Career Astrology Kundli Analysis : नौकरी करें या अपना कारोबार शुरू करें? यह सवाल आज के समय में लाखों युवाओं के मन में रहता है। कोई व्यक्ति अच्छी नौकरी मिलने के बाद भी संतुष्ट नहीं होता, तो किसी को बार-बार नौकरी बदलने का मन करता है। कुछ लोग बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि उनकी कुंडली स्वतंत्र कारोबार के लिए मजबूत है या फिर किसी संस्था, कंपनी अथवा सरकारी व्यवस्था में काम करना उनके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
वैदिक ज्योतिष में इस सवाल का जवाब केवल सूर्य, शनि या बुध में से किसी एक ग्रह को देखकर नहीं दिया जाता है। नौकरी और बिजनेस के लिए कुंडली के लग्न, लग्नेश, छठे भाव, सप्तम भाव, दशम भाव, एकादश भाव, इनके स्वामियों, ग्रहों के संबंध, दशा और अष्टकवर्ग को एक साथ पढ़ना पड़ता है। करियर का मूल आधार दसवां भाव है, लेकिन नौकरी और व्यापार के बीच अंतर समझने के लिए छठे और सातवें भाव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
वैदिक ज्योतिष में दसवें भाव को कर्म भाव कहा गया है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में दसवें भाव से आजीविका, कर्म, पद, प्रतिष्ठा और अधिकार जैसी चीजों के बारे में जाना जाता है। फलदीपिका में भी दसवें भाव और दशमेश के आधार पर व्यक्ति की आजीविका तथा उसके काम के स्वरूप को समझा जाता है।
कुंडली चार्ट (1)
कुंडली में कौन सा भाव तय करता है करियर
कुंडली में दसवां भाव व्यक्ति के कर्म और प्रोफेशन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह बताता है कि व्यक्ति समाज में किस तरह का काम करता है, उसकी पेशेवर पहचान किस क्षेत्र में बन सकती है और कर्म के माध्यम से उसे किस तरह की प्रतिष्ठा मिल सकती है। दसवें भाव को मजबूत बनाने वाली स्थितियां व्यक्ति के करियर में स्थिरता, पहचान और उपलब्धि की क्षमता बढ़ा सकती हैं, लेकिन यहां एक बहुत जरूरी बात समझनी होगी। दसवां भाव केवल नौकरी का भाव नहीं है। प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में कर्म, आजीविका और व्यापार तक को दसवें भाव के दायरे में रखा गया है। यही कारण है कि केवल दसवें भाव को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति नौकरी करेगा या बिजनेस होगा। नौकरी और बिजनेस के बीच फर्क जानने के लिए यह देखना पड़ता है कि दसवें भाव और दशमेश (दसवें भाव में मौजूद राशि के स्वामी) का संबंध छठे भाव से ज्यादा मजबूत है या सातवें और ग्यारहवें भाव से है।
ऊपर दी गई इमेज में हर भाव को हिंदी में लिखा गया है। आपकी कुंडली में इस भाव में कोई भी अंक लिखा हो सकता है, वो अंक राशि के नंबर होते हैं न कि भाव के नंबर हैं। वहीं, नीचे दी गई इमेज में राशियों के अंक और उनके स्वामी दिए गए हैं।
राशिचार्ट
छठवां भाव भी है महत्वपूर्ण
वैदिक ज्योतिष में छठा भाव सेवा, प्रतियोगिता, विरोधियों पर विजय, दैनिक कार्य और संघर्ष से संबंधित माना जाता है। आधुनिक संदर्भ में इसे नौकरी और सर्विस स्ट्रक्चर के साथ जोड़कर देखा जाता है। किसी व्यक्ति की कुंडली में छठे भाव और उसके स्वामी का मजबूत होना यह दिखा सकता है कि वह नियमित कार्य व्यवस्था, प्रतियोगिता और जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता रखता है।
