Bhubaneswar Teachers Protest: ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित गांधी मार्ग पर इन दिनों टीचर और टीचिंग स्टाफ अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। सुबह सिर पर तपती गर्मी हो या रात में बारिश—आंदोलनकारी शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर पूरी तरह से डटे हुए हैं। टीचर्स और टीचिंद स्टाफ का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे। ओडिशा स्कूल-कॉलेज शिक्षक एवं कर्मचारी समन्वय समिति के आह्वान पर 16 अगस्त से शुरू हुआ यह आंदोलन अब छठे दिन में पहुंच गया है। दिन में शिक्षक तपती सड़क पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो रात में बारिश के बीच भी उनका धरना रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
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मांगों को लेकर जारी टीचर्स का प्रदर्शन
प्रदर्शनकारी शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की। उनका कहना है कि कई मांगों को लेकर सरकार के सामने बार-बार प्रतिनिधित्व किया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद भी हमारी मांगों को लेकर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में सभी पात्र स्कूलों के लिए अनुदान जारी करना और अनुदान प्राप्त स्कूल-कॉलेजों का सरकारी अधिग्रहण में शामिल करना भी है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना लागू करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ देने तथा सेवा शर्तों को मानकीकृत करने की मांग भी उठाई गई। वहीं, 2004 से 2013 के बीच नियुक्त अनुबंधित शिक्षकों को छह नॉशनल इंक्रीमेंट और वरिष्ठता का लाभ देने की मांग की गई है। शिक्षकों ने ग्रेड-पे की विसंगतियों को दूर करने और स्कूल-कॉलेजों में खाली पड़े पदों पर तत्काल भर्ती करने की भी मांग की गई है।
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डिमांड डे के रूप में की आंदोलन की शुरुआत
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि पेंशन और रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलने के कारण कई सेवानिवृत्त कर्मचारी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। आंदोलनकारियों ने 16 अगस्त को ‘डिमांड डे’ के रूप में मनाते हुए आंदोलन की शुरू की थी। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को लेकर पर्याप्त और ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
महिला शिक्षक और कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हैं। उनका कहना है कि सरकार नारी सम्मान की बात करती है, लेकिन अपने अधिकारों के लिए महिलाओं को भी दिन-रात सड़क पर धरना देने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब सवाल ये है कि - क्या सरकार हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों की इन लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेगी, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?
