देश

Census 2027: जाति जनगणना पर कांग्रेस बनाम सरकार! खरगे-राहुल ने प्रश्नावली रद्द करने की मांग की

Census 2027: कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष खरगे और राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जनगणना प्रश्नावली में जातियों की पहचान के लिए 'ड्रॉप-डाउन' विकल्प की मांग की, ताकि जातियों की सही गिनती हो सके।

Image

मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने लिखा पीएम मोदी को खत (फोटो- PTI & Congress)

Census 2027: कांग्रेस (Congress) ने जनगणना में जातियों की सही गिनती को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) को पत्र लिखकर मौजूदा जनगणना प्रश्नावली को रद्द करने की मांग की है। दोनों नेताओं ने जातियों की पहचान के लिए ‘ओपन-एंडेड’ तरीके के बजाय पहले से तैयार सूची यानी ‘ड्रॉप-डाउन’ विकल्प अपनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि अगर एक ही जाति अलग-अलग नामों से दर्ज हुई, तो जातियों की वास्तविक संख्या का आकलन मुश्किल हो जाएगा और जाति जनगणना का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।

खरगे - राहुल के पत्र में क्या-क्या?

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं और अलग-अलग जातियों की संख्या तथा उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए अपनाए गए ’ओपन-एंडेड’ प्रश्न के तरीके पर सवाल भी उठाये। उन्होंने कहा, "इसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज कर लिया जाएगा। भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है।"

पत्र में कहा गया है, ’’ऐसे में यदि एक ही जाति के लोग जनगणना में अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे, तो एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी। देश में लाखों जातियों के नाम निकलेंगे, और जाति जनगणना से हासिल पूरा आंकड़ा ही अनुपयोगी हो जाएगा।’’

20 अगस्त को लिखा था पत्र

खरगे और गांधी ने 20 अगस्त को लिखे इस पत्र में कहा कि जब किसी समुदाय की सही संख्या दर्ज नहीं होगी तो उसकी स्थिति का आकलन भी गलत होगा। इससे पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों को नुकसान होगा तथा शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले भी प्रभावित होंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरीके से यह पता नहीं चलेगा कि भारत में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी कितनी है, क्योंकि जनगणना में ’’पिछड़ा वर्ग’’ शब्द तक शामिल नहीं है।

’ड्रॉप-डाउन’ सूची बनाने का सुझाव

कांग्रेस नेताओं ने इसके समाधान के तौर पर जातियों की पहले से तैयार ’ड्रॉप-डाउन’ सूची बनाने का सुझाव दिया। ड्रॉप-डाउन सूची के तहत जनगणना फॉर्म या ऐप में जातियों के आधिकारिक नाम पहले से लिखे होते हैं और गणनाकर्ता को उसमें से सही जाति चुननी होती है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में भी यही तरीका अपनाया जाता है। पत्र के मुताबिक, यह सूची मौजूदा सरकारी सूचियों, जैसे सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग की सूची और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की जा सकती है।

तेलंगाना और बिहार का उदाहरण

उन्होंने कहा कि तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह का तरीका अपनाया गया था। कांग्रेस नेताओं ने अपने पत्र के साथ दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों की जाति सूचियां पत्र के साथ संलग्न कीं । खरगे और गांधी ने स्पष्ट किया कि ’’इस तरीके से की जा रही जाति जनगणना को हम स्वीकार नहीं करते।’’

उन्होंने सरकार से मौजूदा प्रश्नावली रद्द करने और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ऐसी प्रश्नावली तैयार करने की मांग की, जिससे देश में जातियों और समुदायों की संख्या का सही आंकड़ा सामने आ सके।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

और पढ़ें
End of Article