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'पाकिस्तान भविष्य में भी बना रहेगा खतरा', पूर्व CDS अनिल चौहान बोले- सर्तक रहना होगा

India-Pakistan Tension: पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि मेरा मानना है कि पाकिस्तान आने वाले समय में भी एक बड़ी सुरक्षा चिंता और खतरा बना रहेगा।

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पूर्व सीडीएस अनिल चौहान

Photo : ANI

India-Pakistan Tension: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के करीब एक महीने बाद पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि ऐसे समझौते से पाकिस्तान में ''अति आत्मविश्वास'' पैदा हो सकता है, जिससे वह एक और ''गलत आकलन'' कर सकता है।

तीन मूर्ति भवन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में 'भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां' विषय पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि पाकिस्तान आने वाले समय में भी एक बड़ी सुरक्षा चिंता और खतरा बना रहेगा।'' उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर', सिंधु जल संधि को स्थगित करने और कुछ व्यावहारिक कदमों से ''उम्मीद है कि हमारे पड़ोसी के व्यवहार में बदलाव आएगा या व्यवहार बदलने के लिए प्रेरित होगा।''

'PAK को लेकर हमें सर्तक रहना होगा'

पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) ने कहा, ''लेकिन हमने यह भी देखा है कि उन्होंने हाल में कुछ समझौतों और संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। मुझे लगता है कि इससे कभी-कभी पाकिस्तान में किसी तरह का अति आत्मविश्वास पैदा हो सकता है और वह फिर कोई गलत आकलन कर सकता है। हमें इसको लेकर सतर्क रहना होगा।''

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने सात अगस्त को 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत इनमें से किसी एक देश पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया था। चौहान 22वां 'भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत स्मृति व्याख्यान' दे रहे थे। वह सशस्त्र बलों की पृष्ठभूमि से आने वाले ऐसे पहले वक्ता बने, जिन्होंने यह व्याख्यान दिया।

उन्होंने कहा, ''भारत के बाहरी सुरक्षा माहौल को कई बड़े कारक प्रभावित करते हैं, जिनमें अनसुलझी सीमाएं, सीमा पार आतंकवाद, गैर-सरकारी तत्व, विवादित क्षेत्र जिन्हें वैश्विक साझा क्षेत्र कहा जाता है, और साथ ही अंतरिक्ष, साइबर तथा समुद्री क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग एवं प्रतिस्पर्धा। ये सभी कारक आपस में जुड़े हुए हैं। इन्हें अलग-अलग हिस्सों में रखकर नहीं देखा जा सकता; इन्हें एक ही नज़रिए से देखना होगा।''

'खत्म नहीं हुआ ऑपरेशन सिंदूर'

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, पूर्व सीडीएस ने आगाह करते हुए कहा, ''मैं अपने पश्चिमी पड़ोसी देश की बात करना चाहूंगा। मेरा मानना है कि पाकिस्तान आने वाले समय में भी एक बड़ी सुरक्षा चिंता और खतरा बना रहेगा।'' पिछले साल मई में जब भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' साल चलाया था, तब वह सीडीएस थे। मई 2026 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी जनरल चौहान यह दोहराते रहे हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' खत्म नहीं हुआ है, बल्कि कुछ समय के लिए रोका गया है। उन्होंने सशस्त्र बल से हर समय अभियान के लिए तैयार रहने को कहा।

पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया गया था। अपने संबोधन में पाकिस्तान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''परमाणु हथियारों के अस्तित्व ने शीर्ष स्तर पर एक तरह की स्थिरता पैदा कर दी है। और यही चीज निचले स्तर पर अस्थिरता को बढ़ावा देती है। इसे पारंपरिक रूप से स्थिरता-अस्थिरता विरोधाभास के रूप में जाना जाता है।''

पूर्व सीडीएस ने कहा, ''इसलिए पाकिस्तान की सोच यह रही है कि परमाणु हथियारों के कारण पारंपरिक सैन्य अभियानों की गुंजाइश को कम किया जाए और उप-पारंपरिक अभियानों यानी आतंकवाद तथा सीमा पार गतिविधियों के लिए जगह बढ़ाई जाए। पारंपरिक अभियानों की संभावना को कम करना ही उनकी रणनीति रही है।'' उन्होंने कहा कि इस विशेष दृष्टिकोण और रणनीति में ''आतंकवाद'' और ''छद्म युद्ध'' की केंद्रीय भूमिका रही है।

उन्होंने कहा, ''गैर-सरकारी संगठन ऐसी गतिविधियां करते हैं जिनसे वे आसानी से पल्ला झाड़ सकते हैं, जिससे प्रत्यक्ष रूप से नुकसान कम होता है और वे राजनीतिक व सांप्रदायिक परिणाम भड़काने की कोशिश करते हैं। यहां तक कि जब किसी खास आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर कर दिया जाता है, तब भी उसे सक्षम बनाने वाला तंत्र-जिसमें विचारधारा, भर्ती व्यवस्था, वित्त पोषण, प्रशिक्षण, प्रचार और राज्य का समर्थन शामिल है-उसे फिर से खड़ा करने और पुनर्गठित करने में सक्षम हो सकता है।''

पूर्व सीडीएस ने आगाह करते हुए कहा कि भारत को इस बात को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना होगा कि आतंकवाद और छद्म युद्ध उसके लिए ''बड़ी चुनौती'' बने रहेंगे।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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