देश

Exclusive: 'राष्ट्रीय सुरक्षा कोई फुटबॉल नहीं...' टाइम्स नाऊ से खास बातचीत में जयशंकर ने विपक्ष को जमकर लताड़ा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 2, 2023, 09:12 PM IST

S Jaishankar Exclusive Interview: टाइम्स नाऊ की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार को दिए विशेष इंटरव्यू में जयशंकर ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा एक फुटबॉल नहीं है जिसे हर तरह से राजनीति के लिए उछाला जाना चाहिए।

Image

विदेश मंत्री एस जयशंकर

Photo : Times Now Digital

S Jaishankar Exclusive Interview: लद्दाख में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों के बीच शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुलकर बात की। टाइम्स नाऊ की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार को दिए विशेष इंटरव्यू में जयशंकर ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, पूरा विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय उस पर राजनीति करता है।

विदेश मंत्री ने कहा, बीते तीन सालों में जो कुछ भी हुआ है, जब भी हमारे डिसइंगेजमेंट से कोई नतीजा निकला है, हम संसद में गए हैं और एक बयान दिया है। उन्होंने कहा, जब सीमा पर हमारे सैनिकों की तैनाती है तब कोई भी सरकार सेना की तैनाती का ब्योरा नहीं दे सकती, जब तक आप दूसरे पक्ष की मदद नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि हममें से कोई भी ऐसा नहीं करना चाहेगा।

1986-87 के सैन्य गतिरोध को जयशंकर ने किया याद

इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग और तिब्बत के कोना काउंटी की सीमा से लगी सुमदोरोंग चू घाटी में भारत और चीनी सशस्त्र बलों के बीच 1986-87 के सैन्य गतिरोध को याद किया। उन्होंने कहा, इस मुद्दे पर बातचीत करने में हमें नौ साल लग गए थे। आखिरकार हमें 1995 में एक निर्णय पर पहुंचे। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि आप आज भी इसकी सराहना करें। भारत-चीन के बीच क्या बातचीत हुई, क्या नतीजा निकला, किसकी सेना पीछे हटी, यह सार्वजनिक नहीं है।

राष्ट्रीय सुरक्षा एक फुटबॉल नहीं

जयशंकर ने कहा, उस समय लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लेते थे, उसका सम्मान करते थे और राजनीति नहीं करते थे। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं या नहीं। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा एक फुटबॉल नहीं है जिसे हर तरह से राजनीति के लिए उछाला जाना चाहिए। जयशंकर ने आगे कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता से लेता है, तो उसे जिम्मेदार लोकतंत्र के हिस्से के रूप में सरकार के रुख को स्वीकार करना चाहिए।

राहुल गांधी पर किया करारा हमला

इस दौरान जयशंकर ने राहुल गांधी के हालिया बयान पर भी करारा हमला किया। जिसमें कांग्रेस सांसद ने कहा था लद्दाख में चीनियों ने भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। जयशंकर ने कहा, भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के दौरान वह भूमि खोई थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या हमने 1950 और 1960 के दशक में 38,000 वर्ग किमी ज़मीन नहीं खोई थी? अब जब राहुल गांधी ओलंपिक 2008 में बीजिंग गए, तो उन्हें उस जमीन की चिंता नहीं थी जो हमने खो दी थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article