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Online Shopping में बड़ी गड़बड़ी! सरकार को मिलीं लाखों शिकायतें, ग्राहकों को मिले ₹91 करोड़

ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को अक्सर गलत प्रोडक्ट की डिलीवरी या बिना शिपिंग के डिलीवरी शो करने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने इस संबंध में चौंकाने वाला डाटा दिया है।

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ऑनलाइन शॉपिंग में हो रही बड़ी गड़बड़ी

Online Shopping का चलन जिस तेजी से बढ़ा है, ग्राहकों की शिकायतें भी उतनी ही बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं। सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, 2025 में National Consumer Helpline यानी NCH पर ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें Flipkart को लेकर दर्ज हुईं। इसके बाद Amazon और Meesho का नंबर रहा। खास बात यह है कि इस दौरान ग्राहकों की सबसे बड़ी परेशानी सामान की डिलीवरी नहीं होना रही।

सरकार के मुताबिक, NCH ने 25 अप्रैल, 2025 से 30 जून 2026 के बीच ग्राहकों को 91 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिफंड दिलाने में मदद की। इसमें 63 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतों के मामले में वापस कराई गई। कुल 1.47 लाख से ज्यादा रिफंड से जुड़ी शिकायतों का प्री-लिटिगेशन स्तर पर समाधान किया गया।

सबसे आगे कौन?

लोकसभा में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बीएल वर्मा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 2025 में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ NCH पर सबसे ज्यादा शिकायतें Flipkart को लेकर आईं। कंपनी के खिलाफ करीब 1.33 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। दूसरे नंबर पर Amazon रहा, जिसके खिलाफ 91,248 शिकायतें दर्ज हुईं। Meesho के खिलाफ 29,284 और Myntra के खिलाफ 25,384 शिकायतें आईं।

शिकायतों के मामले में टॉप 10 प्लेटफॉर्म

रैंकऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्मशिकायतों की संख्या
1Flipkart1,33,000
2Amazon91,248
3Meesho29,284
4Myntra25,384
5Netmeds19,895
6Zepto5,774
7Blinkit5,102
8Naaptol4,079
9VLE Bazaar3,907
10Nykaa3,405
यह आंकड़े 2025 में NCH पर दर्ज शिकायतों से जुड़े हैं। इनका मतलब यह नहीं है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी करने वाले हर ग्राहक को समस्या हुई, बल्कि यह NCH पर दर्ज शिकायतों की संख्या है।

सामान नहीं पहुंचना सबसे बड़ी परेशानी

ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी शिकायतों में सबसे बड़ी समस्या सामान की डिलीवरी नहीं होना रही। 2025 में इस तरह की 79,818 शिकायतें NCH पर दर्ज हुईं। इसके अलावा गलत सामान पहुंचना, कंपनी की नीति के मुताबिक सामान बदलने या रिफंड से इनकार करना, खराब या डैमेज सामान की डिलीवरी, पैसे वापस नहीं करना और सर्विस में कमी जैसी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आईं। कुछ मामलों में नकली या स्प्यूरियस प्रोडक्ट मिलने और ग्राहक की मंजूरी के बिना खाते से रकम काटने जैसी शिकायतें भी दर्ज हुईं।

क्विक कॉमर्स पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें

सिर्फ ई-कॉमर्स वेबसाइट ही नहीं, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को लेकर भी बड़ी संख्या में शिकायतें आईं। सरकार के अनुसार, 2025 में क्विक कॉमर्स से जुड़ी 5.11 लाख शिकायतें NCH पर मिलीं और इन सभी का निपटारा किया गया। इससे साफ है कि कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने वाली सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ग्राहकों की शिकायतों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।

47 प्लेटफॉर्म पर लगा जुर्माना

सरकार ने ई-कॉमर्स सेक्टर में गलत कारोबारी तरीकों पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई भी की है। Central Consumer Protection Authority यानी CCPA ने 47 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर करीब 1.12 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ग्राहकों की शिकायतों से निपटने की व्यवस्था रखना जरूरी है। सरकार के मुताबिक NCH के Convergence कार्यक्रम से 1,853 कंपनियां स्वेच्छा से जुड़ी हैं। ये कंपनियां NCH के जरिए आने वाली शिकायतों पर सीधे जवाब देती हैं और समाधान की स्थिति की जानकारी देती हैं।

शिकायत हो तो कहां करें?

अगर ऑनलाइन शॉपिंग में आपका सामान नहीं आया है, गलत या खराब प्रोडक्ट मिला है या रिफंड नहीं मिल रहा है, तो आप National Consumer Helpline पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए 1915 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। शिकायत WhatsApp या SMS के जरिए 8800001915 पर भी दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा NCH के वेब पोर्टल, NCH ऐप और UMANG ऐप के जरिए भी शिकायत की सुविधा उपलब्ध है। NCH 17 भाषाओं में शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है और यह मामला सीधे कोर्ट में ले जाने से पहले शिकायत के समाधान का रास्ता उपलब्ध कराता है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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