प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की मौत का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। घटना को लेकर ब्रज के साधु-संतों में नाराजगी है। संतों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी।
मथुरा के परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में साधु-संतों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता हरिदासीय संप्रदाय के आचार्य महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जू महाराज ने की। बैठक में विख्यात संत प्रेमानंद महाराज के एक दीक्षित साधक की बीते शुक्रवार को हुई मौत को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। संतों ने घटना की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग शासन-प्रशासन से की।
बैठक में मौजूद महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बड़ी संख्या में दीक्षित साधक और साधिकाएं निवास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आश्रम परिसर से आए दिन अप्रिय घटनाओं की सूचनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि बीते दिनों हुई साधक की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने घटना की परिस्थितियों और आत्महत्या के कथित कारणों की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
महंत गंगा दास महाराज ने बैठक में कहा कि मथुरा के जवाहर बाग प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य खादर क्षेत्र में दूसरा जवाहर बाग तैयार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऐसा है तो शासन-प्रशासन की ओर से इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई तो साधु-संतों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं संत योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर मामले की जांच की मांग करेगा।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जू महाराज ने कहा कि वृंदावन में बड़ी संख्या में साधु-संत निवास करते हैं,लेकिन कई मामलों में शासन-प्रशासन का अपेक्षित ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी का फायदा उठाकर अपराधी प्रवृत्ति के कुछ लोग साधु-संतों का चोला धारण कर वृंदावन में निवास कर रहे हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले कथित कृत्यों से पूरे संत समाज की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने शासन-प्रशासन से वृंदावन में निवास कर रहे साधु-संतों की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की।
संतों ने कहा कि साधक की मौत के मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी के बजाय सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिससे घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें। बैठक में संत समाज ने प्रशासन से जांच में पारदर्शिता बरतने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की।
