भारत में फैटी लिवर की समस्या तेजी से फैल रही है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि करीब 38 प्रतिशत वयस्क फैटी लिवर की परेशानी से जूझ रहे हैं। यानी मोटे तौर पर हर तीन में से एक वयस्क को फैटी लिवर की दिक्कत है। ये कहना गलत ना होगा कि फैटी लिवर लोगों की लाइफस्टाइल में घुसपैठ कर चुका है।
डॉ. सौरव सेठी, MD, MPH गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और पब्लिक हेल्थ के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने Harvard और Stanford जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है और AIIMS से भी उनका पेशेवर जुड़ाव रहा है। डॉ. सेठी का कहना है कि फैटी लिवर की समस्या में रोजाना लिए जाने वाले ड्रिंक्स का चुनाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में मीठे और ज्यादा कैलोरी वाले विकल्पों की जगह बिना चीनी वाले ड्रिंक्स को प्राथमिकता दी जा सकती है।
फैटी लिवर से निपटने में मददगार हो सकते हैं ये ड्रिंक्स
डॉ. सेठी के मुताबिक ब्लैक कॉफी अच्छा विकल्प है। बस इसमें फ्लेवर्ड सिरप और हैवी क्रीम से बचें। चाहें तो थोड़ी मात्रा में दूध मिला सकते हैं।
ग्रीन टी भी बिना चीनी के पी जा सकती है। इसे गर्म या ठंडा, दोनों तरह से लिया जा सकता है। इसी तरह बिना चीनी वाला स्पार्कलिंग वॉटर भी अच्छा विकल्प है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा नींबू निचोड़ सकते हैं।
बिना चीनी वाला सोया मिल्क लेते समय ऐसा विकल्प चुनें, जो कैल्शियम और विटामिन डी से फोर्टिफाइड हो। वहीं, बिना चीनी वाला बादाम का दूध चुनते समय लेबल जरूर देखें। इसमें 'अनस्वीटेंड' होना सबसे महत्वपूर्ण है।
अगर आप अलग-अलग स्वाद चाहते हैं, तो हर्बल टी भी विकल्प हो सकती है। पेपरमिंट, अदरक या हिबिस्कस टी बिना अतिरिक्त चीनी के ली जा सकती है। रात के खाने के बाद किसी मीठी चीज की जगह इसे पीना एक विकल्प हो सकता है।
सबसे आसान और जरूरी ड्रिंक है पानी। अगर सादा पानी पसंद नहीं आता, तो उसमें खीरा, पुदीना या नींबू डालकर स्वाद बदला जा सकता है।
क्यों हो जाती है फैटी लिवर की समस्या
फैटी लिवर की समस्या तब होती है, जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। आम धारणा है कि यह समस्या सिर्फ शराब पीने वालों को होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। बिना शराब के भी फैटी लिवर हो सकता है। इसका एक बड़ा कारण पेट के आसपास बढ़ती चर्बी और मोटापा है।
शरीर में इंसुलिन ठीक से काम न करने यानी इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में भी लिवर में फैट जमा होने लगता है। डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड भी इसका जोखिम बढ़ाते हैं। इसके अलावा, ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ और शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लंबे समय तक बैठे रहना भी फैटी लिवर की वजह बन सकता है। कुछ मामलों में शराब का अधिक सेवन, कुछ दवाएं, तेजी से वजन कम होना या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती फैटी लिवर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को इसका पता रूटीन ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है। इसलिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को नियंत्रित रखना लिवर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डॉ. सैरव सेठी के वीडियो में बताए गए टिप्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी संबंधित क्रिएटर के व्यक्तिगत विचार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन टिप्स या दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।)
