कैसे करते हैं स्कैम
साइबर अपराधी ठगी के इस तरीके में इंटरनेशनल कॉल को भारत के स्थानीय नंबर (+91-xxxxxxxxx) से आने वाले कॉल के रूप में दर्शाते हैं। कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (सीएलआई) के तहत फोन नंबर का डिस्प्ले किया जाना आवश्यक है। साइबर अपराधी कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी में हेर-फेर कर अपने फेक कॉल को भारत से आए कॉल के रूप में दिखाते हैं। जबकि, असल में साइबर अपराधी भारत के बाहर से कॉल कर रहे होते हैं।
कैसे फ्रॉड करते हैं साइबर अपराधी
विक्टिम का विश्वास भारत के स्थानीय नंबर के साथ जीतने के बाद साइबर अपराधी मालवेयर से जुड़े उद्देश्यों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। साइबर अपराधी विक्टिम के कॉल उठाए जाने के बाद किसी तरह से उनकी संवेदनशील और वित्तीय जानकारियों को पाने की कोशिश करते हैं। वे सरकारी अधिकारी, कानून प्रवर्तन अधिकारी या विक्टिम के परिवार का सदस्य बनकर पैसा या व्यक्तिगत डेटा निकलवाने की कोशिश करते हैं। साइबर अपराधी विक्टिम को डराने के लिए कई बार उन पर किसी गैरकानूनी गतिविधी से जुड़े होने का इल्जाम लगाते हैं, जिसके बाद गिरफ्तारी के डर से विक्टिम, कॉलर को पैसे देने के दबाव में आ जाता है।
स्पैम-ट्रैकिंग सिस्टम स्कैम पर लगाएगा लगाम
फर्जी कॉल को लेकर सरकार का कहना है, "इन फर्जी कॉल का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड, सरकारी अधिकारियों के रूप में दहशत फैलाने के लिए किया गया है। दूरसंचार विभाग/ट्राई अधिकारियों द्वारा मोबाइल नंबर बंद करने, फर्जी डिजिटल अरेस्ट, कूरियर में ड्रग्स/नशीले पदार्थ मिलने, पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने, सेक्स रैकेट में गिरफ्तारी आदि की धमकी देने वाले साइबर अपराध के मामले भी सामने आए हैं।"
ऐसे करेगा काम
नया सिस्टम इस तरह के फर्जी नंबरों की पहचान कर ब्लॉक कर देता है, इससे पहले कि साइबर अपराधी विक्टिम तक पहुंच सके। सरकार के अनुसार, नए सिस्टम ने पिछले 24 घंटों में लगभग 1.35 करोड़ कॉल को स्पूफ कॉल के रूप में पहचाना और ब्लॉक किया है, जो आने वाली सभी इंटरनेशनल कॉल का कुल 90% है। इस सिस्टम के साथ भारतीय दूरसंचार उपभोक्ताओं को +91-xxxxxxx नंबरों के साथ इस तरह की फर्जी कॉल में कमी देखने को मिलेगी।
