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World Vitiligo Day: सफेद दाग की बीमारी 'विटिलिगो' और स्किन कैंसर में क्या अंतर है, डॉक्टर से जानिए दोनों में फर्क

World Vitiligo Day: आपने अक्सर देखा होगा कि त्वचा पर सफेद दाग (विटिलिगो) और त्वचा के कैंसर को कई बार एक ही समझते हैं। लेकिन वास्तव में दोनों ही स्थितियां अलग हैं। आइए डॉक्टर से जानते हैं इनमें फर्क।

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विटिलिगो और स्किन कैंसर में क्या फर्क है?

World Vitiligo Day: शरीर पर अचानक सफेद दाग दिख जाए तो अक्सर लोग घबरा जाते हैं। कई लोगों को लगता है कि कहीं यह स्किन कैंसर तो नहीं, जबकि कुछ लोग इसे कुष्ठ रोग (कोढ़) समझ लेते हैं। यही गलतफहमियां सफेद दाग से जूझ रहे लोगों की परेशानी और बढ़ा देती हैं। विश्व विटिलिगो दिवस के मौके पर अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट और प्रोफेसर (डर्मेटोलॉजी) डॉ. राजेश वर्मा बताते हैं कि विटिलिगो न तो कैंसर है और न ही कुष्ठ रोग। यह एक अलग त्वचा संबंधी समस्या है, जिसे सही जानकारी और समय पर इलाज से बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं..

क्या होता है विटिलिगो

विटिलिगो को आम भाषा में सफेद दाग की बीमारी कहा जाता है। इसमें त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं ठीक से काम करना बंद कर देती हैं, जिससे शरीर पर सफेद पैच दिखाई देने लगते हैं। ये दाग छोटे भी हो सकते हैं और समय के साथ बड़े भी हो सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि यह बीमारी किसी से किसी को नहीं फैलती।

कुष्ठ रोग से बिल्कुल अलग है सफेद दाग

डॉ. राजेश वर्मा के अनुसार, आज भी कई लोग विटिलिगो को कुष्ठ रोग समझ लेते हैं, जबकि दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। कुष्ठ रोग एक संक्रमण है, जिसमें त्वचा के साथ नसें भी प्रभावित हो सकती हैं। इसके कारण शरीर के कुछ हिस्सों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है। वहीं विटिलिगो में केवल त्वचा का रंग बदलता है। इसमें दर्द, सुन्नपन या नसों को नुकसान जैसी समस्या नहीं होती।

स्किन कैंसर और विटिलिगो में क्या फर्क है - Vitiligo vs skin cancer

स्किन कैंसर में त्वचा की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। इसमें कोई तिल बदल सकता है, घाव लंबे समय तक ठीक नहीं होता या त्वचा पर असामान्य गांठ बन सकती है। लेकिन विटिलिगो में सिर्फ त्वचा का रंग कम होता है। सफेद दाग दिखाई देते हैं, लेकिन त्वचा में कैंसर जैसी बढ़ोतरी नहीं होती।

बीमारी से ज्यादा दर्द देती हैं गलत धारणाएं

विटिलिगो से पीड़ित लोगों को अक्सर लोगों की बातें और गलत धारणाएं ज्यादा परेशान करती हैं। कई बार उन्हें समाज में अजीब नजरों से देखा जाता है। डॉ. वर्मा कहते हैं कि बीमारी से ज्यादा जरूरी लोगों की सोच बदलना है। जब तक जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक इससे जुड़े डर और भेदभाव खत्म नहीं होंगे।

समय पर जांच और इलाज है जरूरी

आज विटिलिगो के लिए कई तरह के इलाज उपलब्ध हैं, जिनसे कई मरीजों में त्वचा का रंग काफी हद तक वापस लाया जा सकता है। इसलिए अगर शरीर पर सफेद दाग दिखाई दें तो खुद से कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। सही जांच ही यह बता सकती है कि समस्या क्या है और उसका सही इलाज क्या होगा।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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