Shivling Niyam : शिव की कृपा के बिना कुछ भी सम्भव नहीं।सभी धार्मिक शक्तियां व देवता शिव में ही समाहित हैं। भोलेनाथ,अनाथों के नाथ, विश्वनाथ तथा कालों को मिटाने वाले महाकालेश्वर शिव परमब्रम्ह हैं। वह साकार व निराकार हैं। साकार में निराकार व निराकार में साकार का दर्शन भगवान शिव में ही होता है।शिवलिंग की पूजा बहुत ही सरल,सहज व समर्पण भाव से करना चाहिए। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से ही शिव प्रसन्न हो जाते हैं। शिव सबके हैं। प्रारब्ध को मिटाने का अमर वरदान शिव ही दे सकते हैं। बिना शक्ति के शिव अधूरे हैं। शिव पूजा के साथ माता दुर्गा की उपासना अत्यंत आवश्यक है। आप घर पर ही वास्तु अनुरूप शिवलिंग रखकर उनकी नियम पूर्वक पूजा करके भगवान शंकर को प्रसन्न कर सकते हैं। शिवलिंग की पूजा व वास्तु नियम के बारे में जानें।
इन नियमों का करें पालन
- पूजा घर में नर्मदेश्वर का शिवलिंग पूजा घर में रखें।पूजा घर ईशान दिशा में हो व उसके ईशान दिशा में शिवलिंग रखिए। ईशान मतलब उत्तर पूर्व दिशा होती है।
- अपने घर से जल लेना सीखें।यदि शिव मंदिर किसी पवित्र नदी के तट पर है तो वहां का जल भगवान को अर्पित करें।।
- दि घर में शिवलिंग स्थापित करना है तो पारद का शिवलिंग घर के पूजा घर में रखकर नीचे अर्घा बनाकर प्रतिदिन भगवान का जलाभिषेक करें। जिधर से जल निकलता है वह उत्तर दिशा में हो।
- वलिंग पर पहले सादा जल अर्पित करें। उसमें फूल इत्यादि मत मिलाएं।जल बहुत धीरे धीरे गिराएं व ॐ नमः शिवाय का महामंत्र पढ़ते रहें। दही,दूध व शहद भी भगवान को अर्पित करें। यदि आप व्याधि से पीड़ित हैं तो कुश व गंगाजल जिसे कुशोदक कहते हैं,उसी शिवलिंग पर शिववास के दिन भगवान का रुद्राभिषेक कराएं।
- शिव मंदिर में शिव परिवार अवश्य रखें। इससे परिवार में धन,ऐश्वर्य व शांति आती है।
- यदि मोक्ष व शिवधाम चाहिए तो पवित्र नदियों के जल से भगवान का रुद्राभिषेक करें व हर पल श्वांस में ॐ नमः शिवाय महामंत्र का जप चलता रहे।अ
- अपने घर में एक पात्र रखें जिसमें कई नदियों का विशेषकर गंगा,जमुना,नर्मदा,गोमती इत्यादि पवित्र नदियों का जल मिलाकर रखें व उनको नित्य शिवलिंग पर चढ़ाएं।
यह सब विधियां अपने घर में ही कर सकते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने व शिवलिंग उपासना करें। इन नियमों का पालन करके आप शिवलिंग की विधिवत पूजा कर सकते हैं।
