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Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी पूजा में किन मंत्रों का जाप करें? जानें संकल्प से लेकर शयन-क्षमा मंत्र

Devshayani Ekadashi Mantra: देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा की जाती है, जिस दौरान विभिन्न मंत्रों का जाप भी किया जाता है। आज यहां पर आप देवशयनी एकादशी के दिन जपने वाले सभी जरूरी मंत्रों के लिरिक्स और समय के बारे में जानेंगे।

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देवशयनी एकादशी पर किन-किन मंत्रों का करें जाप?

Devshayani Ekadashi Mantra Jaap In Hindi: देवशयनी एकादशी के दिन से चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और कुल 4 महीने तक इसी अवस्था में रहते हैं। हालांकि, इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा-अर्चना भी की जाती है। साथ ही पूजा के दौरान विभिन्न वैदिक और पौराणिक मंत्रों का जाप किया जाता है। मान्यता है कि सही मंत्रों के साथ की गई पूजा का फल जल्दी मिलता है। चलिए जानें देवशयनी एकादशी पूजा में जपने वाले संकल्प, शयन और क्षमा आदि मंत्रों के बारे में।

संकल्प मंत्र

देवशयनी एकादशी की पूजा का आरंभ संकल्प मंत्र के साथ होता है। इस दिन स्नान आदि कार्य करने के बाद शुद्ध पीले रंग के कपड़े पहनें। घर के मंदिर में विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करने के बाद अपने हाथ में जल और अक्षत लें। अब 'सत्यस्थ: सत्यसंकल्प: सत्यवित् सत्यदस्तथा। धर्मो धर्मी च कर्मी च सर्वकर्मविवर्जित:।। कर्मकर्ता च कर्मैव क्रिया कार्यं तथैव च। श्रीपतिर्नृपति: श्रीमान् सर्वस्यपतिरूर्जित:।।' मंत्र का 1 बार जाप करें। इसके बाद अपना नाम, गोत्र और व्रत का प्रकार (निर्जला, फलाहार या नक्तभोजी) बोलने के बाद जल को किसी थाली में छोड़ दें।

शयन मंत्र

देवशयनी एकादशी के दिन से विष्णु जी 4 महीने के लिए सो जाते हैं। इसलिए इस दिन उन्हें सुलाया भी जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन शाम में पूजा करने के बाद एक छोटे बेड पर विष्णु जी की मूर्ति को शयन कराएं। इस दौरान 'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम। विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।' मंत्र का 7, 11, 13 या 108 बार जाप करें। इसके बाद अपनी रात की पूजा का समापन कर दें।

विष्णु मंत्र

भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप आप सुबह-शाम पूजा के दौरान कर सकते हैं।

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।
  • श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
  • ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।
  • ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।
  • ऊँ श्री त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि तन्नो: तुलसी प्रचोदयात।।
  • ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
  • मंगलं भगवान विष्णुः, मंगलम् गरुड़ध्वजः। मंगलम् पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः।।
  • ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।

क्षमा मंत्र

अधिकतर लोगों से पूजा के दौरान कुछ न कुछ गलती हो जाती है, जिसके लिए क्षमा मांगना बहुत जरूरी है। खासकर, जो बड़े व्रत होते हैं, उनकी पूजा के बाद क्षमा मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। देवशयनी एकादशी का व्रत खोलने से पहले विष्णु जी की मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़े हों और उनसे पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगें। फिर अपने हाथ में जल या एक पीला फूल लें और 'भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:। कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।' मंत्र का 3, 5, 7 या 11 बार जाप करें। अब जल या फूल को विष्णु जी के चरणों में अर्पित कर दें।

2026 में देवशयनी एकादशी कब है?

द्रिक पंचांग की गणना के मुताबिक, आज 24 जुलाई 2026 की सुबह 09 बजकर 12 मिनट से आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवशयनी एकादशी का आरंभ हो गया है, जिसका समापन कल 25 जुलाई 2026 की सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में देवशयनी एकादशी का व्रत कल 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। वहीं, इस व्रत का पारण परसों 26 जुलाई 2026 को सुबह 05:39 से सुबह 08:22 बजे के बीच करना शुभ रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।

Nidhi Jain
निधि जैनauthor

निधि जैन Times Now नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर जुड़ी हैं। इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 साल से ज्यादा का अनुभव है। पढ़ने और लिखने के प्रति इनकी रुचि ही इन्हें जर्नलिज्म की ओर लेकर आई। निधि अब तक हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर 4,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुकी हैं।

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