अगर छठेश (छठवें भाव में लिखी राशि के स्वामी) का संबंध दशमेश से बन रहा हो या दशमेश छठे भाव से जुड़ा हो, साथ ही शनि मजबूत स्थिति में हो, तो नौकरी या सेवा क्षेत्र की संभावना बढ़ सकती है। यहां शनि का अर्थ केवल नौकरी नहीं है। शनि अनुशासन, श्रम, जिम्मेदारी, सिस्टम और लंबे समय तक लगातार काम करने की क्षमता का भी कारक है। ऐसी कुंडली में व्यक्ति सरकारी सेवा, कॉरपोरेट, बैंकिंग, प्रशासन, टेक्निकल सर्विस, मेडिकल सर्विस, मैनेजमेंट या किसी बड़े संस्थान में काम करके आगे बढ़ सकता है। वास्तविक क्षेत्र का निर्धारण दसवें भाव में बैठे ग्रह, दशमेश, राशि और संबंधित ग्रहों की प्रकृति से किया जाएगा।
क्या मजबूत शनि का मतलब नौकरी ही होता है
यह सबसे आम ज्योतिषीय गलतफहमियों में से एक है। मजबूत शनि को देखकर सीधे यह कहना कि व्यक्ति नौकरी ही करेगा, सही नहीं है।
शनि कर्म और मेहनत का प्राकृतिक कारक है। यदि शनि दसवें भाव, दशमेश, लग्नेश या एकादश भाव से जुड़ता है, तो व्यक्ति को लंबे समय तक अपने काम में लगे रहने की क्षमता दे सकता है। यही गुण नौकरी में भी सफलता देता है और बड़े कारोबार को लंबे समय तक चलाने में भी मदद करता है।
अगर शनि का संबंध सातवें भाव या सप्तमेश से भी बन रहा है और सातवां भाव मजबूत है, तो व्यक्ति ऐसा बिजनेस भी कर सकता है जिसमें संगठन, मैनेजमेंट, मशीनरी, इंडस्ट्री, निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर या लंबे समय की योजना की जरूरत हो। इसका मतलब साफ है कि शनि नौकरी का अकेला निर्णायक ग्रह नहीं है। शनि यह बताता है कि व्यक्ति कर्म, अनुशासन और निरंतरता को किस तरह निभाएगा।
बिजनेस के बारे में बताएगा ये भाव
नौकरी के साथ-साथ बिजनेस की संभावना जानने के लिए सातवां भाव सबसे महत्वपूर्ण भावों में से एक है। सातवां भाव दूसरे लोगों के साथ संपर्क, बाजार, पब्लिक डीलिंग, साझेदारी और व्यापारिक संबंधों से जुड़ा होता है। अगर सप्तमेश मजबूत हो, सातवें भाव पर शुभ प्रभाव हो और उसका संबंध दशमेश या एकादशेश से बने, तो व्यक्ति में व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ने की क्षमता बढ़ सकती है। अगर इसके साथ लग्न और तीसरा भाव भी मजबूत हों, तो व्यक्ति खुद निर्णय लेकर अपना काम आगे बढ़ाने में सक्षम हो सकता है। यहां एक और बात महत्वपूर्ण है। सातवां भाव मजबूत होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति हर तरह का बिजनेस सफलतापूर्वक कर लेगा। बिजनेस का क्षेत्र जानने के लिए सातवें भाव के साथ दसवें भाव, दशमेश और उसमें स्थित ग्रहों को देखना होगा।
बुध मजबूत है तो बनता है बिजनेस का योग
बुध को व्यापार, गणना, बुद्धि, कम्युनिकेशन, लेखन, सौदेबाजी और लेन-देन का महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। इसलिए व्यापारिक कुंडली में बुध की भूमिका निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होती है।मजबूत बुध व्यक्ति को ट्रेडिंग, सेल्स, अकाउंटिंग, बैंकिंग, मीडिया, लेखन, मार्केटिंग, डिजिटल काम, कंसल्टेंसी, टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ा सकता है। दसवें भाव में बुध या दशमेश से बुध का मजबूत संबंध होने पर बौद्धिक और कम्युनिकेशन आधारित प्रोफेशन की संभावना बढ़ती है। फलदीपिका की पेशे संबंधी व्याख्याओं में भी दशमेश के नवांश स्वामी के आधार पर आजीविका के अलग-अलग क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है और बुध से लेखन, गणना, विद्या आदि से जुड़े कार्यों को जोड़ा गया है। अगर बुध मजबूत है लेकिन सातवां भाव कमजोर है और छठा भाव-दशम भाव मजबूत हैं, तो व्यक्ति व्यापार से जुड़े काम की नौकरी में भी बहुत अच्छा कर सकता है।
