हिमाचल चुनाव में इस बार भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की भरमार है। छोटी पार्टियों से लेकर बड़ी पार्टियों तक ने इसमें कोई कंजूसी नहीं की है। इस बार के चुनाव में 23 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। कई पर तो हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
हिमाचल प्रदेश इलेक्शन वॉच एंड एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 94 उम्मीदवार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। सभी 412 उम्मीदवारों में 201 उम्मीदवार राष्ट्रीय दलों के हैं, 67 क्षेत्रीय दलों के हैं, 45 गैर-मान्यता प्राप्त दलों से हैं और 99 निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
पिछली बार से ज्यादा दागी
412 उम्मीदवारों में से 94 (23%) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। मतलब राज्य में हर चौथा उम्मीदवार दागी है। 2017 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में, 338 उम्मीदवारों में से 61 (18%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। गंभीर आपराधिक मामलों वाले 50 उम्मीदवार हैं। 2017 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में, 31 (9%) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे।
किस पार्टी के कितने दागी
प्रमुख दलों में, माकपा के 11 उम्मीदवारों में से 5 (46%), कांग्रेस के 68 उम्मीदवारों में से 17 (25%), भाजपा के 68 उम्मीदवारों में से 6 (9%), आप के 67 उम्मीदवारों में से 6 (9%) और बहुजन समाज पार्टी के 53 उम्मीदवारों में से 1 (2%) उम्मीदवार दागी हैं।
इन पर गंभीर मामले
पांच उम्मीदवारों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित मामले घोषित किए हैं, जबकि दो उम्मीदवारों ने हत्या से संबंधित मामले (आईपीसी धारा-302) घोषित किए हैं। तीन उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास का आरोप है।
क्या कहती हैं पार्टियां
सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवारों वाली पार्टी सीपीआई(एम) का दावा है कि उसके नेताओं को निशाना बनाया गया है। मामले झूठे हैं। वहीं बीजेपी का कहना है कि उसके उम्मीदवारों के खिलाफ कोई गंभीर आरोप नहीं हैं।
