Roman Space Telescope: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने रविवार को नए ग्रहों की खोज और ब्रह्मांड के छिपे हुए रहस्यमयी 'डार्क एनर्जी' का पता लगाने के लिए अपना नया टेलीस्कोप सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली खगोलशास्त्री डॉ. नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर गया, जिन्हें 'मदर ऑफ हबल' कहा जाता है।
स्पेसएक्स के शक्तिशाली 'फाल्कन हैवी' रॉकेट ने केनेडी स्पेस सेंटर से 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' को अपने कंधे में लादकर उड़ान भरी। इस टेलीस्कोप की लागत लगभग 36 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
कहां तैनात होगा रोमन
रोमन स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग 16 लाख किलोमीटर दूर उस बिंदु की ओर बढ़ रहा है, जहां पहले से नासा का 'वेब स्पेस टेलीस्कोप' तैनात है। इस टेलीस्कोप को अपनी मंजिल तक पहुंचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: मंगल पर दिखी 'जेलीफिश' जैसी रहस्यमयी आकृति, 13 सेकंड बाद कहा हो गई गायब! क्या NASA ने खोज लिया एलियन?
नासा की साइंस मिशन डायरेक्टर निक्की फॉक्स के मुताबिक, रोमन स्पेस टेलीस्कोप हजारों सुपरनोवा, हजारों-लाखों ग्रह, अरबों आकाशगंगाओं और करोड़ों-अरबों तारों का पता लगाने में सक्षम होगी। इसकी खासियत इसका बेहद बड़ा 'फील्ड ऑफ व्यू' है, जिससे वैज्ञानिक उन क्षेत्रों का अध्ययन कर पाएंगे जिन्हें पहले देखना संभव नहीं था।
NASA Roman Mission Launch
हबल से 100 गुना ज्यादा ताकतवर
रोमन स्पेस टेलीस्कोप का देखने का दायरा हबल टेलीस्कोप की तुलना में 100 गुना से भी अधिड़ चौड़ा है। हबल पिछले 36 वर्षों से अंतरिक्ष की गहराइयों में झांक रहा है। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि हबल जिस काम को पूरा करने में 100 साल का समय लेता, रोमन उसे महज एक माह में ही स्कैन कर सकता है।
सटीक कैमरे
रोमन स्पेस टेलीस्कोप में हबल जितनी संवेदनशीलता वाला वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड कैमरा लगा है, जो हजार गुना तेजी से काम करता है। इसके अलावा रोमन टेलीस्कोप में एक ऐसा उपकरण भी है, जो किसी तारे की रोशनी को रोककर उसके आसपास मौजूद बेहद कमजोर ग्रहों की सीधे तस्वीर लेने में सक्षम है।
रोमन का क्या है मकसद
रोमन मिशन का एक अहम मकसद डार्क मैटर और डार्क एनर्जी को समझना है। माना जाता है कि ये दोनों ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से का निर्माण करते हैं, लेकिन इनके बारे में अभी भी बहुत कुछ अज्ञात है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: मंगल ग्रह का कैसे खत्म हुआ पानी? नई स्टडी ने रहस्य से उठाया पर्दा
5 साल तक आसमान को स्कैन करेगा रोमन
इस टेलीस्कोप का प्राथमिक मिशन 5 साल का है, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसे भविष्य में ईंधन भरने के लिए भी डिजाइन किया गया है। हालांकि, अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कब जारी होगी पहली तस्वीर
नासा ने रोमन को भले ही आज लॉन्च कर दिया है, लेकिन इसे डेस्टिनेशन में पहुंचने में तीन माह लगेंगे। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद नियमित वैज्ञानिक संचालन शुरू होगा और 2027 की शुरुआत में इसकी पहली ब्रह्मांडीय तस्वीरें जारी की जाएंगी।
