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26/11 आतंकी हमला: क्या भारत का नया कानून आतंकी सरगनाओं हाफिज और लखवी को ला सकता है कानूनी कटघरे में?

यह पहली बार है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के तहत अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधानों का इस्तेमाल किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद मामले में किया गया है। बीएनएसएस ने 1 जुलाई, 2024 को पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) का स्थान लिया था।

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क्या शिकंजे में आएंगे आतंकी हाफिज और लखवी?
Authored by: Amit Mandal
Updated Aug 19, 2026, 14:00 IST
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26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकवादी हमलों (26/11 Mumbai Attacks) के करीब 18 साल बाद भारत सरकार और मुंबई पुलिस ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक कानूनी कदम उठाया है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफिज सईद और उसके शीर्ष कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी समेत 6 प्रमुख पाकिस्तानी साजिशकर्ताओं के खिलाफ भारत में 'इन एब्सेंशिया' (In Absentia Trial) यानी आरोपी की गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पहली बार है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के तहत अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधानों का इस्तेमाल किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद मामले में किया गया है। बीएनएसएस ने 1 जुलाई, 2024 को पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) का स्थान लिया था। तो क्या वाकई में भारत का नया कानून 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को कानूनी कटघरे में ला सकता है? इस पर विस्तार से नजर डालते हैं।

क्या है नया कानून और इसमें क्या बदलाव हुआ है?

पुराने ब्रिटिश कालीन आपराधिक कानून (CrPC) के तहत भारत में किसी भी आरोपी पर मुकदमा चलाने और उसे सजा सुनाने के लिए अदालत के सामने उसका शारीरिक रूप से मौजूद होना जरूरी था। पाकिस्तान पिछले 18 सालों से इन आतंकियों को भारत को सौंपने या उन पर निष्पक्ष मुकदमा चलाने से साफ इनकार करता रहा है, जिसके कारण कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह से ठप थी। 1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 ने इस पुरानी अड़चन को खत्म कर दिया है। इस नए प्रावधान के तहत, यदि कोई घोषित भगोड़ा अदालत द्वारा जारी सम्मन या वारंट के बावजूद जानबूझकर हाजिर नहीं होता या देश से बाहर छिपा रहता है, तो अदालत उसकी अनुपस्थिति में भी केस की सुनवाई कर सकती है, सबूतों और गवाहों के बयान दर्ज कर सकती है और अंतिम फैसला सुना सकती है।

किन टॉप 6 पाकिस्तानी आतंकियों पर चलेगा मुकदमा?

मुंबई पुलिस ने विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के माध्यम से मुंबई की विशेष अदालत में जिन 6 मुख्य आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया शुरू की है। इनमें ये नाम शामिल हैं-

  • हाफिज मोहम्मद सईद: लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा का संस्थापक, जिसने 26/11 हमले की पूरी साजिश रची।
  • जकी-उर-रहमान लखवी: लश्कर का शीर्ष सैन्य कमांडर, जिसने कराची के कंट्रोल रूम से 10 हमलावरों को दिशा-निर्देश दिए थे।
  • साजिद मजीद मीर: हमले का प्रोजेक्ट मैनेजर और मुख्य हैंडलर, जिसने आतंकियों को वॉयस-ओवर-आईपी (VoIP) के जरिए निर्देश दिए।
  • अबू अलकमा: लश्कर कमांडर, जो हमले की योजना और फंडिंग में शामिल था।
  • असीम उर्फ अबू कहाफा: हमलावरों को पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद और कराची में सैन्य और समुद्री प्रशिक्षण देने वाला ट्रेनर।
  • मेजर अब्दुल रहमान पाशा: पाकिस्तानी सेना और ISI का पूर्व अधिकारी, जिसने लश्कर और अमेरिकी-आतंकी डेविड हेडली के बीच की कड़ी के रूप में काम किया।

'इन एब्सेंशिया' ट्रायल की पूरी कानूनी प्रक्रिया

कानूनी रूप से यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे चुनौती न दी जा सके। अदालत सबसे पहले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों में नोटिस जारी कर और इंटरपोल के जरिए इन आरोपियों को अदालत में पेश होने की अंतिम समय सीमा (आमतौर पर 30 दिन) देती है। अगर आरोपी तय सीमा में पेश नहीं होते, तो अदालत उनकी तरफ से केस लड़ने और बचाव पक्ष की दलीलें रखने के लिए राज्य-नियुक्त बचाव पक्ष का वकील नियुक्त करेगी। अभियोजन पक्ष कोर्ट के सामने कसाब का इकबालिया बयान, डेविड हेडली की गवाही, अमेरिका की एफबीआई (FBI) द्वारा शेयर किए गए सैटेलाइट फोन इंटरसेप्ट्स, फॉरेंसिक सबूत और गवाहों के बयान दर्ज करवाएगा। प्रक्रिया पूरी होने पर अदालत इन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद या मौत की सजा सुना सकती है।

भारत के लिए कूटनीतिक और कानूनी महत्व

अब तक हाफिज सईद और लखवी सिर्फ आरोपी या मोस्ट वांटेड थे। इस फैसले के बाद वे भारतीय न्याय व्यवस्था के तहत 'सजायाफ्ता आतंकी' घोषित हो जाएंगे। जब भारत की एक संवैधानिक अदालत इन आतंकियों को दोषी ठहराएगी, तो भारत संयुक्त राष्ट्र, FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) और G20 जैसे मंचों पर पाकिस्तान पर कड़े प्रतिबंध लगाने और इनके प्रत्यर्पण का अंतरराष्ट्रीय दबाव बना सकेगा।

क्या-क्या कदम उठा सकेगा भारत?

भारतीय अदालत के फैसले के बाद भारत सरकार विदेश में स्थित इनकी किसी भी संपत्ति को जब्त करने का अनुरोध कर सकती है। साथ ही, अगर ये आरोपी कभी किसी तीसरे देश में पकड़े जाते हैं, तो भारत उन्हें तुरंत अपनी कस्टडी में ले सकता है। चूंकि हाफिज सईद और लखवी पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी (ISI) की सुरक्षित पनाहगाह में हैं, इसलिए यह कानून रातों-रात उन्हें पाकिस्तान से भारत खींचकर नहीं ला सकता। हालांकि इस कानून से आतंकियों को तुरंत भारत की जेल में नहीं डाला जा सकेगा, लेकिन यह भारत की कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई का सबसे बड़ा मील का पत्थर है। यह कदम 26/11 के 166 निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवारों को 18 साल बाद एक कानूनी इंसाफ देगा और पाकिस्तान के उस झूठ का हमेशा के लिए पर्दाफाश कर देगा कि भारत के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

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