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कभी सलाद नहीं खाती मलाइका अरोड़ा, जानें हेल्दी डाइट के लिए जरूरी या सिर्फ ऑप्शन है सलाद

मलाइका अरोड़ा की कोशिश रहती है कि खाने में घर के बने और ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक विकल्प शामिल हों। उनके मुताबिक दोपहर के खाने में चावल, सब्जियां और दाल जरूर होनी चाहिए।

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सलाद ना खाने से क्या होता है? (Photo: Malaika Arora insta)

जब भी हेल्दी डाइट की बात हो तो वो बिना सलाद के खत्म नहीं होती। लोग फिट रहने के लिए जमकर सलाद खाते हैं। हालांकि 52 साल की मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) की लाजवाब फिटनेस में इस सलाद का कोई योगदान नहीं है। जी हां, मलाइका अरोड़ा को सलाद पसंद नहीं हैं। उनका कहना है कि सलाद खाने पर उन्हें ऐसा लगता है जैसे वह सिर्फ हवा खा रही हैं। इसके बावजूद वह अपनी डाइट को संतुलित रखने पर ध्यान देती हैं। यहां सवाल ये उठता है कि हेल्दी डाइट का मतलब सलाद खाना जरूरी है क्या?

सलाद जरूरी है या सिर्फ एक विकल्प?

डाइटीशियन्स भी कहते हैं कि सलाद को हेल्दी खाने का एकमात्र तरीका मानना सही नहीं है। हर व्यक्ति को कच्ची सब्जियां पसंद हों, यह जरूरी नहीं। कई लोगों को सलाद पेट के लिए भारी भी लग सकता है या लंबे समय तक इसे डाइट में बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

एक अच्छी डाइट का मतलब सिर्फ सलाद खाना नहीं है। शरीर को फाइबर, विटामिन, प्रोटीन और अच्छे फैट की जरूरत होती है। ये चीजें पकी हुई सब्जियों, दाल, सब्जी, हल्की भुनी या भाप में पकाई गई चीजों से भी मिल सकती हैं। इसलिए अगर किसी को सलाद पसंद नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी डाइट हेल्दी नहीं हो सकती।

चावल को लेकर भी गलतफहमी

चावल को लेकर भी अक्सर लोगों के मन में यह धारणा रहती है कि वजन या ब्लड शुगर की चिंता करने वालों को इससे दूरी बना लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है। चावल को सही मात्रा में दाल, दही और फाइबर वाली सब्जियों के साथ खाया जाए तो यह संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकता है। यहां सबसे ज्यादा मायने रखती है मात्रा और पूरी प्लेट का संतुलन।

डाइट ऐसी हो जिसे लंबे समय तक निभा सकें

ऐसी डाइट ज्यादा काम की होती है, जिसे व्यक्ति लंबे समय तक आसानी से अपना सके। अगर किसी खाने को पूरी तरह छोड़ना आपको लगातार मुश्किल लग रहा है, तो ऐसी डाइट लंबे समय तक चलाना भी कठिन हो सकता है।

मलाइका अरोड़ा की डाइट

मलाइका कहती हैं कि वह खाना छोड़ने के बजाय घर का बना खाना ज्यादा पसंद करती हैं। उनकी कोशिश रहती है कि खाने में घर के बने और ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक विकल्प शामिल हों। उनके मुताबिक दोपहर के खाने में चावल, सब्जियां और दाल जरूर होनी चाहिए। यानी उनकी प्लेट में वह खाना शामिल है, जिसे आम भारतीय घरों में रोज खाया जाता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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