क्राइम

बच्चा चोरी की एक आवाज और फिर शुरू हो जाती है पिटाई...झारखंड के संथाल परगना में पिट रहे बेगुनाह लोग

झारखंड के कई इलाकों में बच्चा चोरी की अफवाह में आम लोग पिट रहे हैं। बच्चा चोरी गिरोह की ऐसी अफवाह फैली है कि हर अनजान आदमी स्थानीय लोगों को बच्चा चोर लग रहा है। ऐसे कई मामले संथाल परगना में सामने आ चुके हैं।

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संथाल परगना में बच्चा चोरी की अफवाह में पिट रहे बेगुनाह लोग (प्रतीकात्मक फोटो- @metaai)

झारखंड के संथाल परगना में बच्चा चोरी की अफवाह में आम लोग पिट रहे हैं। हाल ये है कि किसी भी इलाके से कोई अनजान शख्स गुजरने से डरने लगा है। कब बच्चा चोरी की आवाज आए और लोग उसे पिटने लग जाएं, कहा नहीं जा सकता। पिछले एक महीने में प्रमंडल के अलग-अलग इलाकों में कम से कम 12 घटनाओं में 30 से ज्यादा लोग बच्चा चोर होने के संदेह में भीड़ के गुस्से का शिकार हुए हैं। पुलिस का कहना है कि राज्य में हाल के दिनों में बच्चा चोरी की कोई घटना नहीं हुई है।

प्रशासन कर रहा है लोगों को जागरूक

संथाल परगना प्रमंडल में बच्चा चोरी की अफवाह में बेगुनाहों की पिटाई की घटनाएं आम हो गई हैं। पुलिस की ओर से लोगों से ऐसी किसी भी अफवाह में नहीं आने की अपील की जा रही है। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है। इन घटनाओं के बाद सभी जिलों में माइकिंग के जरिए लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू किया गया है। दुमका जिले के गोपीकांदर बाजार में शनिवार को भीड़ ने एक महिला और पुरुष को चोर समझकर पकड़ लिया और उनकी पिटाई करने की कोशिश की।

पहचान पत्र नहीं दिखाने पर मान लेते हैं बच्चा चोर

स्थानीय लोगों ने उन दोनों से आधार कार्ड दिखाने को कहा था। नहीं दिखाने पर उनके बच्चा चोर होने का शोर मचा दिया। देखते-देखते बड़ी संख्या में लोग जुट आए और उन्हें घेर लिया। इसी बीच सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें भीड़ के कब्जे से मुक्त कराया। पूछताछ में पता चला कि वे भाई-बहन हैं और बहुरूपिया बनकर मनोरंजन करते हैं। यही उनकी आजीविका है। दोनों पश्चिम बंगाल के चितरंजन के रहने वाले पाए गए।

एक के बाद एक आ चुकी हैं कई घटनाएं

  • सत्यापन के बाद पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया। शनिवार को ही दुमका शहर के डोमपाड़ा में भीड़ ने एक व्यक्ति को पकड़ लिया और बच्चा चोर होने के संदेह में पेड़ में बांधकर उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी। पुलिस ने सूचना पाकर उसे मुक्त कराया।
  • 4 अप्रैल को दुमका सदर प्रखंड के सरूआ गांव में रंजीत कुमार नामक बीटेक के एक छात्र को भी लोगों ने बच्चा चोर के संदेह में पेड़ में बांधकर पीटा। पुलिस ने उसे भी मुक्त कराया। जांच में पता चला कि वह दुमका शहर का रहने वाला है। रंजीत नशा करने की वजह से थोड़ी असामान्य हरकत कर रहा था। इस वजह से उसके बच्चा चोर होने की अफवाह फैला दी गई।
  • 1 अप्रैल को दुमका जिले के गोपीकांदर थाना क्षेत्र के दुबराजपुर में बच्चा चोरी के संदेह में ग्रामीणों ने एक दिव्यांग युवक को पकड़ लिया और उसे तीन घंटे तक बंधक बनाए रखा। गांव के किसी व्यक्ति ने इसकी सूचना गोपीकांदर थाना को दी तो उसे मुक्त कराया गया। बताया गया कि दिव्यांग युवक दुबराजपुर गांव के समीप जंगल में घूम रहा था। किसी ने अफवाह फैला दी कि वह बच्चा चोर है।
  • बाद में युवक की पहचान पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड क्षेत्र के लूटीबाड़ी निवासी मनोज हांसदा के रूप में हुई है। वह मूक-बधिर है। पुलिस ने उसके परिजनों को बुलाकर उसे सुरक्षित सुपुर्द किया। मार्च के आखिरी हफ्ते में गोड्डा जिले के देवदांड थाना क्षेत्र के सियरकटिया गांव में किसी काम से जा रहे बिहार के तीन युवकों को बच्चा चोर कहकर बुरी तरह पीट दिया गया था। बड़ी मुश्किल से उनकी जान बचाई गई थी।
  • गोड्डा के रामगढ़ में 26 मार्च को ग्रामीणों ने चार व्यक्तियों को बच्चा चोर होने के संदेह में पकड़ लिया और बुरी तरह पिटाई कर दी। पुलिस टीम ने उन्हें ग्रामीणों के चंगुल से मुक्त कराया। पता चला कि ये लोग गांव-गांव घूमकर जड़ी-बूटी से इलाज करते हैं। सत्यापन के बाद उन्हें पुलिस ने छोड़ दिया।

पाकुड़ में भी ऐसी घटनाएं

पाकुड़ जिले में भी ऐसी दो-तीन घटनाएं सामने आई हैं। दुमका एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने कहा है कि हाल के दिनों में बच्चा चोरी की एक भी घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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