Punjab Rail Roko Andolan: बाढ़ से हुए नुकसान के लिए वित्तीय पैकेज और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और व्यापक कर्ज माफी की मांग को लेकर पंजाब में गुरुवार से किसानों ने तीन दिवसीय ‘रेल रोको’ आंदोलन जारी है। किसान 13 स्थानों पर रेल की पटरी पर बैठे हैं। इसकी वजह से करीब 100 ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक फिरोजपुर मंडल के तहत 91 ट्रेनों में से 51 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया, 24 ट्रेनों को गंतव्य से पहले टर्मिनेट किया गया। 5 ट्रेनों को प्रस्थान स्टेशन से आगे से चलाया गया जबकि 11 ट्रेनों के रूट बदले गए।
रेल रोको आंदोलन से प्रभावित ट्रेनें
- रद्द ट्रेनें-51
- शॉर्ट टर्मिनेटेड ट्रेनें-24
- छोटी ओरिजिनेटेड ट्रेनें-05
- परिवर्तित ट्रेनें- 11
इन रेलवे ट्रैक पर किसान कर रहे हैं प्रदर्शन
किसान लेवल क्रॉसिंग गेट सी-5 (मानवाला-जंडियाला स्टेशनों के बीच), जालंधर कैंट यार्ड, फिरोजपुर कैंट यार्ड, गोलेहवाला यार्ड, फाजिल्का यार्ड, मल्लांवाला खास यार्ड, तलवंडी यार्ड (लेवल क्रॉसिंग एस-62), मोगा यार्ड, अजीतवाल यार्ड (लेवल क्रॉसिंग एस-42), गुरदासपुर यार्ड, होशियारपुर यार्ड तरनतारन यार्ड और मजीठा यार्ड पर पैठें हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 30 सितंबर तक अपना आंदोलन चलाएंगे। सूत्रों के मुताबिक किसानों मोगा, होशियारपुर, गुरदासपुर, जालंधर, तरन तारन, संगरूर, पटियाला, फिरोजपुर, बठिंडा और अमृतसर में 17 जगहों पर आंदलोन कर रहे हैं। अमृतसर में किसान देवीदास पुरा में अमृतसर-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर बैठ हुए हैं।
ये हैं किसानों की मांगें
किसानों की मांग में उत्तर भारत में बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए वित्तीय पैकेज, सभी फसलों पर एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और कर्ज माफी सहित अन्य मांगें शामिल हैं। अमृतसर में किसान नेता गुरबचन सिंह ने कहा कि किसान, उत्तर भारतीय राज्यों के लिए 50 हजार करोड़ रुपए के बाढ़ राहत पैकेज और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों के मुताबिक एमएसपी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों व मजदूरों का पूरा कर्ज माफ होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने अब समाप्त किये जा चुके तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जिन किसानों की मौत हुई उनमें से प्रत्येक के परिवार को 10 लाख रुपये और एक सरकारी नौकरी की मांग भी की।
ये किसान संगठन कर रहे हैं प्रदर्शन
इस प्रदर्शन में किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारती किसान यूनियन (भाकियू-क्रांतिकारी), भाकियू (एकता आजाद), आजाद किसान समिति दोआबा, भाकियू (बेहरामके), भाकियू (शहीद भगत सिंह) और भाकियू (छोटू राम) सहित कई किसान संगठन हिस्सा ले रहे हैं।
