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लकड़ी की आंच पर पकता है ओडिशा का ये मशहूर रसगुल्ला, महंगाई की मार ने 'फीका' किया स्वाद

रसगुल्ले की मिठास पर महंगाई भारी पड़ती नजर आ रही है। ओडिशा के मिठाई कारोबारियों का कहना है कि चीनी और अच्छी गुणवत्ता वाले छेने की कीमत बढ़ने के साथ-साथ दूसरे कच्चे माल की लागत भी लगातार बढ़ रही है।

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ओडिशा के मशहूर रसगुल्ले पर महंगाई की मार

KEY HIGHLIGHTS
  • जगन्नाथ महाप्रभु के प्रिय भोग पर महंगाई का असर!
  • देश के पहले रसगुल्ला मार्केट पर महंगाई की मार
  • रक्षाबंधन से पहले रसगुल्ला महंगा, कारोबारियों की बढ़ी चिंता

रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ महाप्रभु को भोग में चढ़ाए जाने वाले ओडिशा के प्रसिद्ध रसगुल्ले पर अब महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। चीनी से लेकर छेना, इलायची और लकड़ी तक की बढ़ती कीमतों ने मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है। ओडिशा का रसगुल्ला देशभर में अपनी खास पहचान रखता है। खास तौर पर भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा के दौरान इस पारंपरिक मिठाई का विशेष महत्व माना जाता है।

रसगुल्ले की मिठास पर महंगाई भारी

लेकिन इस बार रसगुल्ले की मिठास पर महंगाई भारी पड़ती नजर आ रही है। मिठाई कारोबारियों का कहना है कि चीनी और अच्छी गुणवत्ता वाले छेने की कीमत बढ़ने के साथ-साथ दूसरे कच्चे माल की लागत भी लगातार बढ़ रही है। दुकानदारों के मुताबिक, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का पाहाल इलाका रसगुल्ले के लिए देशभर में मशहूर है। इसे रसगुल्लों का बड़ा मार्केट माना जाता है, जहां 120 से ज्यादा मिठाई की दुकानें हैं। यहां रोजाना बड़ी मात्रा में रसगुल्लों की बिक्री होती है। मिलावटी छेना और पनीर के खिलाफ चल रही कार्रवाई का असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। कार्रवाई के चलते अच्छी गुणवत्ता वाले छेने की उपलब्धता प्रभावित हुई है और कारोबारियों को जरूरत के मुताबिक कच्चा माल जुटाने में परेशानी हो रही है।

इलायची और जलावन की लकड़ी की कीमतें बढ़ीं

रसगुल्ला बनाने में इस्तेमाल होने वाली इलायची और जलावन की लकड़ी की कीमतों में भी करीब 40 फीसदी तक बढ़ोतरी का दावा कारोबारियों ने किया है। खास बात यह है कि ओडिशा का यह पारंपरिक रसगुल्ला गैस पर नहीं, बल्कि कई जगहों पर लकड़ी की आंच पर तैयार किया जाता है, जिससे ईंधन की कीमत बढ़ने का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ता है।

कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा

मिठाई कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ने के बावजूद वे ग्राहकों पर तुरंत पूरा बोझ नहीं डाल पा रहे हैं। ऐसे में कई दुकानदारों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है और नुकसान उठाने की स्थिति बन रही है। इसका असर ओडिशा के प्रमुख मिठाई कारोबार केंद्रों में भी देखने को मिल रहा है। कटक के सालिपुर से लेकर भुवनेश्वर के पाहाल तक मिठाई कारोबारी बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहे हैं।

रसगुल्ले समेत दूसरी मिठाइयों की कीमत बढ़ना लगभग तय

कारोबारियों का कहना है कि अगर चीनी, छेना, लकड़ी और दूसरे जरूरी कच्चे माल की कीमतें कम नहीं हुईं या बाजार में सप्लाई बेहतर नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में रसगुल्ले समेत दूसरी मिठाइयों की कीमत बढ़ना लगभग तय है। एक तरफ रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु के भोग में शामिल होने वाले इस खास रसगुल्ले की मांग बढ़ती है, तो दूसरी तरफ बढ़ती उत्पादन लागत ने मिठाई कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सवाल यही है—महंगाई की यह मार रसगुल्ले की कीमत पर कितनी पड़ती है और क्या ग्राहकों को आने वाले दिनों में अपनी पसंदीदा मिठाई के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी?

Satish Kumar Dash
Satish Kumar Dashauthor

Satish Kumar Dash is a reporter from Odisha with 5 years of journalism experience, including 2.5 years at Times Now Navbharat.

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