मानव इतिहास में अंतरिक्ष की गहराइयों को समझने और वहां जीवन को सुगम बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। शुक्रवार 6:05 PM ETD यानी भारतीय समयानुसार शनिवार तड़के 3:35 AM पर फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से स्पेसएक्स के 'फाल्कन 9' रॉकेट ने शान से उड़ान भरी। नासा के साथ करार के तहत यह स्पेसएक्स का 34वां कमर्शियल आपूर्ति मिशन (CRS-34) है, जो अंतरिक्ष में चक्कर काट रही लैब (ISS) पर मौजूद 'एक्सपिडिशन 74' के वैज्ञानिकों के लिए करीब 6,500 पाउंड (यानी लगभग 2,950 किलोग्राम) वजनी सामान लेकर रवाना हो चुका है।
रविवार सुबह खुद-ब-खुद जुड़ेगा यान
यह अंतरिक्ष यान पूरी तरह से ऑटोमैटिक तकनीक पर काम कर रहा है। बिना किसी इंसानी मदद के यह यान भारतीय समयानुसार रविवार (17 मई 2026) की शाम के साढ़े 4 बजे अंतरिक्ष स्टेशन के 'हारमनी मॉड्यूल' नाम के हिस्से से अपने आप जुड़ (Dock) जाएगा। अगर आप इस ऐतिहासिक पल को लाइव देखना चाहते हैं, तो नासा+ (NASA+), अमेजन प्राइम और नासा के यूट्यूब चैनल पर रविवार सुबह 5:30 बजे से इसका सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।
क्या है इसकी खासियत
इस बार जो वैज्ञानिक प्रयोग अंतरिक्ष भेजे गए हैं, वे भविष्य में हमारी चिकित्सा और तकनीक की दुनिया को पूरी तरह बदल सकते हैं:
लकड़ी से बनेगी हड्डी (बोन स्कैफोल्ड): ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर या खोखला होना) जैसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। वैज्ञानिक अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में लकड़ी के टुकड़ों का इस्तेमाल करके इंसानी हड्डी का ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि नई चिकित्सा तकनीक खोजी जा सके।
इंसानी खून पर अंतरिक्ष का असर: स्पेस स्टेशन में वैज्ञानिक यह परखेंगे कि अंतरिक्ष के अजीब माहौल में हमारी लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells) और शरीर का एक जरूरी अंग 'प्लीहा' (Spleen) कैसे बदलते हैं।
सौर तूफानों और बिजली ग्रिड की सुरक्षा: यान में एक ऐसा उपकरण भेजा गया है जो पृथ्वी के चारों तरफ मौजूद आवेशित कणों (Charged Particles) का अध्ययन करेगा। यह तकनीक भविष्य में हमारी धरती के बिजली ग्रिड और अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष के मौसम (सौर तूफानों) से बचाएगी।
चांद की रोशनी का सटीक माप: एक अन्य उपकरण पृथ्वी और चंद्रमा से टकराकर वापस लौटने वाली सूर्य की रोशनी का बिल्कुल सटीक पैमाना नापेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि अरबों साल पहले ग्रह कैसे बने थे।
25 साल से अंतरिक्ष में लगातार रह रहा है इंसान
पिछले 25 से अधिक सालों से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इंसान लगातार रह रहे हैं और काम कर रहे हैं। शून्य गुरुत्वाकर्षण वाले इस माहौल में ऐसे रिसर्च संभव हो पाते हैं, जो पृथ्वी पर करना नामुमकिन है। नासा इन प्रयोगों के जरिए अपने महत्वाकांक्षी 'आर्टेमिस' (Artemis) मिशन की तैयारी कर रहा है, जिसका मकसद इंसानों को दोबारा चांद पर लंबे समय के लिए बसाना और भविष्य में मंगल (Mars) ग्रह तक का सफर तय करना है।
जून में होगी धरती पर वापसी
यह 'ड्रैगन' अंतरिक्ष यान जून के मध्य तक स्पेस स्टेशन पर ही तैनात रहेगा। वहां जरूरी काम निपटाने और वैज्ञानिकों द्वारा किए गए रिसर्च के नतीजों को समेटकर यह यान वापस धरती की तरफ उड़ान भरेगा और कैलिफोर्निया के समुद्र में सुरक्षित लैंड (Splashdown) करेगा।
