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सरकार का मास्टरस्ट्रोक! Electronics सेक्टर को 2041 तक टैक्स छूट, पैदा होंगे लाखों रोजगार

केंद्र सरकार देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करने के लिए विदेशी कंपनियों को मिल रही टैक्स छूट को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल, यह छूट वित्त वर्ष 2030 तक है। सरकार इसे 2041 तक बढ़ा सकती है।

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टैक्स छूट से बढ़ेगा निवेश

Make in India Boost : भारत को दुनिया का अगला इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिशों को केंद्र सरकार ने एक और बड़ा सहारा देने की तैयारी कर ली है। सरकार ने विदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को मिलने वाली टैक्स छूट 10 साल और बढ़ाकर 2041 तक करने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद साफ है कि सरकार ज्यादा विदेशी निवेश लाने, ग्लोबल सप्लाई चेन को भारत की ओर मोड़ने और 'मेक इन इंडिया' को नई रफ्तार देने की कोशिश कर रही है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में विदेशी निवेश बढ़ेगा और लाखों नए रोजगार बनने की संभावना है।

10 साल और बढ़ेगी टैक्स छूट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में मंगलवार को टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया। इस बिल में विदेशी कंपनियों के लिए मौजूदा टैक्स छूट की समयसीमा 2031 से बढ़ाकर 2041 करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह छूट उन विदेशी कंपनियों को मिलती है, जो भारत में मौजूद कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को मशीनें, उपकरण और प्रोडक्शन टूल्स उपलब्ध कराती हैं।

कैसे काम करती है यह व्यवस्था?

Contract Manufacturing : मान लीजिए कोई विदेशी कंपनी भारत में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाती, लेकिन यहां मौजूद किसी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर से अपने प्रोडक्ट बनवाती है। इसके लिए वह अपनी मशीनें और प्रोडक्शन इक्विपमेंट भारत भेजती है। इन मशीनों से होने वाली आय पर विदेशी कंपनी को टैक्स छूट मिलती है।

कौनसी शर्तें करनी होती हैं पूरी?

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का मालिकाना हक विदेशी कंपनी के पास होना चाहिए। उनका इस्तेमाल भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए हो। निर्माण कस्टम्स बॉन्डेड एरिया में स्थित कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर की तरफ से किया जाए। इन शर्तों को पूरा करने वाली कंपनियों के लिए सरकार टैक्स में छूट की सुविधा 10 साल और जारी रखना चाहती है।

किन प्रोडक्ट्स पर मिलेगा फायदा?

इस प्रस्ताव के तहत टैक्स छूट का दायरा कई प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों तक रहेगा। मोटेतौर पर तो पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को इस फैसले से फायदा मिल सकता है। लेकिन, इनमें खासतौर पर मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, वियरेबल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सेसरीज या इनसे जुड़े पार्ट्स और सब-असेंबली बनाने वाली कंपनियों को फायदा मिलेगा।

सरकार ने अभी यह कदम क्यों उठाया?

दुनिया में लगातार बदलते कारोबारी माहौल, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आ रहे बदलाव के बीच कई वैश्विक कंपनियां चीन के अलावा दूसरे देशों में उत्पादन बढ़ा रही हैं। भारत इस मौके का फायदा उठाना चाहता है। सरकार का मानना है कि लंबी अवधि तक टैक्स राहत मिलने से विदेशी कंपनियां भारत में बड़े निवेश का फैसला अधिक भरोसे के साथ लेंगी।

'मेक इन India' को कैसे मिलेगा फायदा?

यह प्रस्ताव सिर्फ टैक्स छूट नहीं, बल्कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। क्योंकि, इसकी वजह से विदेशी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ सकता है। इसके साथ ही मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में तेजी आएगी। नई फैक्ट्रियां और सप्लाई चेन बनेंगी। रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ने की संभावना है। चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक रणनीति में भारत की भूमिका मजबूत हो सकती है।

इन सेक्टरों को भी राहत

सरकार की तरफ से रखे गए प्रस्ताव अगर लागू होते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही कुछ और अहम सेक्टरों को भी इसका फायदा मिल सकता है। मसलन, डायमंड कारोबार में विदेशी कंपनियों को रफ डायमंड ट्रेड से जुड़ी गतिविधियों पर भी टैक्स छूट देने का प्रस्ताव है। यह राहत भी 31 मार्च 2041 तक उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा बॉन्डेड वेयरहाउस से जुड़ी विदेशी कंपनियां भारत के कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में कॉम्पोनेंट्स स्टोर करती हैं, उन्हें भी टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

डेटा सेंटर को भी फायदा

सरकार ने डेटा सेंटर सेवाओं से जुड़ी शर्तों में भी ढील देने का प्रस्ताव रखा है। अब विदेशी कंपनियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का मालिक होना जरूरी नहीं होगा। वे लीज पर लिए गए डेटा सेंटर का इस्तेमाल करके भी निर्धारित टैक्स लाभ हासिल कर सकेंगी। अगर संसद से मंजूरी मिलती है तो अधिकांश संशोधन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। जबकि डायमंड ट्रेड और वेयरहाउसिंग से जुड़े कुछ प्रावधान 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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