S Jaishankar Exclusive Interview: लद्दाख में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों के बीच शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुलकर बात की। टाइम्स नाऊ की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार को दिए विशेष इंटरव्यू में जयशंकर ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, पूरा विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय उस पर राजनीति करता है।
विदेश मंत्री ने कहा, बीते तीन सालों में जो कुछ भी हुआ है, जब भी हमारे डिसइंगेजमेंट से कोई नतीजा निकला है, हम संसद में गए हैं और एक बयान दिया है। उन्होंने कहा, जब सीमा पर हमारे सैनिकों की तैनाती है तब कोई भी सरकार सेना की तैनाती का ब्योरा नहीं दे सकती, जब तक आप दूसरे पक्ष की मदद नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि हममें से कोई भी ऐसा नहीं करना चाहेगा।
1986-87 के सैन्य गतिरोध को जयशंकर ने किया याद
इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग और तिब्बत के कोना काउंटी की सीमा से लगी सुमदोरोंग चू घाटी में भारत और चीनी सशस्त्र बलों के बीच 1986-87 के सैन्य गतिरोध को याद किया। उन्होंने कहा, इस मुद्दे पर बातचीत करने में हमें नौ साल लग गए थे। आखिरकार हमें 1995 में एक निर्णय पर पहुंचे। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि आप आज भी इसकी सराहना करें। भारत-चीन के बीच क्या बातचीत हुई, क्या नतीजा निकला, किसकी सेना पीछे हटी, यह सार्वजनिक नहीं है।
राष्ट्रीय सुरक्षा एक फुटबॉल नहीं
जयशंकर ने कहा, उस समय लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लेते थे, उसका सम्मान करते थे और राजनीति नहीं करते थे। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं या नहीं। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा एक फुटबॉल नहीं है जिसे हर तरह से राजनीति के लिए उछाला जाना चाहिए। जयशंकर ने आगे कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता से लेता है, तो उसे जिम्मेदार लोकतंत्र के हिस्से के रूप में सरकार के रुख को स्वीकार करना चाहिए।
राहुल गांधी पर किया करारा हमला
इस दौरान जयशंकर ने राहुल गांधी के हालिया बयान पर भी करारा हमला किया। जिसमें कांग्रेस सांसद ने कहा था लद्दाख में चीनियों ने भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। जयशंकर ने कहा, भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के दौरान वह भूमि खोई थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या हमने 1950 और 1960 के दशक में 38,000 वर्ग किमी ज़मीन नहीं खोई थी? अब जब राहुल गांधी ओलंपिक 2008 में बीजिंग गए, तो उन्हें उस जमीन की चिंता नहीं थी जो हमने खो दी थी।
