MH370 फ्लाइट...एक ऐसा नाम जिसको लेकर आज भी लोगों के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह है कहां। आठ मार्च 2014 को मलेशिया की राजधानी से विमान बोइंग 777 बीजिंग के लिए उड़ा था, लेकिन वहां ये पहुंच ही नहीं सका। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद यह फ्लाइट अचानक गायब हो गई। इस विमान में 227 यात्री और 12 मलयेशियाई क्रू सदस्य सवार थे। आखिरी संपर्क के बाद विमान ने रहस्यमयी तरीके से अपनी दिशा बदली और वह दुनिया के सबसे गहरे रहस्यों में एक बन गया। इस विमान की खोज में कभी हिंद महासागर का हिस्सा खंगाला गया, तो कभी अफ्रीका के तटों पर मिले मलबे के टुकड़ों को सुराग मानकर खोज बढ़ाई गई लेकिन MH370 फ्लाइट के सबूत आज तक नहीं मिले। अब एक बार फिर मलेशिया सरकार ने MH370 फ्लाइट की खोज शुरू करने का निर्णय लिया है। मलेशिया के परिवहन मंत्रालय ने इस खोज की तारीख भी दे दी है। उसने बताया है कि इस बार खोज अभियान में उसकी मदद अमेरिकी रोबोटिक कंपनी ओशियन इन्फिनिटी करेगी।
सबसे पहले जानें 2014 में आठ मार्च की रात को आखिर हुआ क्या था?
11 साल पहले आठ मार्च 2014 को देर रात मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से फ्लाइट एमएच 370 ने चीन के बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी इस फ्लाइट में 227 यात्री और 12 मलयेशियाई क्रू सदस्य सवार थे। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही एमएच370 रडार से बाहर हो गई। एटीसी के उसका आखिरी संपर्क वियतनाम के हवाई क्षेत्र के ऊपर से गुजरते हुए हुआ था। इसके कुछ देर बाद ही उसका ट्रांसपोंडर भी बंद हो गया और वह गायब हो गई।कब क्या हुआ यह भी जानें

आज तक नहीं चल सका मलेशिया की फ्लाइट MH 370 का पता। सांकेतिक तस्वीर, फोटो- istock
- देर रात 12:41 बजे मलेशिया एयरलाइंस का एमएच 370 विमान कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरता है। विमान में कुल 239 यात्री और क्रू मेंबर थे।
- 1:07 बजे विमान अपनी आखिरी ट्रांसमिशन एटीसी को भेजता है। इसके बाद विमान से कोई भी संपर्क नहीं हो पाता।
- 1:19 बजे क्रू से अंतिम बातचीत दर्ज होती है। 1:21 बजे विमान का ट्रांसपोंडर बंद हो जाता है।
- 2:22 बजे मलेशियाई सैन्य रडार से भी विमान का संपर्क टूट जाता है। इसके बाद विमान अपनी दिशा बदलकर उत्तरी मलेशिया और पेनांग द्वीप से होते हुए अंडमान सागर की तरफ फिर सुमात्रा और अंततः दक्षिण की ओर बढ़कर हिंद महासागर में इस विमान का सफर खत्म हो गया।
बंद हो चुका था विमान को ट्रैक करने वाला ट्रांसपॉन्डर
इसके बाद विमान की खोज का अभियान शुरू हुआ। कई महीनों फिर सालों-साल चले खोज अभियान में विमान का कोई पता नहीं चला। दावा किया जाता है कि विमान के उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही उसे ट्रैक करने वाला उसका ट्रांसपॉन्डर बंद हो चुका था, जिसके कारण एटीसी को उसकी सही आखिरी लोकेशन का अंदाजा कभी लग ही नहीं पाया। करीब चार साल तक चले खोज अभियान के बाद भी जब विमान का कोई पता नहीं चला तो मलेशियाई सरकार ने उसमें सवार सभी 239 लोगों को मृत मानते हुए जांच रोक दी थी। गौरतलब है कि एमएच 370 फ्लाइट का खोज अभियान इतिहास के सबसे महंगे खोज अभियानों में गिना जाता है।
30 दिसंबर से फिर शुरू होगी खोज
अब मलेशिया के परिवहन मंत्रालय ने 30 दिसंबर से मलेशिया एयरलाइंस की लापता फ्लाइट MH370 की खोज को औपचारिक रूप से फिर से शुरू करने का एलान किया है। मंत्रालय के अनुसार, इस मिशन में अमेरिका की रोबोटिक तकनीक वाली कंपनी ओशियन इन्फिनिटी सहयोग करेगी। यह कंपनी समुद्र की गहराइयों में तलाश करने में विशेषज्ञ मानी जाती है।
समुद्र में जहां तक अभी कोई नहीं पहुंचा वहां भी होगी खोज
ओशियन इन्फिनिटी की टीम इस बार उस समुद्री इलाके को तलाशेगी जिसे पहले तकनीकी सीमाओं के कारण पूरी तरह नहीं खंगाला जा सका था। इस ऑपरेशन के लिए उन्नत स्वायत्त अंडरवॉटर व्हीकल, डीप-सी स्कैनर और हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग तकनीक तैनात की जाएगी। मलेशियाई परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, इस बार समुद्र के तल तक स्कैन किया जाएगा, ताकि विमान के किसी भी मलबे, हिस्से या संभावित अवशेष का पता लगाया जा सके। यह अभियान लगभग 50 दिनों तक चलने की योजना है, जिसके दौरान हाई-टेक अंडरवॉटर सिस्टम लगातार काम करेंगे।

एमएच 370 की खोज के लिए फिर शुरू होगा खोज अभियान। सांकेतिक तस्वीर, फोटो - istock
'नो फाइंड, नो फी' के आधार पर खोज मिशन
सरकार ने यह भी साफ किया है कि खोज मिशन 'नो फाइंड, नो फी' के आधार पर होगा। इसका मतलब यह है कि अगर विमान या उससे संबंधित कुछ भी नहीं मिला तो कंपनी को एक भी पैसा नहीं दिया जाएगा, लेकिन अगर मिला तो कंपनी को मोटी रकम दी जाएगी।
लापता यात्रियों के परिजन 11 साल से जानकारी की आस में
फ्लाइट के साथ ही लापता होने वाले यात्रियों और क्रू मेंबर्स के परिजन 11 साल से इस आस में हैं कि कभी तो उन्हें अपनों के बारे में जानकारी मिलेगी। वे इसे लेकर लगातार मलयेशियाई सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। खोज अभियान रोकने के फैसले के खिलाफ उन्होंने कई बार विरोध प्रदर्शन किए और मांग की कि उनके प्रियजनों को ढूंढ़ने में कोई कमी न छोड़ी जाए। इसके बावजूद सरकार को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। अब जबकि एक बार फिर इसकी जांच शुरू होने जा रही है तो सवाल यह है कि क्या जांच में यह रहस्य टूटेगा कि फ्लाइट आखिरकार कहां लापता हो गई थी?
