Kalki Jayanti 2026: सावन माह शुक्ल षष्ठी के दिन भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार माने जाने वाले भगवान कल्कि की जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह अवसर 18 अगस्त को पड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि का अवतार अभी होना बाकी है। कल्कि जयंती उनके भविष्य में होने वाले अवतार की स्मृति और प्रतीक्षा से जुड़ा पर्व है।
भगवान कल्कि को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका जन्म कब होगा, कहां होगा, उनके माता-पिता कौन होंगे और आखिर कलियुग में अभी कितना समय बाकी है? इन सवालों का जवाब हिंदू धर्मग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण में स्पष्ट रूप से है। वहीं, कल्कि पुराण में उनके स्वरूप और जीवन से जुड़ी कथा का विस्तार मिलता है।
सावन की षष्ठी को मनाई जाती है कल्कि जयंती
कल्कि जयंती श्रावण शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक परंपरा में इसी तिथि को भगवान कल्कि का भविष्य में होने वाले प्राकट्य होना है।
कहां होगा भगवान कल्कि का जन्म
श्रीमद्भागवत महापुराण के द्वादश स्कंध के दूसरे अध्याय में भगवान कल्कि के जन्मस्थान का उल्लेख मिलता है। श्लोक 12.2.18 में कहा गया है कि भगवान कल्कि शम्भल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के घर में प्रकट होंगे।
श्लोक में कहा गया है—
शम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मन:।
भवने विष्णुयशस: कल्कि: प्रादुर्भविष्यति॥
अर्थात शम्भल ग्राम के प्रतिष्ठित ब्राह्मण विष्णुयश के घर भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आधुनिक समय में शम्भल की भौगोलिक पहचान को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं। कुछ परंपराएं इसे वर्तमान उत्तर प्रदेश के संभल क्षेत्र से जोड़ती हैं, जबकि शास्त्रीय संदर्भ मुख्य रूप से 'शम्भल ग्राम' का उल्लेख करता है।
कौन होंगे भगवान कल्कि के माता-पिता
कल्कि पुराण की परंपरा में भगवान कल्कि के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति बताया गया है। इस कथा के अनुसार भगवान कल्कि का जन्म एक ऐसे ब्राह्मण परिवार में होगा, जहां धर्म और सदाचार की प्रधानता होगी। श्रीमद्भागवत में पिता विष्णुयश का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। माता का नाम भागवत के इस श्लोक में नहीं दिया गया है, जबकि कल्कि परंपरा और कल्कि पुराण में सुमति का नाम मिलता है। हालांकि, अलग-अलग ग्रंथों में कल्कि कथा के विवरण का विस्तार अलग स्तर पर मिलता है।
भगवान कल्कि का जन्म कैसे होगा
कल्कि के अवतार का उद्देश्य सामान्य जन्म की तरह केवल एक परिवार में संतान के रूप में आना नहीं बताया गया है। पुराणों में उनके प्राकट्य को धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के अंत करने वाला बताया गया है। श्रीमद्भागवत के अनुसार कलियुग के अंतिम समय में जब अधर्म और अन्याय चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में प्रकट होंगे। इसके बाद वे दुष्ट और अधर्मी शासकों का विनाश करेंगे और धर्म की पुनर्स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेंगे। भागवत के अगले श्लोकों में कल्कि के देवदत्त नामक तीव्रगामी घोड़े पर सवार होकर आने और तलवार के माध्यम से अधर्म का दमन करने का वर्णन मिलता है।
कल्कि पुराण की कथा में उनके आगे के जीवन से जुड़े कई प्रसंग आते हैं। इसमें उन्हें शास्त्र और युद्धविद्या की शिक्षा मिलने तथा भगवान परशुराम से मार्गदर्शन प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। जो बाद में भगवान शिव की उपासना करेंगे और दिव्य अस्त्र प्राप्त करेंगे।
अभी कल्कि अवतार में कितने साल बाकी हैं
हिंदू कालगणना में कलियुग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष मानी गई है। परंपरागत गणना के अनुसार कलियुग का आरंभ 3102 ईसा पूर्व से माना जाता है। 2026 तक इस युग के लगभग 5,100 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं। इस गणना के आधार पर कलियुग के समाप्त होने में अभी लगभग 4 लाख 26 हजार 873 वर्ष शेष माने जा सकते हैं।
कलियुग के अंत में कैसी होगी दुनिया
श्रीमद्भागवत के द्वादश स्कंध में कलियुग के अंतिम चरण की स्थिति का विस्तार से वर्णन किया गया है। जैसे-जैसे कलियुग आगे बढ़ेगा, धर्म, सत्य, पवित्रता, दया, स्मृति और आयु में कमी आने की बात कही गई है। समाज में लोभ, असत्य, हिंसा और अन्याय बढ़ेगा। कल्कि का प्राकट्य इसी चरम स्थिति के बाद बताया गया है। भागवत के अनुसार भगवान के आने के बाद अधर्म का दमन होगा और लोगों के भीतर फिर से धर्म एवं सद्गुणों की स्थापना होगी।
धर्म की स्थापना करेंगे भगवान कल्कि
कल्कि अवतार का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना नहीं बताया गया है। इसका अंतिम परिणाम धर्म की पुनर्स्थापना और नए युग की शुरुआत है। पुराणिक परंपरा में कल्कि के प्राकट्य को कलियुग के अंत और सतयुग के पुनः आरंभ के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है। कलियुग की समाप्ति के बाद धर्मप्रधान व्यवस्था की स्थापना होगी और युगचक्र फिर आगे बढ़ेगा।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पुराणों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
