Maldives: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू का चीन प्रेम उन्हीं पर भारी पड़ रहा है। अपने ही देश में उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है, यहां तक कि उनके खिलाफ महाभियोग लाने की भी तैयारी की जा रही है। इस बीच खबर है कि विपक्ष संसद में मुइज्जू के भाषण को सुनने को भी तैयार नहीं है। जानकारी के मुताबिक, मालदीव की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियां मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी और डेमोक्रेट्स पार्टी संसद में आज होने वाले उनके भाषण का बहिष्कार करेंगी।
मालदीव की दोनों प्रमुख विपक्षी पाार्टियों का यह बयान मुइज्जू के भारत विरोधी रुख के बाद आया है। हालांकि, संसद में सबसे ज्यादा सीटों वाली पार्टी एमडीपी ने अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया है कि वह मोहम्मद मुइज्जू के भाषण का बहिष्कार करने का फैसला क्यों किया है। हालांकि, डेमोक्रेट्स ने कहा कि वे तीन मंत्रियों की फिर से नियुक्ति के कारण अभिभाषण का बहिष्कार करेंगे।
भारत विरोधी रुख की हो रही आलोचना
बता दें, पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षदीप यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद मालदीव के दोनों विपक्षी दलों ने भारत को अपना सबसे पुराना सहयोगी बताया था। एक संयुक्त बयान में, दोनों पार्टियों ने मौजूदा प्रशासन पर भारत विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया। बता दें, पीएम मोदी की लक्षदीप यात्रा के बाद मालदीव के तीन मंत्रियों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद भारत ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
चीन प्रेम हो रहा उजागर
बता दें, मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है। हाल ही में उन्होंने चीन की यात्रा भी की थी, इस दौरान वे राष्ट्रपति जिनपिंग से भी मिले थे। चीन से वापस आने के बाद मुइज्जू ने भारत के खिलाफ बयानबाजी भी की। इसके साथ ही उन्होंने चीनी जहाज को भी अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दे दी है, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है।