तीसरा भाव भी बताता है आपका करियर
बिजनेस के लिए तीसरे भाव को नजरअंदाज करना बड़ी गलती हो सकती है। तीसरा भाव पराक्रम, साहस, प्रयास, सेल्फ-एफर्ट और कम्युनिकेशन से जुड़ा है। अपना कारोबार चलाने के लिए व्यक्ति को खुद निर्णय लेने पड़ते हैं। ग्राहकों से बात करनी पड़ती है, जोखिम उठाना पड़ता है, असफलताओं के बाद फिर शुरुआत करनी पड़ती है और लगातार प्रयास करते रहना पड़ता है। इसलिए तीसरा भाव और उसका स्वामी मजबूत होने पर उद्यमिता की क्षमता बढ़ सकती है।
अगर सातवां भाव अच्छा है लेकिन तीसरा भाव और लग्न बहुत कमजोर हैं, तो व्यक्ति में बिजनेस की इच्छा हो सकती है लेकिन उसे स्वतंत्र रूप से कारोबार संभालने में कठिनाई आ सकती है। ऐसे में पार्टनरशिप, कंसल्टेंसी या किसी स्थापित संस्था के साथ काम करना ज्यादा अनुकूल हो सकता है।
मेहनत का कितना मिलेगा आर्थिक लाभ
दसवां भाव कर्म दिखाता है, लेकिन उस कर्म से मिलने वाले लाभ को समझने के लिए ग्यारहवें भाव को देखना जरूरी है। ग्यारहवां भाव आय, लाभ, नेटवर्क, उपलब्धि और इच्छापूर्ति का भाव माना जाता है। अगर दसवां भाव मजबूत है लेकिन ग्यारहवां भाव कमजोर है, तो व्यक्ति बहुत मेहनत कर सकता है लेकिन उसके अनुपात में आर्थिक लाभ या नेटवर्किंग का फायदा कम मिल सकता है। दूसरी तरफ दसवें और ग्यारहवें दोनों भाव मजबूत हों तो करियर और कमाई के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है। बिजनेस के मामले में यह स्थिति और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कारोबार में केवल काम करना पर्याप्त नहीं है। ग्राहक, नेटवर्क, बिक्री, लाभ और विस्तार भी जरूरी होते हैं।
नौकरी या बिजनेस में सबसे महत्वपूर्ण है लग्न
किसी भी करियर विश्लेषण की शुरुआत लग्न और लग्नेश से करनी चाहिए। दसवां भाव यह बताता है कि व्यक्ति का कर्मक्षेत्र कैसा हो सकता है, लेकिन उस कर्म को करने वाला स्वयं व्यक्ति है। अगर लग्न और लग्नेश कमजोर हों, तो अच्छे करियर योग भी अपनी पूरी क्षमता से फलित होने में समय ले सकते हैं।
अगर लग्नेश मजबूत हो और उसका संबंध तीसरे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव से बने तो व्यक्ति में पहल, निर्णय क्षमता और अपने दम पर आगे बढ़ने की क्षमता बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में बिजनेस की संभावना तब और मजबूत होती है जब सातवां भाव और सप्तमेश भी सहयोग कर रहे हों।
दूसरी ओर लग्न मजबूत होने के साथ छठा, दसवां और शनि मजबूत हों तो व्यक्ति बड़ी संस्था में अधिकार और जिम्मेदारी वाला पद हासिल कर सकता है।
सरकारी नौकरी बताता है ये ग्रह
सूर्य को सत्ता, अधिकार, प्रशासन, सरकार और नेतृत्व का ग्रह माना जाता है। अगर सूर्य का संबंध लग्न, नवम, दसवें भाव या दशमेश से मजबूत हो तो व्यक्ति प्रशासनिक या नेतृत्व वाले कार्यों की ओर बढ़ सकता है। दसवें भाव से मजबूत सूर्य सरकारी क्षेत्र, प्रशासन, मैनेजमेंट और ऐसे पदों का संकेत दे सकता है जहां निर्णय लेने और अधिकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो। सूर्य कमजोर हो तो व्यक्ति के लिए यह जरूरी नहीं कि सरकारी क्षेत्र बंद हो जाए। पूरी कुंडली और दशा देखकर ही अंतिम निष्कर्ष निकालना चाहिए।
