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'असंगठित क्षेत्र की 16 करोड़ महिलाओं के लिए मास्टर प्लान बनाए मोदी सरकार', शशि थरूर ने केंद्र से की बड़ी मांग

Shashi Tharoor Demands Paid Maternity Leave: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए नवजात शिशुओं के स्तनपान में आई गिरावट पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली 16 करोड़ से अधिक महिलाओं को सवैतनिक मातृत्व अवकाश देने की मांग की है।

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शशि थरूर ने उठाए गंभीर सवाल

Photo : ANI

Shashi Tharoor Demands Paid Maternity Leave: वरिष्ठ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देश में नवजात शिशुओं के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर मुद्दा उठाया है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के नवीनतम आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में 6 महीने तक के नवजात बच्चों को मिलने वाले एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग (केवल स्तनपान) की दरों में भारी गिरावट आई है। इस मुद्दे पर उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।

थरूर ने सोशल मीडिया पर आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जहां एक तरफ भारत में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) की दर बढ़कर 90.6% तक पहुंच गई है, वहीं दूसरी तरफ 6 महीने तक के बच्चों को केवल मां का दूध मिलने की दर 63.7% से गिरकर 55.8% पर आ गई है। यह गिरावट ग्रामीण इलाकों और उत्तर प्रदेश व हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा देखी गई है। इस स्थिति के पीछे का मुख्य कारण बताते हुए सांसद ने कहा कि यह संकट सरकारी नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता है।

शशि थरूर ने उठाए गंभीर सवाल

भारत के अनौपचारिक या असंगठित क्षेत्र में लगभग 16 करोड़ से अधिक महिलाएं मजदूरी व अन्य काम करती हैं। सवैतनिक मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) और नौकरी की सुरक्षा न होने के कारण इन महिलाओं को अपनी आजीविका चलाने के लिए प्रसव के कुछ ही हफ्तों बाद काम पर वापस लौटना पड़ता है। इस आर्थिक मजबूरी के चलते बच्चों को शुरुआती 6 महीने तक नियमित स्तनपान कराना उनके लिए नामुमकिन हो जाता है।

केंद्र सरकार से की ये अहम मांग

इसके अलावा, उन्होंने सी-सेक्शन (सिजेरियन) डिलीवरी में हुई बढ़ोतरी और बाजार में डिब्बा बंद शिशु आहार के आक्रामक विज्ञापनों को भी इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया। थरूर ने जोर देकर कहा कि मां का दूध नवजात बच्चे को कुपोषण और बाल मृत्यु दर से बचाने वाली सबसे बड़ी ढाल है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि असंगठित क्षेत्र की माताओं को वित्तीय मातृत्व लाभ दिए जाएं, इंफेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स (IMS) एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए और सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्तनपान संबंधी काउंसलिंग को मजबूत किया जाए।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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