अध्यात्म

बड़े फैसले टाल दें ये 6 राशियां, शनि का रेवती में जाना डूबा सकता है आपका पैसा

Shani Revati Nakshatra Gochar 2026: न्यायाधीश शनि मीन राशि में रहते हुए नक्षत्र बदल रहे हैं। शनि का इस चाल से कुछ राशि वालों को बड़ा लॉस देखने को मिल सकता है।

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शनि का गोचर किनके लिए अशुभ रहेगा

Shani Revati Nakshatra Gochar 2026: न्याय और कर्म के कारक शनि 20 अगस्त 2026 की शाम 7 बजकर 45 मिनट पर वक्री अवस्था में रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे। शनि इस समय मीन राशि में स्थित हैं। रेवती मीन राशि का अंतिम नक्षत्र है और इसके स्वामी बुध हैं। शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन 20 अगस्त से 9 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद वक्री शनि दोबारा उत्तराभाद्रपद के चतुर्थ पद में लौट जाएंगे।

ज्योतिषीय दृष्टि से शनि का वक्री होकर रेवती के प्रथम पद में जाना खास माना जा रहा है। वक्री शनि अक्सर उन मामलों को दोबारा सामने लाते हैं जिन्हें व्यक्ति पहले अधूरा छोड़ चुका है। नौकरी, कारोबार, आर्थिक जिम्मेदारियों, पारिवारिक मामलों या पुराने फैसलों से जुड़ी कोई स्थिति फिर से चर्चा में आ सकती है। इस दौरान जल्दबाजी में लिया गया फैसला परेशानी बढ़ा सकता है।

रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध हैं। बुध बुद्धि, तर्क, व्यापार, दस्तावेज, संचार और निर्णय क्षमता से जुड़े ग्रह हैं। शनि अनुशासन, देरी, जिम्मेदारी और कर्मफल का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों का यह संबंध बताता है कि इस अवधि में समस्या केवल मेहनत की कमी से नहीं, बल्कि गलत योजना, जल्दबाजी या कागजी प्रक्रिया में हुई गलती के कारण भी पैदा हो सकती है।

रेवती के प्रथम पद में रहेंगे शनि

शनि 20 अगस्त को रेवती के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे। रेवती का प्रथम पद धनु नवांश से जुड़ा है, जिसके स्वामी गुरु हैं। यहां शनि को बुध और गुरु दोनों के प्रभाव से होकर परिणाम देना होगा। इसका अर्थ यह हुआ कि इस अवधि में ज्ञान, सलाह और योजना तभी उपयोगी होगी जब उसे व्यावहारिक तरीके से लागू किया जाए।

वक्री शनि पुराने फैसलों की समीक्षा कराते हैं। ऐसे में जिन लोगों ने बिना पूरी जानकारी के कोई बड़ा आर्थिक, कारोबारी या करियर संबंधी फैसला लिया है, उन्हें उसे दोबारा जांचना पड़ सकता है।

20 अगस्त से 9 अक्टूबर तक बरतें विशेष सावधानी

शनि 20 अगस्त की शाम रेवती के प्रथम पद में जाएंगे और 9 अक्टूबर को वक्री अवस्था में उत्तराभाद्रपद के चतुर्थ पद में लौटेंगे। यह अवधि बहुत लंबी नहीं है, मगर शनि की वक्री चाल के कारण इसका असर उन मामलों में ज्यादा दिखाई दे सकता है जो पहले से चल रहे हैं। किसी पुराने विवाद, रुके भुगतान, नौकरी की समस्या, अधूरे प्रोजेक्ट या रिश्ते में बनी दूरी को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मीन राशि से शनि की स्थिति कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रह सकती है। आइए जानते हैं वे 6 राशियां कौन सी हैं जिन्हें इस दौरान संभलकर चलना होगा।

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए शनि का गोचर भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, लंबी दूरी की यात्रा और पिता से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है। इस अवधि में ऐसा हो सकता है कि किसी काम के लिए उम्मीद के मुताबिक सहयोग न मिले या जिस काम को आसानी से पूरा होने की उम्मीद थी उसमें देरी हो जाए।

नौकरी और करियर में भी वरिष्ठ अधिकारियों की अपेक्षाएं बढ़ सकती हैं। पिता या परिवार के किसी बुजुर्ग से जुड़े मामले में जिम्मेदारी बढ़ने की संभावना है। लंबी दूरी की यात्रा करते समय योजना और दस्तावेजों को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

कर्क राशि वालों को इस दौरान भाग्य के भरोसे कोई बड़ा फैसला लेने से बचना होगा। किसी परीक्षा, नौकरी, यात्रा या कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा काम है तो कागजी औपचारिकताओं को दोबारा जांच लेना बेहतर रहेगा।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए शनि का गोचर आठवें भाव से हो रहा है। आठवां भाव अचानक होने वाले बदलाव, बाधाओं, गोपनीय मामलों और पुराने कर्मों से जुड़े परिणामों का माना जाता है। वक्री शनि यहां पुराने मामलों को फिर से सक्रिय कर सकते हैं।

आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी। अचानक खर्च सामने आ सकते हैं या कोई पुराना भुगतान दोबारा मांग के रूप में सामने आ सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यस्थल पर ऐसी जिम्मेदारी मिल सकती है जिसे उन्होंने पहले पूरा नहीं किया था।

साझा धन, निवेश, बीमा, टैक्स या किसी दूसरे व्यक्ति के पैसों से जुड़े मामले में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सिंह राशि वालों के लिए इस समय सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी आर्थिक दस्तावेज को बिना पढ़े स्वीकार न करें।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि पांचवें भाव में रहेंगे। यह भाव शिक्षा, प्रेम संबंध, संतान, रचनात्मकता और निवेश से जुड़ा माना जाता है। वक्री शनि इन क्षेत्रों में पहले से चल रहे मामलों को दोबारा समीक्षा के लिए सामने ला सकते हैं। स्टूडेंट्स को पढ़ाई में अपनी पुरानी रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है। जिस विषय में बार-बार परेशानी आ रही है, उसे उसी तरीके से पढ़ते रहने के बजाय अपनी तैयारी की पद्धति बदलना ज्यादा उपयोगी रहेगा।

निवेश के मामले में भी सावधानी जरूरी है। किसी पुराने निवेश को लेकर दोबारा निर्णय लेना पड़ सकता है। शेयर बाजार या सट्टा जैसी जोखिम वाली जगहों पर केवल उम्मीद के आधार पर पैसा लगाने से बचना चाहिए। लव रिलेशनशिप्स में पुरानी बात दोबारा उठ सकती है। रिश्ते में पहले हुई गलती को नजरअंदाज करने के बजाय बातचीत से समाधान निकालना बेहतर रहेगा।

धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए शनि चौथे भाव में गोचर कर रहे हैं। चौथा भाव घर, माता, संपत्ति, वाहन और मानसिक शांति से जुड़ा होता है। शनि की वक्री चाल इन क्षेत्रों में रुके हुए कामों को फिर से सामने ला सकती है। घर या संपत्ति से जुड़ा कोई मामला पहले से लंबित है तो उसमें कागजी प्रक्रिया बढ़ सकती है। प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने की योजना बना रहे लोगों को दस्तावेजों की जांच अच्छी तरह करनी चाहिए।

वाहन चलाते समय भी लापरवाही से बचना होगा। घर में किसी सदस्य की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। धनु राशि वालों के लिए यह समय जल्दबाजी में नया बोझ लेने के बजाय पहले से चल रहे मामलों को व्यवस्थित करने का है। पुरानी समस्या को सही तरीके से सुलझाने पर आगे का रास्ता आसान हो सकता है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए शनि दूसरे भाव में हैं और शनि स्वयं इस राशि के स्वामी भी हैं। दूसरे भाव का संबंध धन, परिवार, वाणी और बचत से माना जाता है। कुंभ राशि पर इस समय साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है, ऐसे में शनि का वक्री होकर नक्षत्र परिवर्तन करना आर्थिक और पारिवारिक मामलों में समीक्षा का संकेत दे सकता है।

परिवार में किसी पुराने मुद्दे को लेकर बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। आपकी कही हुई कोई बात विवाद का कारण बन सकती है, इसलिए बोलते समय संयम रखना जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में भी खर्च और बचत का हिसाब ठीक रखना होगा। पुराना कर्ज, देनदारी या किसी को दिया गया पैसा दोबारा चर्चा में आ सकता है। नौकरी या व्यापार में कमाई बनी रह सकती है, लेकिन धन को संभालकर रखने की जरूरत ज्यादा होगी। कुंभ राशि वालों के लिए सबसे बड़ा मंत्र यही है कि इस दौरान वाणी और वित्त दोनों पर नियंत्रण रखें।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए यह गोचर सबसे महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि शनि इसी राशि में स्थित होकर रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे। मीन राशि से शनि का गोचर पहले भाव में है और शनि की साढ़ेसाती का मध्य चरण भी इसी राशि से जुड़ा है। वक्री शनि व्यक्ति को अपने फैसलों और जीवन की दिशा पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं। करियर में जो रास्ता कुछ समय पहले सही लग रहा था, उसे लेकर अब मन में सवाल उठ सकते हैं। नौकरी बदलने, कारोबार का तरीका बदलने या किसी पुराने निर्णय को वापस लेने की स्थिति बन सकती है। मानसिक दबाव बढ़ने का अनुभव हो सकता है, खासकर तब जब कई जिम्मेदारियां एक साथ सामने हों। शरीर की दिनचर्या और आराम की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। मीन राशि वालों को इस दौरान हर काम एक साथ करने के बजाय प्राथमिकता तय करके आगे बढ़ना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। यह समय डरने का नहीं, बल्कि जीवन में गैरजरूरी चीजों को हटाकर व्यवस्था बनाने का है। शनि जिन क्षेत्रों में कमी दिखाएंगे, वहां अनुशासन बढ़ाने से आगे चलकर फायदा मिल सकता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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