मंगल है जोखिम वाला ग्रह
मंगल साहस, ऊर्जा, प्रतियोगिता, तकनीकी क्षमता और जोखिम उठाने से जुड़ा ग्रह है। अगर मंगल का संबंध तीसरे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव से बन रहा हो तो व्यक्ति में अपने दम पर काम शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने की ऊर्जा हो सकती है।
मंगल की मजबूत स्थिति इंजीनियरिंग, निर्माण, रियल एस्टेट, मशीनरी, डिफेंस, पुलिस, स्पोर्ट्स, सर्जरी, तकनीकी क्षेत्र और प्रतिस्पर्धात्मक व्यवसायों की ओर संकेत कर सकती है। बिजनेस में मंगल का सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति को निर्णय लेने और तुरंत कार्रवाई करने में मदद कर सकता है, हालांकि अशुभ प्रभाव जल्दबाजी और विवाद की प्रवृत्ति भी दे सकता है।
गुरु और राहु बिजनेस में निभाते हैं भूमिका
गुरु विस्तार, ज्ञान, सलाह, वित्त, शिक्षा और संस्थागत विकास का ग्रह है। सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव से गुरु का शुभ संबंध व्यापार को विस्तार देने, अच्छे नेटवर्क बनाने और सलाहकारी भूमिका में सफलता देने वाला हो सकता है।
राहु की प्रकृति इससे अलग है। राहु परंपरा से हटकर काम करने, बड़े लक्ष्य बनाने, विदेशी कनेक्शन, डिजिटल दुनिया, टेक्नोलॉजी और अचानक विस्तार की इच्छा से जुड़ सकता है। अगर राहु सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव से जुड़ा हो और बाकी व्यापारिक योग मजबूत हों, तो ऑनलाइन बिजनेस, टेक्नोलॉजी, विदेशी कारोबार या नए जमाने के क्षेत्रों में सफलता की संभावना बन सकती है। राहु को हमेशा शुभ या अशुभ मानकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। मजबूत व्यापारिक ढांचे के साथ राहु बड़ा विस्तार दे सकता है, जबकि कमजोर कुंडली में वही राहु जल्दबाजी और गलत जोखिम की स्थिति पैदा कर सकता है।
अष्टकवर्ग से भी होता है नौकरी और बिजनेस का विश्लेषण
अष्टकवर्ग इस विषय को और गहराई देता है। सर्वाष्टकवर्ग में अलग-अलग ग्रहों से मिलने वाले बिंदुओं को जोड़कर राशियों या भावों की सामूहिक शक्ति देखी जाती है। कुल 337 शुभ बिंदुओं का औसत 12 राशियों पर लगभग 28 बिंदु आता है। इसी वजह से 28 को अष्टकवर्ग में एक महत्वपूर्ण औसत सीमा माना जाता है। फलदीपिका की अष्टकवर्ग परंपरा में 30 या उससे अधिक बिंदुओं को विशेष रूप से शुभ और 25 से 30 के बीच को मध्यम प्रभाव से जोड़ने की व्याख्या मिलती है।
करियर के मामले में सबसे पहले दसवें भाव के बिंदु देखने चाहिए। अगर दसवें भाव में 28 से अधिक बिंदु हैं तो कर्मक्षेत्र में आधारभूत शक्ति अच्छी मानी जा सकती है। 30 या उससे अधिक बिंदु होने पर उस भाव की क्षमता और मजबूत मानी जाती है। 25 से कम बिंदु होने पर उस भाव से संबंधित मामलों में अतिरिक्त संघर्ष या देरी दिखाई दे सकती है। हालांकि किसी एक अंक को अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि ग्रहों की स्थिति और दशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
अष्टकवर्ग में नौकरी के लिए क्या देखें
अगर छठे और दसवें भाव में अच्छे बिंदु (उस भाव में लिखे नंबरों का जोड़) हों, विशेषकर दोनों 28 या उससे ऊपर हों, और जन्मकुंडली में छठेश-दशमेश का संबंध भी मजबूत हो, तो नौकरी या सर्विस आधारित करियर का आधार मजबूत हो सकता है। ऐसी स्थिति में शनि की भूमिका को भी जोड़ना चाहिए। अगर शनि मजबूत है और छठे या दसवें भाव से संबंधित है, तो व्यक्ति लंबे समय तक किसी संस्था, कंपनी या सरकारी व्यवस्था में काम करके धीरे-धीरे ऊंचा पद हासिल कर सकता है।
