Chhawla Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने छावला रेप केस के दोषियों को रिहा कर दिया है। इन दोषियों को हाईकोर्ट से फांसी की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने तब उन्हें 'शिकारी' कहा था। पीड़िता की मां सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से निराश हैं और आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही हैं।
मिली थी फांसी
तीनों आरोपियों ने फरवरी 2012 में महिला का कथित तौर पर अपहरण, सामूहिक बलात्कार और बेरहमी से हत्या कर दी थी। पुलिस के अनुसार अपहरण के तीन दिन बाद महिला का क्षत-विक्षत शव मिला था। आरोपियों-राहुल, रवि और विनोद- को दिल्ली की एक अदालत द्वारा महिला के अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी पाए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद वो लोग हाईकोर्ट गए थे, वहां भी फांसी की सजा बरकरार रही थी, लेकिन अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को बरी करने का आदेश दिया है।
परिवार निराश
वायरल हो रहे एक वीडियो में पीड़िता की मां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोती हुईं नजर आ रहीं हैं। वो कह रही हैं- "11 साल बाद, यह फैसला है … हम हार गए हैं। मैं इस फैसले का इंतजार कर रही थी। अब, मुझे लगता है कि मेरे पास जीने का कोई कारण नहीं है। मुझे लगा कि मेरी बेटी को न्याय मिलेगा।"
क्या है मामला
पीड़ित गुड़गांव के साइबर सिटी इलाके में काम करती थी और उत्तराखंड की रहने वाली थी। फरवरी 2012 में, वह अपने ऑफिस से घर लौट रही थी और अपने घर के पास थी, जब आरोपी ने कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया था। जब वह घर नहीं लौटी तो उसके माता-पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। महिला का क्षत-विक्षत शव बाद में हरियाणा के रेवाड़ी में मिला था।
पुलिस को महिला के शरीर पर कई चोटें मिलीं थीं। आगे की जांच और शव परीक्षण से पता चला कि उस पर कार के औजारों, कांच की बोतलों और अन्य हथियारों से हमला किया गया था। रिपोर्ट में रेप की भी पुष्टि हुई थी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।
