ET Now Global Business Summit 2024: ईटी नाउ की ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 में ओपन एआई और हममुद्दे पर बात करने ओपन एआई के चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर जेसन क्वान शामिल हुए। उन्होंने कहा कि समाज और पूरी दुनिया को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फायदा पहुंचाने के लिए हमारी टीम दिन-रात काम करती है। इसी कड़ी में हम आपको आज बताएंगे कि भारत में एआई ने कैसे अपने पैर जमाए। एआई हमारी असली दिक्कतों को उन तरीकों से सुलझा सकता है जो उम्मीद से परे हैं। ये ना सिर्फ काम की लागत को कम करता है, बल्कि इसे आसान और सटीक भी बनाता है।
किसानों के लिए एआई
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ना सिर्फ दफ्तरों और ऑनलाइन माध्यमों के लिए कारगर है, बल्कि किसानों के लिए भी ये बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह किसानों को मौसम का बदलता मिजाज पल-पल पता लगा सकता है, ऐसे में वो सही समय पर सही फसल उगा और बेच सकते हैं। ये सहायता सभी किसानों तक पहुंच सके, इसके लिए कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इंग्लिश के अलावा ये एआई किसानों को हिंदी, असमी, कन्नड, तेलगु और अन्य कई भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराएगा।
शिक्षा में अपार संभावनाएं
ओपन एआई लाखों लोगों को शिक्षित करने के काम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और कई सारे ऐसे टूल्स हैं जो मुफ्त में उपलब्ध कराए गए हैं। कई देशों की सरकार भी बहुत से कामों में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं और बड़ी मात्रा में पैसा बचा रही हैं। प्राइवेट सेक्टर में भी एआई आर्थिक मजबूती ला रहा है। 92 प्रतिशत से भी ज्यादा फॉर्च्यून कंपनियां अपने लिए एआई टूल्स बना रही हैं, वहीं इसकी मदद से इनका काम लगभग 25 प्रतिशत तेज हो गया है। इसके अलावा पहले के मुकाबले चैटजीपीटी के साथ मिलकर किया गया काम ज्यादा प्रभावशाली होता है।
