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अजीत गुट के खिलाफ कोर्ट जाएंगे शरद पवार? तस्वीरों के इस्तेमाल और मोदी कैबिनेट के ऑफर पर क्या दिया जवाब

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 17, 2023, 07:06 AM IST

Sharad Pawar Ajit Pawar: शरद पवार ने कहा है कि जहां तक अजीत पवार के साथ उनकी मुलाकात का सवाल है तो यह एक सीक्रेट मुलाकात थी, जिसमें कोई भी राजनीतिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट से कोई ऑफर नहीं मिला है। सभी रिपोर्ट तथ्यहीन हैं।

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अजीत पवार- शरद पवार

Photo : BCCL

Sharad Pawar Ajit Pawar: एनसीपी नेता शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के बीच हुई सीक्रेट मीटिंग के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस सीक्रेट मीटिंग में शरद पवार को मोदी कैबिनेट में शामिल होने का ऑफर मिला है, बशर्ते वह विपक्षी गठबंधन INDIA से नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हो जाएं। हालांकि, शरद पवार ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया था।

अब उन्होंने इन कयासों पर जवाब दिया है। मोदी कैबिनेट से आए ऑफर के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में शरद पवार ने कहा है कि मुझे नहीं पता कि पृथ्वीराज चव्हाण ने क्या कहा है, लेकिन जहां तक अजीत पवार के साथ उनकी मुलाकात का सवाल है तो यह एक सीक्रेट मुलाकात थी, जिसमें कोई भी राजनीतिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट से कोई ऑफर नहीं मिला है। सभी रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। बता दें, कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने दावा किया गया था कि शरद पवार को मोदी कैबिनेट में शामिल होने का ऑफर दिया गया है।

अजीत गुट ने तस्वीरों का इस्तेमाल बंद नहीं किया तो जाएंगे कोर्ट

बता दें, एनसीपी प्रमुख गुरुवार को बीड में एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने उनकी तस्वीरों के इस्तेमाल पर अजीत पवार गुट को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, अगर अजीत गुट ने अपने बैनर और होर्डिंग्स से उनकी उनकी तस्वीर का इस्तेमाल बंद नहीं किया तो वह न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देश भर भी हमाला बोला। सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को मणिपुर हिंसा के बजाए 2024 में सत्ता में अपनी वापसी की अधिक चिंता है। उन्होंने कहा, मणिपुर बीते 90 दिनों से जातीय हिंसा में जल रहा है।

चुनाव आयोग ने दिया तीन सप्ताह का समय

उधर, एनसीपी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग ने शरद पवार और अजीत पवार को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का और समय दिया है। दोनों गुटों को आज यानी 17 अगस्त तक जवाब दाखिल करना था। हालांकि, शरद पवार गुट की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था। इसके बाद आयोग ने 8 सितंबर तक जवाब दाखिल करने की छूट दी है। बता दें, इस संबंध में अजीत गुट की ओर से कुछ दस्तावेज चुनाव आयोग में जमा किए गए हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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