अष्टकवर्ग में बिजनेस के लिए क्या देखें
बिजनेस के लिए सातवां, दसवां और ग्यारहवां भाव विशेष रूप से उपयोगी हैं। अगर सातवें और ग्यारहवें भाव में अच्छे बिंदु हों और साथ में लग्न तथा तीसरा भाव भी मजबूत हो, तो स्वतंत्र कारोबार की संभावना बढ़ती है। यहां केवल सातवें भाव का स्कोर नहीं देखना चाहिए। अगर सातवां भाव मजबूत है लेकिन लग्न और तीसरा भाव कमजोर हैं, तो व्यक्ति पार्टनरशिप या किसी दूसरे के स्थापित बिजनेस से जुड़े काम में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। अगर सातवां, दसवां और ग्यारहवां तीनों मजबूत हैं और सप्तमेश-दशमेश का संबंध है, तो कारोबार से प्रोफेशनल पहचान और लाभ दोनों की संभावना बढ़ सकती है।
10वें और 11वें भाव के बिंदुओं की तुलना क्यों है महत्वपूर्ण
अष्टकवर्ग की कुछ व्यावहारिक परंपराओं में दसवें और ग्यारहवें भाव के बिंदुओं की तुलना को करियर के उठान और उससे मिलने वाले लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक प्रसिद्ध अष्टकवर्ग अध्ययन पद्धति में दसवें भाव को करियर के उभार और ग्यारहवें भाव को उस उभार से मिलने वाले लाभ के स्तर से जोड़ा गया है। वहां यह भी बताया गया है कि अगर 11वें भाव में 10वें से अधिक शुभ बिंदु हों तो आर्थिक और सामाजिक उन्नति की क्षमता बढ़ सकती है।
इस नियम को नौकरी या बिजनेस का अकेला फैसला नहीं बनाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर दसवां भाव मजबूत और ग्यारहवां उससे कमजोर हो तो व्यक्ति बहुत मेहनत करके अच्छी पेशेवर पहचान बना सकता है, लेकिन आर्थिक लाभ उसी अनुपात में मिलने में समय लग सकता है। दूसरी तरफ ग्यारहवां भाव बहुत मजबूत हो तो व्यक्ति को अपने काम से अपेक्षाकृत अच्छा आर्थिक रिटर्न मिल सकता है। यही कारण है कि 10वां भाव करियर और 11वां भाव लाभ के सिद्धांत को साथ पढ़ना ज्यादा उपयोगी है।
अष्टकवर्ग में 10वां भाव हो सबसे ज्यादा मजबूत
अगर सर्वाष्टकवर्ग में दसवें भाव में कुंडली के अन्य भावों की तुलना में बहुत अधिक बिंदु हों, तो कर्मक्षेत्र जीवन का प्रमुख हिस्सा बन सकता है। कुछ अष्टकवर्ग परंपराओं में दसवें भाव के अधिकतम बिंदुओं को स्वतंत्र व्यवसाय या स्वतंत्र पेशे की प्रवृत्ति से भी जोड़ा गया है, लेकिन यहां भी लग्न और सातवें भाव की स्थिति देखना जरूरी है। अगर दसवां भाव मजबूत है और सातवां भी अच्छा है, तो व्यक्ति बिजनेस में अपना नाम बना सकता है। अगर दसवां और छठा मजबूत हैं, तो किसी संस्था में ऊंची जिम्मेदारी वाला पद भी मिल सकता है।
अष्टम भाव से क्या पता चलता है
करियर की इस विशेष स्टोरी में अष्टम भाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि अष्टम भाव को सीधे नौकरी या बिजनेस का भाव कहना सही नहीं होगा, लेकिन यह करियर में अचानक बदलाव, रिसर्च, गुप्त जानकारी, दूसरे लोगों के संसाधन, इंश्योरेंस, टैक्स, इन्वेस्टिगेशन और उतार-चढ़ाव जैसी स्थितियों को समझने में मदद करता है।
अगर अष्टमेश का संबंध दूसरे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव से बनता है तो व्यक्ति ऐसे क्षेत्रों में जा सकता है जहां रिस्क, रिसर्च या दूसरे लोगों के धन-संसाधनों की भूमिका हो। इंश्योरेंस, टैक्स, ऑडिट, रिसर्च, इन्वेस्टिगेशन, शेयर बाजार से जुड़े कुछ काम या वित्तीय संस्थानों के विशेष क्षेत्र इसका उदाहरण हो सकते हैं।
