साक्ष्य मिटाने के लिए मनीष सिसोदिया समेत दूसरे आरोपियों ने 140 फोन बदले, ED का बड़ा दावा

दिल्ली की नई एक्साइज पॉलिसी के संबंध में ईडी ने कहा कि साक्ष्यों को मिटाने के लिए 140 फोन बदल दिए गए। बता दें कि इस मामले में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को आरोपी बनाया गया है।

ललित राय

Updated Nov 11, 2022 | 08:43 AM IST

manish sisodia aap

मनीष सिसोदिया, दिल्ली के डिप्टी सीएम

दिल्ली की नई एक्साइज पॉलिसी वैसे तो अब अस्तित्व में नहीं है। लेकिन राजनीतिक तौर पर यह मसला संवेदनशील हो चुका है। बीजेपी एक तरफ जहां हर रोज आम आदमी पार्टी की सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर आरोप लगा रही है तो दूसरी तरफ आप भी बीजेपी पर एक से बढ़कर एक आरोप लगा रही है। इन सबके बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा दावा किया है कि डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने के लिए करीब 140 फोन बदले। ईडी ने दावा किया कि उसने जांच में पाया कि आबकारी घोटाले में शामिल या संदिग्ध 34 महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने संबंधित अवधि के दौरान डिजिटल साक्ष्य को नष्ट करने के इरादे से कुल 140 फोन (लगभग 1.20 करोड़ रुपये मूल्य) को कथित तौर पर बदल दिया।

साक्ष्य मिटाने के लिए बदले गए सिम और फोन

इन वीआईपी में सभी मुख्य आरोपी, शराब कारोबारी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, दिल्ली आबकारी मंत्री और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। ईडी का कहना है कि जब जांच की प्रक्रिया शुरू हुई उसके बाद समय बताता है कि घोटाले के सामने आने के बाद इन फोनों में ज्यादातर बदलाव किए गए थे।फोन कथित रूप से नष्ट किए जाने पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आबकारी प्रभार संभाला। एजेंसी ने गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों, फ्रांसीसी वाइन कंपनी पर्नोड रिकार्ड के दिल्ली क्षेत्रीय प्रमुख बेनॉय बाबू और अरबिंदो फार्मा लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक पी सरथ चंद्र रेड्डी की रिमांड की मांग की थी।

'नई एक्साइज पॉलिसी में रिश्वत का खेल'

ईडी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार या आबकारी विभाग ने आरोपी व्यक्तियों के प्रभाव में कार्टेल के गठन और संचालन की अनुमति दी, भले ही अधिकांश लाइसेंस धारकों द्वारा कार्टेलाइजेशन को इंगित करने के लिए सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध थी।एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान उसने कई लोगों से पूछताछ की। यह खुलासा किया है कि दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में संचालित करने के लिए चुनिंदा व्यापारिक समूहों को अनुचित लाभ के लिए 100 करोड़ रुपये अग्रिम में दिए गए थे। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में खुदरा दुकानें खोलने के लिए दिल्ली आबकारी अधिकारियों द्वारा रिश्वत और रिश्वत की मांग की गई और ली गई।
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