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जनगणना 2027 के प्रश्नावली पर क्यों उठा विवाद? कुछ सवालों पर कांग्रेस को क्या है आपत्ति

जनगणना की प्रश्नावली में कुछ ऐसे नए एवं संशोधित सवाल हैं जिन्हें 2020 में अधिसूचित नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (NPR) में भी शामिल किया गया था लेकिन नागरिकता संशोधन कानून (CAA) एवं एनआरसी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान NPR भी विवादों में आ गया।

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भारत में जनगणना 2027 पर काम हो रहा है। तस्वीर-AI
Written by: Alok Rao
Updated Aug 22, 2026, 13:34 IST
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Census 2027 : देश में जनगणना का काम हो रहा है और इसके लिए लोगों से सवाल पूछे गए हैं। सरकार ने इस काम के लिए जो प्रश्नावली तैयार की है, उसमें 40 सवाल रखे गए हैं लेकिन इसके कुछ सवालों को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि लोगों और उनके माता-पिता से जुड़े विस्तृत सवालों के जरिए सरकार उनकी निगरानी कर सकती है और इनका इस्तेमाल 'बुरे मकसद' के लिए किया जा सकता है। दरअसल, जनगणना की प्रश्नावली में कुछ ऐसे नए एवं संशोधित सवाल हैं जिन्हें 2020 में अधिसूचित नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (NPR) में भी शामिल किया गया था लेकिन नागरिकता संशोधन कानून (CAA) एवं एनआरसी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान NPR भी विवादों में आ गया।

नए जनगणना के सवाल क्या हैं, NPR से क्या संबंध है?

जनसंख्या गणना की प्रश्नावली में 40 सवाल हैं। इनमें से 14 सवाल 2011 की जनगणना की तुलना में नए या संशोधित हैं। इनमें पति/पत्नी का नाम, घोषित राष्ट्रीयता, पिता और माता से जुड़ी जानकारी, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता, उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और विषय, कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े सवाल शामिल हैं। इनमें से आठ सवाल-घोषित राष्ट्रीयता, पिता और माता की जानकारी, मोबाइल नंबर, आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस-2020 में तैयार किए गए NPR (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) के फॉर्मेट में भी शामिल थे। माता-पिता से जुड़ी जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 2020 के NPR फॉर्म में व्यक्ति के पिता और माता की जन्मतिथि और जन्मस्थान, साथ ही जिला और राज्य की जानकारी मांगी गई थी। यदि उनका जन्म भारत के बाहर हुआ हो, तो संबंधित देश का नाम भी पूछा गया था। यही सवाल उस समय NPR के खिलाफ राजनीतिक विरोध के प्रमुख कारणों में शामिल थे।

यह विवादित क्यों है?

इससे जुड़ी मुख्य रूप से दो चिंताएं हैं। गोपनीयता और NPR को लेकर राजनीतिक संदर्भ। गोपनीयता के सवाल पर तर्क दिया जाता है कि जनगणना में पारंपरिक रूप से जनसंख्या के आंकड़े और योजना निर्माण से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती रही है, जबकि नई प्रश्नावली में कहीं अधिक व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा रही है। इनमें ऐसी जानकारियां भी हैं जिनके जरिए किसी व्यक्ति की पहचान की जा सकती है या उसे दूसरे सरकारी डेटाबेस से जोड़ा जा सकता है। इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि सरकार कितना डेटा एकत्र करती है, बल्कि यह भी है कि उस डेटा को कैसे सुरक्षित रखा जाता है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

cencus 2027

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दूसरी चिंता नागरिकता से जुड़ी

दूसरी चिंता नागरिकता से जुड़ी है। NPR देश के 'सामान्य निवासियों' का रजिस्टर है, नागरिकता का रजिस्टर नहीं। सामान्य निवासी वह व्यक्ति होता है जो किसी स्थानीय क्षेत्र में कम से कम छह महीने से रह रहा हो या अगले छह महीने तक वहां रहने का इरादा रखता हो। इस परिभाषा में ऐसा विदेशी नागरिक भी शामिल हो सकता है जो इस निवास संबंधी शर्त को पूरा करता हो। हालांकि, कानून के तहत NPR का संबंध भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। सिटिजनशिप (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिजन्स एंड इशू ऑफ नेशनल आइडेंटी कार्ड्स) रूल्स, 2003 में जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने और उसके सत्यापन के जरिए नागरिकों का रजिस्टर तैयार करने का प्रावधान है। इन नियमों में ऐसे लोगों को आगे की जांच के लिए चिह्नित करने का भी प्रावधान है जिनकी नागरिकता संदिग्ध मानी जाती है।

