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रूस की वैगनर आर्मी चीफ प्रिगोझिन की मौत, कुछ दिन पहले पुतिन से की थी बगावत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 23, 2023, 11:51 PM IST

Wagner chief Yevgeny Prigozhin death News: रूस की प्राइवेट आर्मी वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई है। खबर के मुताबिक, विमान हादसे में 9 अन्य लोग भी मारे गए हैं।

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Photo : AP

Wagner chief Yevgeny Prigozhin death News: रूस से बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक, रूस की प्राइवेट आर्मी वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई है। खबर के मुताबिक, विमान हादसे में 9 अन्य लोग भी मारे गए हैं। बता दें, हाल ही में प्रिगोझिन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बगावत की थी।

अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह विमान हादसा मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग के बीच हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है, वह वैगनर चीफ प्रिगोझिन का था।

पुतिन के खिलाफ सड़क पर उतरी थी वैगनर आर्मी

वैगनर को रूस की प्राइवेट आर्मी कहा जाता है। इसक लड़ाके कुछ दिन पहले तक रूस की तरफ से यूक्रेन में जंग लड़ रहे थे। हालांकि, बीते महीने वैगनर प्रमुख प्रिगोझिन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ बगावत कर दी थी। वैगनर के लड़ाके हथियारों के साथ सड़क पर उतर आए थे और उन्होंने काफी उत्पात मचाया था, रूसी राष्ट्रपति ने कहा था कि वह इस विद्रोह को कुचल देंगे। इसके बाद रूसी सैनिकों ने वैगनर के खिलाफ हमले तेज कर दिए, जिसके बाद प्रिगोझिन विद्रोह से पीछे हट गए। एक समझौते के तहत वैगनर चीफ को रूस से निर्वासित कर दिया गया था और उन्होंने पड़ोसी देश बेलारूस में शरण ली थी।

बाइडन ने जताई थी हत्या की आशंका

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ वैगनर प्रमुख येवनेगी प्रिगोझिन की बगावत के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने उनकी हत्या की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि प्रिगोझिन को जहर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा, अमेरिका को भी पता नहीं है कि प्रिगोझिन कहां है, अगर मैं उनकी जगह पर होता, तो मैं सावधान रहता कि मैंने क्या खाया। उन्होंने आगे कहा, मैं अपने मेन्यू पर नजर रखता। लेकिन सब मजाक कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता है कि हममें से कोर्ठ भी निश्चित रूप से जातना है कि रूस में प्रिगोझनि का भविष्य क्या है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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