अध्यात्म

Annapurna Jayanti 2025: अन्नपूर्णा जयंती आज, जानें पूजा का सही समय, कथा और आरती यहां

  • Authored by: Srishti
  • Updated Dec 4, 2025, 09:04 AM IST

Annapurna Jayanti 2025 Puja Time, Vidhi, Katha, Aarti: मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है और इस साल ये खास दिन आज ही है। यहां से आप अन्नपूर्णा जयंती की पूजा का सही समय, साथ ही पूजा करने का तरीका जान सकते हैं। यहां अन्नपूर्णा जयंती की कथा और आरती भी मौजूद है।

annapurna jayanti 2025 puja time

अन्नपूर्णा जयंती 2025 (AI Generated)

Annapurna Jayanti 2025 Puja Time, Vidhi, Katha, Aarti: आज 4 दिसंबर के दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जा रही है। आज के दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि आज ही के दिन मां पार्वती ने अन्नपूर्णा माता का अवतार लिया था और धरती के प्राणियों को अन्न और पानी प्रदान किया था। पानी और अन्न की कमी से धरती पर हाहाकार मच गया था। देवी की दया से प्राणियों के भोजन और पानी की प्राप्ति हुई थी। इसलिए इस दिन देवी अन्नपूर्णा की विशेष पूजा कर दान का विधान होता है। यहां हम आपको अन्नपूर्णा जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त बता रहे हैं। यहां अन्नपूर्णा जयंती की पूजा की विधि और साथ ही कथा और आरती भी बताई गई है।

अन्नपूर्णा जयंती 2025 पूजा का समय (Annapurna Jayanti Puja Time 2025)-

आज 4 दिसंबर के दिन अन्नपूर्णा जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक है। इस दौरान आप देवी अन्नपूर्णा की पूजा कर सकते हैं।

अन्नपूर्णा जयन्ती पूजा विधि (Annapurna Jayanti Puja Vidhi)-

अन्नपूर्णा जयंती के सूर्योदय से पूर्व उठ जाएं और सूर्य को जल अर्पित कर व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव कर लें। इस दिन रसोईघर की स्नान से पूर्व अच्छे से सफाई कर लें और वहां भी गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद गुलाबजल का छिड़काव करें। अब जिस चूल्हे पर आपको भोजन बनाना है उस पर हल्दी, कुमकुम, चावल, पुष्प, धूप और दीपक से पूजन कर लें। इसके बाद मां अन्नापूर्णा की प्रतिमा या तस्वीर को किसी चौकी पर स्थापित करें। फिर एक सूत का धागा लेकर उसमें 17 गांठे लगा लें और उस धागे पर चंदन और कुमकुम लगाकर मां अन्नापूर्णा की तस्वीर के समक्ष रख दें। इसके बाद 10 दूर्वा और 10 अक्षत अर्पित करें। इसके बाद मां अन्नापूर्णा की धूप व दीप आदि से विधिवत पूजा करें और देवी से प्रार्थना करें कि, हे मां मुझे धन, धान्य, पशु पुत्र, आरोग्यता ,यश आदि सभी कुछ दें। इसके बाद पुरुष इस धागे को दाएं हाथ की कलाई पर और महिला इस धागे को बाएं हाथ की कलाई पर पहन लें। इसके बाद मां अन्नपूर्णा की कथा सुने। फिर बनाए गए प्रसाद का भोग लगाएं और 17 हरे धान के चावल और 16 दूर्वा लेकर मां अन्नापूर्णा की प्रार्थना करें और कहें, हे आप तो सर्वशक्तिमयी हैं, इसलिए सर्वपुष्पयी ये दूर्वा आपको समर्पित है। इसके बाद किसी निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को अन्न का दान अवश्य करें।

अन्नपूर्णा जयंती की कथा (Annapurna Jayanti Ki Katha)-

एक बार पृथ्वी अचानक से बंजर हो गई थी और अन्न से लेकर जल तक का अकाल पड़ गया। पृथ्वी पर जीवों के सामने जीवन संकट आ गया। तब पृथ्वीं पर लोग ब्रह्मा जी और विष्णु की आराधना करने लगे। ऋषियों ने ब्रह्म लोक और बैकुंठ लोक जाकर इस समस्या हल निकालने के लिए ब्रह्मा जी और विष्णु जी से कहा। जिसके बाद ब्रह्मा जी और विष्णु जी सभी ऋषियों के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंचे।सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की हे प्रभू पृथ्वीं लोक बड़े ही संकट से गुजर रहा है। इसलिए अपना ध्यान तोड़िए और जाग्रत अवस्था में आइए। तब शिव आंखे खोलकर सभी के आने का कारण पूछा। तब सभी ने बताया की पृथ्वीं लोक पर अन्न और जल की कमीं हो गई है। तब भगवान शिव ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि आप लोग धीरज रखिए।इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती ने पृथ्वीं लोक का भ्रमण किया। जिसके बाद माता पार्वती ने अन्नापूर्णा रूप और भगवान शिव ने एक भिक्षु का रूप ग्रहण किया। इसके बाद भगवान शिव ने भिक्षा लेकर पृथ्वींवासियों में वितरित किया। जिसके बाद पृथ्वीं पर अन्न और जल की कमी दूर हो गई और समस्त प्राणी देवी की जय- जयकार कर उठे।

अन्नपूर्णा माता की आरती (Mata Annapurna Ki Aarti)-

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,

कहां उसे विश्राम ।

अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,

लेत होत सब काम ॥

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,

कालान्तर तक नाम ।

सुर सुरों की रचना करती,

कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।

चूमहि चरण चतुर चतुरानन,

चारु चक्रधर श्याम ।

चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,

शोभा लखहि ललाम ॥

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।

देवि देव! दयनीय दशा में,

दया-दया तब नाम ।

त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,

शरण रूप तब धाम ॥

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।

श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,

श्री क्लीं कमला काम ।

कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,

वर दे तू निष्काम ॥

बारम्बार प्रणाम,

मैया बारम्बार प्रणाम ।

॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥

जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों का वार्षिक राशिफल। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

End of Article