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भारत में पैसे देकर नाबालिगों से छोटे बच्चों का कराता था यौन शोषण, ब्रिटेन के अध्यापक को 12 साल की कैद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 9, 2023, 07:45 PM IST

British Teacher Jailed: स्मिथ को जब गिरफ्तार किया गया तब वह ऑनलाइन था और भारत में रह रहे एक नाबालिग से पैसे के बदले एक छोटे बच्चे की यौन तस्वीरें भेजने को कह रहा था।

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British Teacher Jailed: भारत में पैसा देकर नाबालिगों से छोटे बच्चों का यौन शोषण करवाने का जुर्म कबूल कर चुके लंदन के एक प्राथमिक विद्यालय के पूर्व उप प्रधानाचार्य को बुधवार को 12 साल की कैद की सजा सुनायी गयी। दक्षिण लंदन के ईस्ट डलविच के मैथ्यू स्मिथ (35) को पिछले साल नवंबर में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (एनसीए) ने गिरफ्तार किया था।

जांचकर्ताओं के सामने खुलासा हुआ था कि आरोपी डार्क वेब पर अश्लील सामग्री साझा करता है। उसे अब लंदन के साउथवार्क क्राउन कोर्ट ने सजा सुनायी है। डार्क वेब ढेर सारी आईपी एड्रेस से कनेक्ट और डिस्कनेक्ट होता है, जिससे इसको ट्रैक कर पाना असंभव हो जाता है। यहां उपयोगकर्ता की जानकारी कूट रूप में होती है, जिसे डिकोड करना बेहद मुश्किल होता है।

गिरफ्तारी के समय भी था ऑनलाइन

नेशनल क्राइम एजेंसी के अनुसार, स्मिथ को जब गिरफ्तार किया गया तब वह ऑनलाइन था और भारत में रह रहे एक नाबालिग से पैसे के बदले एक छोटे बच्चे की यौन तस्वीरें भेजने को कह रहा था। उसके कंप्यूटर पर डार्क वेबसाइट एवं फोरम भी खुला था जो बाल यौन उत्पीड़न पर केंद्रित था। एनसीए की वरिष्ठ अधिकारी हेलेन डोरे ने कहा, वह बड़ा अपराधी है एवं चीजों के साथ छेड़छाड़ करने में माहिर है । उसने अपनी तरफ से किशोरों को छोटे बच्चों का यौन शोषण करने के लिए मजबूर किया।

मौके की तलाश में रहता था अपराधी

अधिकारियों ने कहा, वह बच्चों तक पहुंचने के लिए मौके की ताक में रहता था लेकिन वह उनके सामने अपनी यौन अभिरूचि को छिपाने में माहिर था। वह अध्यापक एवं एक परामर्शदाता के रूप में काम करते हुए अपना गुनाह करता था तथा उसपर जो विश्वास व्यक्त करता था, उसके साथ वह विश्वासघात करता था। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि स्मिथ के मन में अपने शिकार यानी जिसे वह नुकसान पहुंचाता था, उसके प्रति रत्तीभर दया नहीं थी। असल में वह बच्चों के लिए बहुत बड़ा खतरा है लेकिन इस जांच से सुनिश्चित हुआ है कि वह लंबा समय सलाखों के पीछे गुजारेगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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