Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती माता पार्वती के जन्मोत्सव का पावन पर्व माना जाता है। इस दिन लोग माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं और पूरे श्रद्धा भाव से उनकी पूजा करते हैं। लेकिन अगर आपने कभी ध्यान दिया हो, तो इस दिन भगवान शिव की भी साथ में पूजा की जाती है। आखिर इसकी वजह क्या है? क्या यह सिर्फ एक परंपरा है या इसके पीछे कोई धार्मिक कारण भी छिपा है? शास्त्र बताते हैं कि शिव और शक्ति को कभी अलग नहीं माना गया। इसलिए पार्वती जयंती पर दोनों की एक साथ आराधना का विशेष महत्व है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस परंपरा के पीछे शास्त्र क्या कहते हैं।
शिव और पार्वती साथ से ही है सृष्टि का संतुलन
धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक बताया गया है। भगवान शिव को चेतना और माता पार्वती को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जब तक शक्ति साथ न हो, तब तक शिव भी पूर्ण नहीं माने जाते। यही वजह है कि पार्वती जयंती पर दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
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अर्धनारीश्वर का स्वरूप देता है जीवन की बड़ी सीख
भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप इस बात का प्रतीक है कि स्त्री और पुरुष दोनों का समान महत्व है। इस स्वरूप में शिव और माता पार्वती एक ही शरीर के दो हिस्सों के रूप में दिखाई देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह हमें सिखाता है कि परिवार और समाज का संतुलन तभी बना रहता है, जब दोनों एक-दूसरे का सम्मान करें और साथ चलें। पार्वती जयंती पर संयुक्त पूजा इसी संदेश को याद दिलाती है।
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सुखी दांपत्य जीवन की कामना से होती है पूजा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठिन तप किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियां भी अच्छा जीवनसाथी मिलने की प्रार्थना करती हैं।
परिवार में प्रेम और खुशहाली का प्रतीक
शिव-पार्वती को आदर्श गृहस्थ जीवन का उदाहरण माना जाता है। मान्यता है कि उनकी एक साथ पूजा करने से घर में प्रेम, आपसी समझ और शांति बनी रहती है। कई लोग इस दिन पूरे परिवार के साथ पूजा करते हैं, ताकि रिश्तों में मिठास बनी रहे और घर में सुख-समृद्धि का वास हो।
शास्त्रों में बताया गया है संयुक्त पूजा का महत्व
शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि शिव और शक्ति अलग नहीं, बल्कि एक ही दिव्य शक्ति के दो स्वरूप हैं। इसलिए जब उनकी एक साथ पूजा की जाती है, तो पूजा पूर्ण मानी जाती है। यही कारण है कि पार्वती जयंती पर केवल माता पार्वती ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की भी आराधना की जाती है। यह परंपरा हमें प्रेम, विश्वास, समर्पण और परिवार को साथ लेकर चलने का संदेश भी देती है।
