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वोट देना है तो दो, देसी-विदेशी नहीं मिलेगी...लोकसभा चुनाव से पहले बोले गडकरी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 30, 2023, 11:34 AM IST

Nitin Gadkari: केंद्रीय मंत्री गडकरी शुक्रवार को महाराष्ट्र के वाशिम जिले में सीमेंट कांक्रीट से बनी सड़का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके इलाके में किसी प्रकार का बैनर-पोस्टर नहीं लगेगा और न ही वोटर्स को वह किसी प्रकार का माल-पानी देंगे। उन्होंने कहा, मैं ईमानदारी से काम करूंगा और आप सभी की सेवा करूंगा, बस इतना विश्वास करिए।

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नितिन गडकरी

Photo : BCCL

Nitin Gadkari: लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार वोटर्स को लुभाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं करने वाले हैं। गडकरी ने कहा है कि वह सिर्फ लोगों की ईमानदारी से सेवा करेंगे और ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा की तर्ज पर काम करेंगे। इसके अलावा वे अपने इलाके में किसी प्रकार का बैनर व पोस्टर भी नहीं लगाएंगे।

दरअसल, केंद्रीय मंत्री गडकरी शुक्रवार को महाराष्ट्र के वाशिम जिले में सीमेंट कांक्रीट से बनी सड़का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा चुनाव में अपने प्रचार का एजेंडा साफ कर दिया। गडकरी ने कहा, वे वोटरों को लुभाने के लिए उनके चाय-पानी का इंतजाम नहीं करेंगे। वोट देना है तो...नहीं तो वोट मत देना।

लक्ष्मी के दर्शन होंगे न देसी-विदेशी मिलेगी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान उनके इलाके में किसी प्रकार का बैनर-पोस्टर नहीं लगेगा और न ही वोटर्स को वह किसी प्रकार का माल-पानी देंगे। इतना ही नहीं गडकरी ने कहा कि लक्ष्मी के दर्शन भी नहीं होंगे और देसी-विदेशी भी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, मैं ईमानदारी से काम करूंगा और आप सभी की सेवा करूंगा, बस इतना विश्वास करिए।

कांग्रेस के गढ़ में हासिल की थी जीत

नागपुर से सांसद और कद्दावर भाजपा नेता नितिन गडकरी मोदी कैबिनेट में बेहतरीन परफॉर्मेंस वाले नेता हैं। पक्ष और विपक्ष के नेताओं में भी गडकरी का सम्मान है। नितिन गडकरी लगातार दो बाद से नागपुर सीट से चुनाव जीत रहे हैं, उन्होंने 2014 और फिर 2019 में इस सीट पर जीत हासिल की थी। खास बात यह है कि नागपुर सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, हालांकि भाजपा ने यहां नितिन गडकरी को उतारा और उन्होंने सालों पुराने मिथक को तोड़ते हुए इस सीट पर जीत हासिल की है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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