NEET-UG 2026 Paper Leak: 3 मई 2026 को देशभर में 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने नीट (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा) यूजी परीक्षा में भाग लिया। यह एक प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिये भारत में एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS), आयुष (BAMS, BHMS) और अन्य ग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेस में दाखिला लिया जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रवेश परीक्षा का आयोजन पिछले कई सालों की तरह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा किया गया। परीक्षा हॉल में उस समय उम्मीदवार डॉक्टर बनने का सपना लिए बैठे थे, लेकिन किसे पता था कि लाखों सपनों को कुचलने का खाका अंदर ही अंदर तैयार हो चुका था। नीट यूजी परीक्षा 2026 पेपर लीक की पुष्टि हुई और परीक्षा के आयोजन के 9 दिन बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी। ये महज एक परीक्षा पेपर लीक से जुड़ा मामला नहीं था, बल्कि ये लाखों युवाओं के करियर और उनके सुनहरे भविष्य को ध्वस्त करने जैसा था।
NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक की खबरों के बाद देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। इस मुद्दे पर कई डॉक्टर संगठनों और विशेषज्ञों ने परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाना चाहिए।
क्या हैं विशेषज्ञों के प्रमुख सुझाव?
1. NEET परीक्षा ऑनलाइन कराई जाए
अभी तक नीट यूजी परीक्षा का आयोजन पारंपरिक तरीके से यानी न-पेपर मोड में कराया जा रहा था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि NEET-UG को कंप्यूटर आधारित (Computer Based Test) बनाया जाए। इससे पेपर लीक होने का खतरा काफी कम हो सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), कोचीन के पूर्व अध्यक्ष राजीव जयदेवन ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा कि अगर परीक्षा ऑनलाइन होगी, तो पेपर Encrypted (गुप्त कोड में) रहेंगे और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे धांधली का जोखिम कम हो जाएगा और सुरक्षा बनी रहेगी।
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2. अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा कराने की मांग
कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि नीट यूजी परीक्षा को अलग अलग शिफ्ट में आयोजित कराया जाए। इससे एक ही समय पर लाखों छात्रों की परीक्षा लेने का दबाव कम होगा और पेपर लीक का खतरा भी घटेगा। हालांकि पेपर को अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित कराने से कटऑफ पर अंतर पड़ सकता है। इसके अलावा पेपर के कठिनाई स्तर में भी बदलाव आ सकता है, जिस वजह से “नॉर्मलाइजेशन” प्रोसेस को अपनाने की जरूरत पड़ेगी।
3. कोचिंग सेंटरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
डॉक्टर्स एसोसिएशन फॉर सोशल इक्वालिटी (डॉक्टरों का एक प्रमुख संगठन) ने एक मीडिया हाउस को बताया कि देशभर में चल रहे NEET कोचिंग सेंटरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होना चाहिए। ऐसे में जो निजी कोचिंग संस्थान छात्रों से भारी फीस वसूलते हैं, उन पर निगरानी रखी जा सकती है। विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि कोचिंग फीस की अधिकतम सीमा तय की जाए और गरीब छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग व हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
कोचिंग सेंटरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
4. राज्यों को मेडिकल सीटों पर अधिक अधिकार देने की मांग
कुछ विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य सरकारों के अधीन मेडिकल सीटों को राष्ट्रीय स्तर की सिंगल विंडो प्रक्रिया से अलग रखा जाए। उनका मानना है कि इससे परीक्षा का दबाव कम होगा और बड़े स्तर पर होने वाली अनियमितताओं को रोका जा सकेगा।
5. परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत
NIO सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पुणे के निदेशक आदित्य केलकर के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी, नियमित ऑडिट और अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एक ऐसी टेक्निक लाने की जरूरत है, जिसमें परीक्षा शुरू होने से महज कुछ देर पहले वहीं पर प्रश्नपत्रों का प्रिंट प्राप्त किया जा सके।
NEET-UG 2026 Paper Leak
छात्रों की चिंता का क्या?
22 लाख से ज्यादा छात्रों का किसी प्रवेश परीक्षा में बैठना बताता है कि इस परीक्षा का महत्व क्या है। न जाने कितने छात्र इस प्रवेश परीक्षा को पास करने के लिए कई साल मेहनत करते हैं, समाज में उठना बैठना कम कर देते हैं, मनोरंजन छोड़ देते हैं। ऐसे में पेपर लीक होने जैसी खबरें न केवल छात्रों के मनोबल को चकनाचूर करती हैं बल्कि मेहनती छात्रों का भरोसा भी तोड़ती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली इतनी मजबूत होनी चाहिए कि किसी भी छात्र को निष्पक्षता पर सवाल उठाने की जरूरत न पड़े। अगर सरकार इन सुझावों पर अमल करती है, तो आने वाले समय में NEET परीक्षा पूरी तरह डिजिटल और अधिक सुरक्षित हो सकती है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि NEET परीक्षा में होने वाली धांधलियों को कम करने और रोकने के लिए, सख्त कदम उठाने का यही समय है। उनके अनुसार, सभी मेडिकल प्रवेश परीक्षा कोचिंग सेंटरों का अनिवार्य पंजीकरण किया जाए, NEET-UG के लिए कंप्यटरीकृत प्रवेश परीक्षा शुरू की जाए, और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को 'सिंगल-विंडो नेशनल' व्यवस्था से छूट दी जाए।