अष्टम भाव मजबूत होने का अर्थ अपने आप बिजनेस की सफलता नहीं है। अगर सातवां और ग्यारहवां भी मजबूत हों, तब यह व्यक्ति को ऐसे कारोबार की तरफ ले जा सकता है जिसमें रिस्क और परिवर्तन की भूमिका अधिक हो।
दशमेश किस भाव में है, इससे खुलेगा करियर का राज
करियर विश्लेषण में दशमेश यानी दसवें भाव के स्वामी की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। अगर दशमेश लग्न में हो तो व्यक्ति की पहचान उसके कर्म से बनने की संभावना बढ़ सकती है। यदि दशमेश मजबूत हो तो कर्म के क्षेत्र में सक्रियता और उपलब्धि की क्षमता बढ़ती है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की व्याख्याओं में दशमेश की शक्ति को कर्म की सफलता से जोड़कर देखा गया है।
अगर दशमेश छठे भाव से जुड़ता है तो नौकरी, सेवा, प्रतियोगिता और सर्विस सेक्टर का प्रभाव बढ़ सकता है। दशमेश सातवें भाव में हो या सप्तमेश से मजबूत संबंध बनाए तो व्यापार, पब्लिक डीलिंग और पार्टनरशिप का प्रभाव बढ़ सकता है। दशमेश ग्यारहवें भाव से जुड़ता है तो कर्म से लाभ की संभावना बढ़ती है। यहां ग्रह की राशि, दृष्टि, युति, बल और दशा को साथ देखना अनिवार्य है।
दशमेश सातवें भाव में हो तो क्या बिजनेस ही करना चाहिए
दशमेश का सातवें भाव में होना बिजनेस की तरफ महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है, क्योंकि कर्म का स्वामी व्यापार और पब्लिक डीलिंग वाले भाव में आ जाता है। व्यक्ति का प्रोफेशन जनता, ग्राहकों, क्लाइंट्स, बाजार या साझेदारी से जुड़ सकता है। लेकिन अगर छठा भाव बहुत मजबूत है और सातवें भाव का स्वामी कमजोर है, तो वही व्यक्ति किसी कंपनी में सेल्स, मार्केटिंग, क्लाइंट मैनेजमेंट, कंसल्टेंसी या पब्लिक रिलेशन की नौकरी कर सकता है।
दशमेश छठे भाव में हो तो नौकरी का संकेत मजबूत
दशमेश का छठे भाव से संबंध व्यक्ति के कर्म को सेवा, प्रतियोगिता, संघर्ष और नियमित कार्य व्यवस्था से जोड़ सकता है। अगर षष्ठेश भी मजबूत हो और शनि सहयोगी स्थिति में हो तो नौकरी के संकेत और मजबूत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति सरकारी नौकरी की प्रतियोगिता, कॉरपोरेट सेक्टर, प्रशासन, बैंकिंग, कानून, मेडिकल सर्विस या किसी ऐसी संस्था में काम करने के लिए अनुकूल हो सकती है जहां प्रतियोगिता और नियमित जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो। अगर यही दशमेश मजबूत होकर सातवें और ग्यारहवें भाव से भी जुड़ा हो, तो नौकरी के साथ-साथ आगे चलकर अपना काम शुरू करने की संभावना भी बन सकती है।
क्या नौकरी से बिजनेस की तरफ बदलाव भी कुंडली में दिखता है
हां, कई कुंडलियों में ऐसा मिश्रित संकेत मिल सकता है। अगर छठा भाव मजबूत हो लेकिन सातवां, तीसरा और ग्यारहवां भाव भी मजबूत हों, तो व्यक्ति पहले नौकरी से अनुभव और नेटवर्क हासिल करके बाद में अपना कारोबार शुरू कर सकता है। दशा बदलने पर करियर का माध्यम भी बदल सकता है। उदाहरण के लिए पहले शनि या छठे भाव से संबंधित दशा नौकरी को सक्रिय कर सकती है, जबकि बाद में बुध, सप्तमेश, दशमेश या एकादशेश से संबंधित दशा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ा सकती है।
