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नदाव लपिड अपने देश में भी उठा चुके हैं ये कदम,अब कश्मीर फाइल्स को बनाया निशाना, ऐसा है करियर

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 29, 2022, 04:29 PM IST

Who is Nadav Lapid : नदाव लपिड उन 250 इजरायली फिल्म निर्माताओं के एक समूह में भी शामिल थे, जिन्होंने शोमरोन (सामरिया/वेस्ट बैंक) फिल्म फंड के लॉन्च के विरोध में एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उनका और सहयोगियों के मानना था कि यह फंड फिलिस्तिनियों के शोषण के लिए बनाया गया है।

KEY HIGHLIGHTS
  • नदाव लपिड की 'पुलिसमैन' पहली फीचर फिल्म थी।
  • भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने भी लपिड के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है।
  • द कश्मीर फाइल्स फिल्म पर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद भारत में लपिड का कड़ा विरोध हो रहा है।

The Kashmir Files Controversy:गोवा में 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह (आईएफएफआई) में ज्यूरी चेयरमैन इजरायल के फिल्म मेकर नदाव लपिड के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। नदाव लपिड ने भारतीय फिल्म 'कश्मीर फ़ाइल्स' को 'प्रोपेगेंडा और भद्दा' कहा है। उन्होंने यह बयान सोमवार को 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के समापन समारोह मे दिया। लपिड ने कहा कि हमने डेब्यू कंपटीशन में सात फिल्में और इंटनेशनल कंप्टीशन में 15 फिल्में देखीं। इनमें 15वीं फ़िल्म 'कश्मीर फाइल्स' को देख हम सभी विचलित और हैरान थे। यह एक प्रोपेगैंडा और भद्दी फिल्म जैसी लगी। जो कि इस तरह के प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल के कलात्मक कंप्टीशन के योग्य नही थीं। खास बात यह है कि इस समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद थे।

नदाव लपिड इजरायली फिल्म मेकर हैं और उन्हें ज्यूरी का चेयरमैन बनाया गया था। भारत और इजरायल के मजबूत और ऐतिहासिक रिश्ते को देखते हुए लपिड के बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। उनकी सोशल मीडिया से लेकर भारत के कई फिल्म मेकर ने आलोचना की है। मामला बढ़ता देख भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने सख्त बयान दिया है। गिलोन ने कहा है कि IFFI गोवा में समारोह के ज्यूरी के तौर पर बुलाने वाले भारतीय निमंत्रण का लैपिड ने 'गलत इस्तेमाल' किया है। साथ ही जो भरोसा उन पर जताया गया था, उसका भी उन्होंने अपमान किया।

शोमरोन फिल्म फंड से विवादों में आए थे लपिड

वैरायटी डॉट कॉम के अनुसार लपिड उन 250 इजरायली फिल्म निर्माताओं के एक समूह में भी शामिल थे, जिन्होंने शोमरोन (सामरिया/वेस्ट बैंक) फिल्म फंड के लॉन्च के विरोध में एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। फिल्म निर्माताओं का मानना था कि कि फंड बनाने का सिर्फ एक लक्ष्य था कि इजरायली फिल्म निर्माताओं को "वित्तीय सहायता और पुरस्कार देकर वह कारोबर को सफेद कर सके।शोमरोन फिल्म फंड का आधिकारिक लक्ष्य वेस्ट बैंक ("यहूदिया और सामरिया") में रहने वाले यहूदियों को अनुदान देना था। साथ ही वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों द्वारा बनाई गई फिल्मों के प्रोडक्शन को अनुदान देना था। ऐसे में लपिड और उनके सहयोगियों के मानना था कि यह फंड फिलिस्तिनियों के शोषण के लिए बनाया गया है।

नदाव लपिड की फिल्मी करियर

नदाव लपिड को ज्यूरी के चेयरमैन की अहम जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद उनका इस तरह का बयान, उनके फिल्मी कैरियर और उनके बारे में जाने की उत्सुकता बढ़ाता है। इजरायल के तेल अवीव में नदाव लपिड का जन्म 1975 में हुआ था। उन्होंनेने तेल अवीव यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की है। उन्होंने यरूशलम के फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल से डिग्री ली है। लपिड की चर्चित फिल्मों में पुलिसमैन, किंडरगार्टन टीचर शामिल हैं।

'पुलिसमैन' उनकी पहली फीचर फिल्म थी। जिसे साल 2011 में लोकार्नो में ज्यूरी पुरस्कार और BAFICI में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिल चुका है । उनके दूसरी फिल्म 'द किंडरगार्टन टीचर' को 20 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। नदव फिलहाल अपनी तीसरी फिल्म 'माइक्रो रॉबर्ट' पर काम कर रहे हैं। लपिड 2015 के लोकार्नो फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन लेपर्ड जूरी के सदस्य रह चुके है। वह 2016 के कान फिल्म फेस्टिवल में इंटरनेशनल क्रिटिक्स वीक जूरी के सदस्य थे और 71 वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म में 'आधिकारिक प्रतियोगिता' जूरी के सदस्य रहे हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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