NPR अपने आप में कोई नई प्रक्रिया नहीं थी

यह कानूनी संबंध 2019-20 में राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया। NPR को CAA पारित होने के तुरंत बाद और असम में NRC की पृष्ठभूमि में फिर से शुरू किया जा रहा था। असम NRC से करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए थे। इसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार देशव्यापी NRC की बात कर रहे थे और लोगों से उस 'क्रम' को समझने के लिए कह रहे थे जिसमें CAA के बाद NRC आने की बात कही जा रही थी। हालांकि, NPR अपने आप में कोई नई प्रक्रिया नहीं थी। इसे पहली बार 2010 में 2011 की जनगणना के मकान सूचीकरण चरण के साथ तैयार किया गया था। इसके बाद 2015 में घर-घर जाकर इसे अपडेट किया गया। लेकिन 2019-20 के राजनीतिक घटनाक्रम ने इस पूरी प्रक्रिया को देखने का नजरिया बदल दिया। जिस प्रक्रिया पर पहले ऐसी कोई बड़ी राजनीतिक बहस नहीं हुई थी, वह नागरिकता की जांच और नागरिकता पर सवाल उठने की आशंका से जुड़ गई।

2020 में सरकार ने क्या कहा था?

सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश की थी कि माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान से जुड़े विवादित सवाल अनिवार्य नहीं थे। तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति को अपने माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान याद है तो वह जानकारी दे सकता है; अगर याद नहीं है तो संबंधित कॉलम खाली छोड़ा जा सकता है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने भी कहा था कि केवल माता-पिता की जन्मतिथि या जन्मस्थान की जानकारी न होने के कारण किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त नहीं हो सकती और ऐसी जानकारी के लिए किसी दस्तावेजी प्रमाण की जरूरत नहीं होगी।

NRC के लिए नहीं होगा NPR के डेटा का इस्तेमाल

सरकार का यह भी कहना था कि NPR मुख्य रूप से निवासियों का डेटाबेस है, जिसका उद्देश्य बेहतर नीति निर्माण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी है। अमित शाह का तर्क था कि किसी क्षेत्र की जनसांख्यिकीय संरचना की जानकारी से सरकारों को सेवाओं की बेहतर योजना बनाने और लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस मुद्दे पर एक विरोधाभास ने अविश्वास को बढ़ाया। दिसंबर 2019 में अमित शाह ने कहा था कि NPR के डेटा का इस्तेमाल NRC के लिए नहीं किया जाएगा और दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होती हैं। लेकिन इससे पहले संसद में दिए गए सरकारी बयानों और सिटिजनशिप रूल्स में पॉपुलेशन रजिस्टर को नागरिकों के रजिस्टर की तैयारी से स्पष्ट रूप से जोड़ा गया था।

सरकार को इतना डेटा क्यों चाहिए?

इतनी विस्तृत जनसांख्यिकीय जानकारी जुटाने के पीछे सरकार के पास एक प्रशासनिक तर्क भी है। सरकार का कहना है कि निवासियों का व्यापक डेटाबेस उसे नीतियां बनाने, सार्वजनिक सेवाओं की योजना तैयार करने, लाभार्थियों की पहचान करने और राष्ट्रीय सुरक्षा बेहतर करने में मदद कर सकता है। अलग-अलग सरकारी डेटाबेस से प्राप्त जानकारी को एक-दूसरे से मिलाने से रिकॉर्ड में मौजूद दोहराव और विसंगतियों को कम किया जा सकता है तथा नागरिकों के लिए कागजी कार्रवाई भी घटाई जा सकती है।

census

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NPR की परिकल्पना ऐसी व्यवस्था के रूप में भी की गई थी जिसमें बुनियादी जनसांख्यिकीय जानकारी के साथ मोबाइल नंबर और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जानकारी को जोड़ा जा सके। अधिकारियों का तर्क था कि इससे सरकारी सेवाओं की दक्षता और वितरण व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

'जनगणना-2027 का कोई गहरा निहित उद्देश्य है’

कांग्रेस ने 19 अगस्त को आरोप लगाया कि 'जनगणना 2027’ में जाति संबंधी सवाल पूछने की पद्धति को 'जानबूझकर त्रुटिपूर्ण’रखा गया है और जिस तरह से सूक्ष्म सवाल पूछे जा रहे हैं उससे पता चलता है कि इस कवायद के पीछे कोई निहित उद्देश्य है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा कि जनगणना-2027 में जाति के बारे में सवाल पूछने की पद्धति 'जानबूझकर त्रुटिपूर्ण’ रखी गई है। उन्होंने दावा किया कि धर्म, जन्मतिथि तथा माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़े सूक्ष्म सवाल पहले कभी नहीं पूछे गए हैं। रमेश ने कहा कि जनगणना गोपनीय होती है और इसीलिए इन प्रावधानों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि 'स्पष्ट रूप से जनगणना-2027 का कोई गहरा निहित उद्देश्य है।’ रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस जनगणना में जाति की गणना के विचार को ही दफन कर दिया है।

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