दशमांश यानी D-10 से अंतिम पुष्टि
अगर किसी व्यक्ति से सिर्फ यह पूछा जाए कि नौकरी करें या बिजनेस, तो जन्मकुंडली से काफी संकेत मिल सकते हैं, लेकिन गंभीर और गहराई वाले विश्लेषण में दशमांश यानी D-10 को जरूर देखा जाता है। दशमांश करियर, प्रोफेशन, पद और सार्वजनिक उपलब्धियों के सूक्ष्म अध्ययन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वर्ग है। जन्मकुंडली का दसवां भाव करियर की बड़ी तस्वीर देता है, जबकि D-10 उस तस्वीर को और बारीकी से समझने में मदद करता है।
D-10 में लग्न, लग्नेश, दसवां भाव, दशमेश और प्रमुख ग्रहों की स्थिति को देखा जाता है। जन्मकुंडली में अगर नौकरी के संकेत हैं और D-10 भी उन्हीं संकेतों की पुष्टि करता है, तो नौकरी की दिशा मजबूत मानी जा सकती है। इसी तरह जन्मकुंडली में व्यापारिक संकेत हों और D-10 में भी सातवें, दसवें और ग्यारहवें भाव से संबंधित मजबूत योग मिलें, तो स्वतंत्र कारोबार की संभावना बढ़ती है।
नौकरी या बिजनेस? बताता है ये फॉर्मूला
किस तरह का काम आपके लिए रहेगा बेहतर
अगर दसवें भाव या दशमेश से सूर्य का मजबूत संबंध है तो प्रशासन, सरकार, मैनेजमेंट, नेतृत्व और अधिकार से जुड़े काम सामने आ सकते हैं। चंद्रमा का प्रभाव पब्लिक डीलिंग, होटल, हॉस्पिटैलिटी, खाद्य क्षेत्र, यात्रा और जनता से जुड़े कामों को बढ़ा सकता है। मंगल तकनीकी, इंजीनियरिंग, मशीनरी, निर्माण, रियल एस्टेट, पुलिस, डिफेंस और एक्शन आधारित क्षेत्रों का संकेत दे सकता है। बुध व्यापार, अकाउंटिंग, मीडिया, पत्रकारिता, लेखन, डिजिटल, आईटी, सेल्स और कम्युनिकेशन से जुड़े कामों को मजबूत कर सकता है।
गुरु शिक्षा, कानून, बैंकिंग, वित्त, सलाह, अध्यापन और ज्ञान आधारित पेशों की ओर ले जा सकता है। शुक्र फैशन, डिजाइन, कला, मनोरंजन, ब्यूटी, लग्जरी और क्रिएटिव सेक्टर से जुड़ सकता है। शनि इंडस्ट्री, मैनेजमेंट, तकनीकी काम, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासन और लंबे समय की मेहनत वाले क्षेत्रों का संकेत देता है।
राहु टेक्नोलॉजी, डिजिटल, ऑनलाइन काम, विदेशी कंपनियों, नए जमाने के बिजनेस और पारंपरिक ढांचे से अलग क्षेत्रों को सक्रिय कर सकता है। केतु रिसर्च, आध्यात्मिक क्षेत्र, जांच, टेक्निकल और पर्दे के पीछे किए जाने वाले कामों की ओर संकेत दे सकता है। यह ग्रह-करियर संबंध तभी मजबूत माना जाएगा जब संबंधित ग्रह का जन्मकुंडली के दसवें भाव, दशमेश, लग्न, छठे, सातवें या ग्यारहवें भाव से वास्तविक संबंध हो।
ऐसे लें लास्ट डिसीजन
अगर कुंडली में छठा भाव, षष्ठेश, शनि और दसवां भाव बार-बार एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं और सातवें भाव की तुलना में नौकरी वाले संकेत ज्यादा मजबूत हैं, तो व्यक्ति के लिए नौकरी या सर्विस सेक्टर ज्यादा अनुकूल हो सकता है। अगर लग्न, तीसरा, सातवां, दसवां और ग्यारहवां भाव मजबूत हैं, सप्तमेश और दशमेश का संबंध है तथा बुध, मंगल, गुरु या राहु व्यापारिक संरचना को सहयोग दे रहे हैं, तो बिजनेस की दिशा ज्यादा मजबूत हो सकती है। अगर दोनों तरफ के संकेत मजबूत हैं तो व्यक्ति को केवल एक विकल्प में बांधना उचित नहीं होगा। ऐसी कुंडली में पहले नौकरी, फिर बिजनेस, नौकरी के साथ साइड बिजनेस, पार्टनरशिप, कंसल्टेंसी या प्रोफेशन से जुड़े स्वतंत्र काम की संभावना बन सकती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
