इस साल का शिक्षा मंत्रालय का बजट इतिहास में सबसे ज्यादा है हालांकि देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) का अनुदान इस साल घटाकर आधा कर दिया गया है। आईआईएम के लिए वित्त पोषण पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) 608.23 करोड़ रुपये से घटाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है। आईआईएम बजट 2023 में बीते साल के मुकाबले यह 50.67 फीसदी की गिरावट है। जबकि इस साल शिक्षा क्षेत्र का बजट 8 फीसदी बढ़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को केंद्रीय बजट 2023 पेश किया। आईआईएम के निदेशकों ने इस साल आईआईएम के अनुदान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
IIM के निदेशकों ने ज्यादातर हाल ही में बने IIMs के लिए चिंता जाहिर की। मौजूदा समय में देश भर में 20 आईआईएम हैं। IIM के निदेशकों ने यह भी कहा कि यह IIM के लिए आत्मनिर्भर बनने और CSR गतिविधियों में शामिल होने के लिए एक कदम हो सकता है।
आईआईएम उदयपुर के निदेशक अशोक बनर्जी के अनुसार, 'सरकार आईआईएम को उनकी विकास योजनाओं के वित्तपोषण में ज्यादा नवीन होने के संकेत भेज सकती है। आईआईएम के लिए बजट आवंटन में कटौती से नए आईआईएम को नुकसान हो सकता है। सबसे नया आईआईएम लगभग सात साल पुराना है।'
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार आईआईएम के लिए बजट में बड़ी कटौती सकल बजटीय समर्थन (जीबीएस) मद के अनुसार की गई है। नए वित्त वर्ष के लिए, मद के तहत आवंटन घटाकर 15.17 करोड़ रुपये किया गया है।
आईआईएम रोहतक के निदेशक धीरज शर्मा ने कहा, 'आईआईएम रोहतक कभी भी किसी भी सरकारी अनुदान पर नहीं टिका है। हम अपना कुल राजस्व अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दूरस्थ, कैंपस और ट्यूशन फीस से पैदा करते हैं। हालांकि हम दूसरी पीढ़ी के आईआईएम हैं, लेकिन फंड के इस पड़ाव ने हमें प्रभावित नहीं किया है। नई पीढ़ी के आईआईएम को सरकारी अनुदान पर निर्भर रहना पड़ सकता है।'
