाना सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 0.9 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

पीछे की ओर जाने वाला कदम

इस स्टडी पेपर को Fiscal Cost of Reverting to the Old Pension Scheme by the Indian States – An Assessment नाम दिया गया है। इस स्टडी में आरबीआई को इकोनॉमिस्ट अचित सोलंकी, सोमनाथ शर्मा, आर के सिन्हा, एस आर बेहरा और अत्रि मुखर्जी ने तैयार किया है।

इसमें कहा गया है कि पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करना 'पीछे की ओर जाने' वाला एक कदम होगा। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार रिसर्च पेपर में जाहिर किए गए विचार इन अर्थशास्त्रियों के हैं, आरबीआई के नहीं हैं।

कई राज्यों ने शुरू की पुरानी पेंशन व्यवस्था

हाल ही में राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों ने एनपीएस की जगह फिर से ओपीएस लागू करने की घोषणा की, जिसे पेंशन सुधारों के तहत एक दशक पहले लागू किया गया था।

स्टडी पेपर में कहा गया है कि ओपीएस में डिफाइंड बेनेफिट्स (डीबी) हैं, जबकि एनपीएस में डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशंस है।

शॉर्ट टर्म में फायदा, लॉन्ग टर्म में नुकसान

लेख में कहा गया है कि ओपीएस में लौटने वाले राज्यों के लिए शॉर्ट टर्म फायदा यह है कि उन्हें कर्मचारियों के एनपीएस योगदान पर खर्च नहीं करना पड़ेगा, लेकिन भविष्य में अनफंडेड ओपीएस उनकी फाइनेंसिंग पर "गंभीर दबाव" डाल सकती है।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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