गजरा भारतीय स्त्रियों के श्रृंगार का हिस्सा रहा है, लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं है। खासकर चमेली के फूलों से बने गजरे की खुशबू कई लोगों के लिए सुकून, अपनापन और पुरानी अच्छी यादों से जुड़ी होती है। यही वजह है कि गजरा लगाना एक छोटा सा मूड बूस्टिंग रिचुअल बन सकता है। जी हां, मनोविज्ञान भी इस बात की तस्दीक करता है।
खुशबू मूड में महसूस होता है बेहतर
मनोविज्ञान मानता है कि हमारी सूंघने की क्षमता का भावनाओं और यादों से गहरा संबंध है। किसी खास खुशबू से अचानक कोई पुरानी घटना, जगह या व्यक्ति याद आ सकता है। चमेली जैसी सुखद खुशबू कई लोगों में आराम और सकारात्मक भावनाओं का अनुभव पैदा कर सकती है। इसलिए गजरा लगाने के बाद आने वाली महक दिन के मूड को थोड़ा बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
तनाव के बीच दे सकता है सुकून
साइकोलॉजी की माने तो जब दिनभर काम, जिम्मेदारियों और भागदौड़ के बीच दिमाग लगातार सक्रिय रहता है, तब कोई परिचित और पसंदीदा खुशबू कुछ देर के लिए ध्यान को वर्तमान क्षण में ला सकती है। गजरे की महक ऐसा ही छोटा सा ब्रेक दे सकती है। इसे तनाव कम करने की एक सहायक आदत माना जा सकता है, लेकिन यह तनाव या एंग्जायटी का उपचार नहीं है।
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पुरानी अच्छी यादों से जोड़ सकता है
किसी व्यक्ति के लिए गजरा शादी की याद हो सकता है, किसी के लिए त्योहारों की, तो किसी के लिए बचपन में मां या दादी के हाथों बालों में फूल लगाने की। जब कोई वस्तु सकारात्मक अनुभवों से जुड़ जाती है, तो उसे दोबारा महसूस करना भावनात्मक रूप से अच्छा लग सकता है। यानी गजरे का असर सिर्फ फूल की खुशबू से नहीं, उससे जुड़ी व्यक्तिगत स्मृतियों से भी आता है।
खुद को संवारने का एहसास देता है
गजरा लगाना खुद को तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अपने बालों को संवारना, पसंदीदा कपड़े पहनना और फूल लगाना व्यक्ति को यह एहसास दे सकता है कि उसने खुद के लिए थोड़ा समय निकाला है। यह छोटी सी सेल्फ केयर आदत मूड पर सकारात्मक असर डाल सकती है।
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रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी खुशी जोड़ता है
मेंटल वेल-बीइंग हमेशा किसी बड़े बदलाव से नहीं आती। पसंदीदा संगीत सुनना, पौधों की देखभाल करना, सुबह की चाय या बालों में गजरा लगाना जैसे छोटे सुख भी दिन को बेहतर महसूस करा सकते हैं।
हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि गजरा डिप्रेशन, एंग्जायटी या किसी अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या का इलाज नहीं है। अगर लंबे समय से उदासी, बेचैनी या तनाव बना हुआ है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
