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NEET Re-Exam: दोबारा परीक्षा किसी के लिए मौका, किसी के लिए मेंटल ट्रॉमा, जानें क्या बोले छात्र और पैरेंट्स

NEET UG परीक्षा को लेकर पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। नीट पेपर लीक विवाद में टाइम्स नाउ नवभारत की एजुकेशन टीम ने छात्र और उनके अभिभावकों से बात की, जिसमें मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। ये विवाद किसी के लिए 'निराशा', तो किसी के लिए 'नया अवसर' लाया है।

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NEET Paper Leak पर क्या बोले छात्र?

NEET Paper Leak: NEET UG परीक्षा को लेकर पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। इस परीक्षा में 22 लाख 80 हजार के आसपास छात्र और छात्राओं ने हिस्सा लिया था। देश की सबसे कठिन और बड़ी परीक्षाओं में से एक नीट यूजी परीक्षा का पेपर लीक होना और फिर उसे रद्द कर देना, दोनों ही बातों ने भारत के एजुकेशन सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना देखने वाले छात्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं उनकी मेहनत और भविष्य दोनों पर असर डालती हैं। बड़ी संख्या में छात्रों ने सोशल मीडिया और मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस मुद्दे पर टाइम्स नाउ नवभारत की एजुकेशन टीम ने न केवल छात्रों बल्कि अभिभावकों से भी बातचीत की, जिसके अंश इस लेख में शेयर किए जा रहे हैं।

कैनोसा कॉन्वेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज, अयोध्या की छात्रा Nancy Singh बताती हैं कि उन्‍होंने बड़े उम्मीदों से इस परीक्षा में भाग लिया था और जमकर मेहनत की थी। हालांकि वह तय समय में पेपर पूरा नहीं कर सकीं। नतीजन, वे कटऑफ तक नहीं पहुंची। ऐसे में उनके लिए री-एग्जाम एक 'नया अवसर' बनकर सामने आया है। उनका कहना है वे इस अवसर का लाभ उठाएंगी और इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी और कड़ी कर दी है।

Nancy Singh ने बताया कि पेपर अच्छा गया था, लेकिन और अच्छा हो सकता था। मैंने जमकर तैयारी की थी, घंटों पढ़ाई की थी। यह मेरा दूसरा अटेम्ट था, उम्मीद थी इस बार कुछ अच्छा होगा, लेकिन कटऑफ तक नहीं पहुंची। अब री-एग्जामिनेशन एक नया अवसर बनकर सामने आया है। मैंने तैयारी के लिए अपने पेपर का विश्लेषण किया है, इसके अलावा ऐसे सीनियर्स से बात की है जिन्होंने इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। मैं उनकी गाइडेंस से आगे बढ़ रही हूं। मेरे जैसे और भी ऐसे स्टूडेंट्स थे, जिन्हें मनमुताबिक परीक्षाफल नहीं मिला, अब री-एग्जामिनेशन के जरिये हम इस मौके को भुना सकते हैं। लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि ऐसी घटनाओं की वजह से देश के एजुकेशन सिस्टम पर से भरोसा उठ रहा है।

पैरेंट्स क्या बोले

Nainsi Singh Fathers

Surendra Pratap Singh (Teacher govt.)

अयोध्या में जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक के तौर पर काम कर रहे Nancy Singh के पिता सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा योग्यता को पहचान मिलनी चाहिए, जो योग्य है उसे ही आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। उनका मानना है परीक्षा का स्तर कठिन रहना चाहिए ताकि सिर्फ मेहनत करने वाला ही आगे बढ़े और धांधली को रोकने के लिए जल्द से जल्द सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। आगे उन्होंने ये भी कहा 'आखिर यूपीएससी और आईआईटी जैसे एग्जाम में धांधली क्यों नहीं होती है। ये बच्चे देश का भविष्य हैं, और इनके भविष्य के साथ खिड़वाड़ हो रहा है।'

यशवर्धन सिंह के लिए नीट बना 'मेंटल ट्रामा'

नीट यूजी 2026 में भाग लेने वाले एक छात्र 'यशवर्धन सिंह' ने कहा कि पेपर रद्द होना किसी मेंटली ट्रामा से कम नहीं था, री-एग्जाम के लिए तैयारी शुरू करने में दो-चार दिन लग गए। वे कहते हैं कि ' पेपर लीक जैसे मामलों की वजह से फिर से मन लगाकर पढ़ना कुछ लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है, लेकिन कोई रास्ता भी नहीं है। उन्होंने कहा जब तक दोबारा से पेपर नहीं हो जाता तब तक ये दबाव बना रहेगा।' पढ़ें उन्‍होंने क्‍या बताया

''मैंने बहुत मेहनत से परीक्षा दी थी और पेपर भी अच्छा गया था। मुझे उम्मीद थी कि मनचाहा परिणाम देखने को मिलेगा और मिला भी। लेकिन पेपर लीक की पुष्टि ने सब खराब कर दिया। सोचा नहीं था कि दो साल की मेहनत एक झटके में हार जाएगी। मैं दोबारा से उसी लगन के साथ पेपर देने की कोशिश कर रहा हूं, इस बार और बेहतर करूंगा, क्योंकि मुझे पता है कि प्रतियोगिता बढ़ेगी। उन्‍होंने कहा निगेटिव होने का कोई फायदा नहीं, ये जिंदगी का एक हिस्सा है। एक छात्र को परीक्षा देने से कभी नहीं डरना चाहिए। एक बार टारगेट बना लिया तो अब उसे पाना है। इसमें प्रेरणा से भरी बातों का कोई काम नहीं है। हां, पेपर लीक जैसी घटनाओं को भुलाना कठिन है।

दुर्गविजय सिंह ने शेयर किया अपना अनुभव

कुंवर दुर्ग विजय सिंह

शारीरिक शिक्षा अध्यापक

यशवर्धन सिंह के पिता 'कुंवर दुर्ग विजय सिंह' स्वतंत्र भारत इंटर कॉलेज बीबी नगर बुलंदशहर में शारीरिक शिक्षा अध्यापक हैं। वह बताते हैं परीक्षा केवल बच्चे नहीं देते बल्कि उनके साथ उनका परिवार भी देता है, वो खुश होते हैं तो परिवार खुश, और अगर वे दुखी होंगे तो परिवार भी हो्रा। ऐसे में बच्चों की मेहनत बर्बाद होने का मतलब है पूरा परिवार प्रभावित हुआ है। मेरा बेटा सिर्फ खाने के लिए ब्रेक लेता था और सारा समय नीट यूजी को क्रैक करके अच्छी रैंक चाहता था, उसका पेपर बहुत शानदार गया था लेकिन इस घटना ने मानसिक तौर पर देशभर के बच्चों के साथ उनके परिवार को भी दुखी किया।, लेकिन मैं जानता हूं वो दोबारा कर दिखाएगा।

NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य और परीक्षा की विश्वसनीयता दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंह author

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई क... और देखें

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