UP Assembly By Election 2024 : उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 9 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ( सपा) के बीच सींट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। समाजवादी पार्टी ने सात सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं और वह दो सीटें गाजियाबाद और खैर देने की पेशकश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है। वह अपने लिए कम से कम पांच सीटें चाहती है। खास बात यह है कि सपा ने उन दो सीटों पर भी उम्मीदवार उतारे हैं जिन पर कांग्रेस अपना दावा कर रही थी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सपा यदि सीटें नहीं देती है तो कांग्रेस उपचुनाव से किनारा भी कर सकती है। जाहिर है कि इससे दोनों दलों के रिश्तों में खटास आएगी।
9 सीटों पर 13 नवंबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश में नौ सीटों के लिए उपचुनाव 13 नवंबर को होने हैं। ये नौ सीटें हैं करहल (मैनपुरी), मीरापुर (मुजफ्फरनगर), कटेहरी (अंबेडकर नगर), गाजियाबाद, सिसामऊ (कानपुर), मझावन (मिर्जापुर), फूलपुर (प्रयागराज), खैर (अलीगढ़) और कुंदरकी (मुरादाबाद)। ये सीटें लोकसभा चुनाव 2024 में विधायकों के सांसद बनने के बाद खाली हुई हैं। इन सीटों के चुनाव नतीजे 23 नवंबर को घोषित होंगे। मिल्कीपुर में अभी उपचुनाव नहीं हो रहा है। भाजपा ने आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं और एक सीट उसने आरएलडी को दी है।
सपा-कांग्रेस में चल रही बातचीत
हालांकि, सीट बंटवारे का हल निकालने के लिए कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे, पार्टी अध्यक्ष अजय राय समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं। लोकसभा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राय ने कुछ दिनों पहले कहा, 'हम गठबंधन में उपचुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस और सपा दोनों का उद्देश्य भाजपा को हराना है।' उन्होंने कहा कि 10 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव अपने नेतृत्व को दिया है। राय ने कहा, 'हमने पांच विधानसभा सीटों- मझवां (मिर्जापुर), फूलपुर (इलाहाबाद), गाजियाबाद, खैर (अलीगढ़) और मीरापुर (मुजफ्फरनगर) पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव अपने नेतृत्व को दिया है। ये वे सीटें हैं, जहां भाजपा के उम्मीदवार जीते थे।'
लोकसभा चुनाव में यूपी में सपा को मिलीं सबसे ज्यादा सीटें
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ, कटेहरी, करहल, मिल्कीपुर और कुंदरकी पर पहले सपा का कब्जा था, जबकि पिछले चुनाव में भाजपा ने फूलपुर, गाजियाबाद, मझवां और खैर में जीत दर्ज की थी। मीरापुर सीट पर राष्ट्रीय लोकदल का कब्जा था। सपा को लगता है कि उप चुनाव में जीती हुई सीटों पर वह अपना प्रदर्शन दोहरा सकती है। जबकि लोकसभा चुनाव में यूपी में मिली सफलता के बाद कांग्रेस अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है। पिछला लोकसभा चुनाव सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर लड़ा था। इस चुनाव में इंडिया अलायंस को 43 सीटें और एनडीए को 36 सीटें मिलीं। एक सीट अन्य के खाते में गई। यूपी में कांग्रेस को छह सीटों पर जीत मिली। जबकि सपा 37 सीटों पर जीत दर्ज की। यह यूपी में सपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत थी।
फूलपुर व मझवां सीट मांग रही कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी खैर व गाजियाबाद सीट को घाटे का सौदा मान रहे हैं। इन सीटों पर कांग्रेस को अपनी जीत की राह बहुत कठिन नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अपने हिस्से आई सीटों को बदलवाने के लिए भीतरखाने बातचीत चल रही है। कांग्रेस फूलपुर व मझवां सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने की मांग कर रही है। बहरहाल, सीटों के अदला-बदली पर दोनों दल एक दूसरे के संपर्क में हैं। उपचुनाव में सभी सीटें जीतने के लिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है।
