26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में तबाही के साथ एक और गहरी मानवीय त्रासदी खड़ी कर दी है। सैकड़ों शव बरामद हो चुके हैं, हजारों लोग अब भी लापता हैं। लेकिन बड़ी चुनौती सिर्फ शवों को ढूंढना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि वे किसके अपने हैं। बाढ़ में क्षत-विक्षत हुए शवों की पहचान के लिए अब DNA जांच सबसे अहम कड़ी बन गई है। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि आखिर डीएनए की जांच की प्रक्रिया क्या है और ये कैसे काम करती है और पीड़ित परिवारों के लिए इसका क्या मतलब है?
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। इससे भोतेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। नदी का तेज बहाव अपने साथ घर, वाहन, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाओं का मलबा बहाकर नीचे की ओर ले गया। इस आपदा ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया। बाढ़ में अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब 5,000 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है।
'ये शव किसका है?' बाढ़ के बाद सबसे मुश्किल सवाल
नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने अपने रास्ते में जो कुछ आया,उसे बहा दिया। घर, वाहन, सड़कें और पुल तो तबाह हुए ही, बड़ी संख्या में लोग भी तेज बहाव में बह गए। कई शव घटनास्थल से काफी दूर मिले। नदी के पानी, कीचड़ और मलबे में कई दिनों तक पड़े रहने के कारण शवों की स्थिति भी खराब हो गई। कुछ शवों की पहचान चेहरे से करना संभव नहीं रहा, तो कुछ मामलों में शरीर के केवल हिस्से ही बरामद हुए।पारंपरिक पहचान के तरीके क्यों पड़ रहे कमजोर?
आमतौर पर किसी अज्ञात शव की पहचान चेहरे,कपड़ों, पहचान पत्र, आभूषण, फिंगरप्रिंट या दांतों के रिकॉर्ड से की जा सकती है। लेकिन जैसी आपदा नेपाल में आई उसमें इनमें से कई सुराग खत्म हो जाते हैं। इसके साथ ही लंबे समय तक पानी में रहने से शरीर में बदलाव आने लगता है। कीचड़ और मलबा पहचान के निशान मिटा सकते हैं। तेज बहाव से शरीर क्षतिग्रस्त हो सकता है और कई बार अवशेष अलग-अलग जगहों पर मिलते हैं।ऐसी स्थिति में कपड़े या सामान भी निर्णायक सबूत नहीं रह जाते।DNA कैसे बताएगा कि शव किसका है?
DNA को किसी व्यक्ति की जैविक पहचान का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। अज्ञात शव या मानव अवशेष से DNA का नमूना लिया जाता है। इसके बाद उस व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों के DNA नमूनों से उसका मिलान किया जाता है।
माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन जैसे करीबी रक्त संबंधियों के नमूने इस तुलना में विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। अगर अज्ञात अवशेष और परिवार के नमूनों के बीच पर्याप्त आनुवंशिक समानता मिलती है, तो फोरेंसिक विशेषज्ञ यह निर्धारित करने में सक्षम हो सकते हैं कि बरामद अवशेष उसी परिवार के सदस्य के हैं।
नेपाल में कितने नमूनों की जांच हो रही है?
नेपाल पुलिस ने अब तक 2,272 DNA नमूने एकत्र किए हैं। इनमें 1,260 नमूने बरामद शवों से और 1,012 नमूने लापता लोगों के रिश्तेदारों से लिए गए हैं। DNA सैंपल और दूसरी पहचान प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शवों को दफनाया जा चुका है। इनमें 222 महिलाएं, 355 पुरुष और 453 ऐसे शव शामिल हैं जिनका लिंग निर्धारित नहीं हो सका। हालांकि,अभी तक केवल 96 शवों की पहचान होने के बाद उन्हें परिवारों को सौंपा गया है।DNA जांच में समय क्यों लग रहा है?
DNA जांच कोई तत्काल प्रक्रिया नहीं है। सबसे पहले मानव अवशेष से उपयुक्त नमूना लेना होता है। फिर उसे सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाना, DNA निकालना और उसका प्रोफाइल तैयार करना पड़ता है। इसके बाद परिवार के रिश्तेदारों से लिए गए नमूनों से तुलना की जाती है। बड़ी संख्या में शव और नमूने होने पर यह प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।
नेपाल में एक और व्यावहारिक समस्या है परिवारों को DNA नमूना देने के लिए दूर-दराज के इलाकों से काठमांडू तक आना पड़ सकता है। इसे आसान बनाने के लिए नेपाल पुलिस ने नुवाकोट के बिदुर में DNA सैंपल कलेक्शन सेंटर भी शुरू किया है।
इन तरीकों से भी की जा रही पहचान
फोरेंसिक विशेषज्ञ किसी शव की पहचान के लिए केवल DNA पर निर्भर नहीं रहते।फिंगरप्रिंट उपलब्ध होने पर पहचान में मदद कर सकते हैं। इसी तरह दांतों के रिकॉर्ड भी उपयोगी होते हैं, खासकर तब जब किसी व्यक्ति का पहले से डेंटल रिकॉर्ड मौजूद हो। इसके अलावा कपड़े, आभूषण, पहचान पत्र और दूसरे व्यक्तिगत सामान भी सुराग दे सकते हैं।हजारों परिवारों के लिए है आखिरी उम्मीद
किसी अज्ञात शव की पहचान फोरेंसिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है,लेकिन किसी परिवार के लिए इसका अर्थ इससे कहीं बड़ा है। ऐसे हादसों में लापता व्यक्ति के परिवार के सामने सबसे कठिन स्थिति वह होती है जिसमें उन्हें यह पता ही नहीं होता कि उनका अपना जीवित है या नहीं। ऐसे में DNA जांच से यह अनिश्चितता खत्म हो सकती है। डीएनए जांच में अगर सैंपल का मिलान हो जाता है तो परिवार को कम से कम यह निश्चितता मिलती है कि उनके प्रियजन के साथ क्या हुआ।नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती
नेपाल के लिए चुनौती अब केवल बाढ़ से हुए भौतिक नुकसान की भरपाई की नहीं है। हजारों परिवारों को उनके लापता परिजनों के बारे में जवाब देना भी उतना ही जरूरी है। अधिकारियों ने 1,270 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है, ताकि परिवार वहां जानकारी देख सकें।
