इसरो ने इसके साथ ही बताया कि सभी नियोजित रोवर गतिविधियों का सत्यापन कर लिया गया है। रोवर लगभग आठ मीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय कर चुका है। रोवर के पेलोड LIBS और APXS चालू हैं, जबकि प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और रोवर पर सभी पेलोड नॉमिनली (नाममात्र) परफॉर्म कर रहे हैं।
इसरो ने इससे कुछ देर पहले माइक्रो ब्लॉगिंग मंच "X" पर जानकारी दी थी कि दो खंडों वाले रैंप की मदद से रोवर का रोल-डाउन (वह विक्रम से बाहर निकलकर नीचे आया) हुआ। एक सोलर पैनल ने रोवर को बिजली पैदा करने में सक्षम बनाया हुआ है।
लैंडर विक्रम से निकला रोवर प्रज्ञान एक किस्म का रोबोटिक व्हीकल है, जिसमें छह पहिए हैं। इसमें एक कैमरा भी लगा है, जो कि चांद के दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरें जुटाएगा और उस पर इसरो का लोगो और तिरंगे का प्रतीक चिह्न भी बना हुआ है। अपना रोवर इलाके का सर्वे करने और फोटो को पृथ्वी पर भेजने के लिए अपने नैविगेशन कैमरों का यूज करेगा। फिर इसरो उसे निर्देश भेजेगा। रोवर लैंडर से 500 मीटर (1640 फुट) की दूरी तक यात्रा तय कर सकता है।
हालांकि, चांद पर इंडिया के इस रोबोटिक व्हीकल के अलावा एक और रोवर पहले से मौजूद है। यह रोवर चीन का है, जिसका नाम- यूटू-2 (yutu-2) है। वह वहां पर साल 2019 से काम कर रहा है। वैसे, चीन का यह मिशन चांद के दूजी ओर पहुंचा था, जिसको हम अपनी पृथ्वी से नहीं देख पाते हैं। यूटू-2 फिलहाल चांद की सतह पर ही है और रात में वह बंद हो जाता है।
