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Noida News: कुत्तों का मुंह कवर करना हुआ अनिवार्य, नोएडा-ग्रेनो वाले जान लें नियम, कार्रवाई से बचने के लिए करें यह काम

नोएडा डीएम ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की गाइडलाइन का पालन करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। इसके तहत कुत्तों के मुंह पर जाल लगाना अनिवार्य होगा।

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कुत्तों का मुंह कवर करना अनिवार्य

Photo : BCCL

नोएडा: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कुत्तों के हमले को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। कई बार पालतू कुत्ते लोगों पर हमला कर देते हैं, जिसको लेकर पीड़ित और कुत्ते के मालिक के बीच झगड़े की स्थिति बन जाती है। लिहाजा, इस समस्या पर गौर करते हुए गौतमबुद्ध नगर के डीएम ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के पालन के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

DM ने अधिकारियों को दिए निर्देश

डीएम ने एक्यूए और आरडब्ल्यूए सरकारी और गैर सरकारी पदाधिकारियों को एडब्ल्यूबीआई की गाइडलाइन के पालन करने के लिए निर्देश दिए हैं। इस नियम के तहत कुत्तों के मुंह पर जाल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि वो किसी भी सूरत में व्यक्तियों पर हमला न कर सकें।

जानवरों के प्रति क्रूरता पर सख्ती

डीएम ने अपने निर्देश पर कहा है कि कुत्तों का समय से टीकाकरण और नसबंदी कराएं। इसके लिए सोसाइटी और सेक्टरों के वेलफेयर एसोसिएशन में रहने वाले सभी लोग कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट की जगह को चुनें। वहीं, जानवरों के प्रति क्रूरता करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। लिहाजा, कुत्ते पालने के शौकीनों लोग इस निर्देश का पालन करें, अन्यथा उन पर संबंधित नियम के तहत कार्रवाई होगी।

क्या है पशुओं के लिए नियम

दरअसल, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना वर्ष 1962 में अधिनियम की धारा 4 के तहत की गई थी। इस नियम के तहत बेजुबानों का उत्पीड़न या उनके साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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