हाल ही में दिल्ली का एक मामला चर्चा में आया। एक महिला नई महिंद्रा थार लेने शोरूम पहुंचीं। शगुन के तौर पर उन्होंने शोरूम की पहली मंजिल पर गाड़ी के नीचे नींबू रखकर उसे कुचलने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई और शोरूम का शीशा तोड़ते हुए नीचे गिर गई। कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और महिला भी घायल हो गई। फिलहाल महिला का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसी स्थिति में क्लेम मिलेगा या नहीं?
1. डिलीवरी से पहले डैमेज = डीलर/कंपनी की जिम्मेदारी
अगर गाड़ी ग्राहक को सौंपने से पहले ट्रांसपोर्ट या शोरूम में डैमेज हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी डीलर या कंपनी की होती है। इस केस में ग्राहक को क्लेम या रिप्लेसमेंट मिल सकता है।
2. डिलीवरी के बाद डैमेज = ग्राहक की जिम्मेदारी
जैसे ही गाड़ी का डिलीवरी प्रोसेस पूरा हो जाता है और कार की चाबी ग्राहक को सौंप दी जाती है, गाड़ी की जिम्मेदारी ग्राहक की मानी जाती है। यदि उसी समय ग्राहक की गलती से कार डैमेज हो जाती है, तो यह इंश्योरेंस केस माना जाता है।
3. महिला वाले केस में क्या होगा?
इस घटना में गाड़ी की चाबी और कंट्रोल महिला ग्राहक के पास था। डैमेज भी उनकी गलती से हुआ। ऐसे में न तो डीलर और न ही कंपनी जिम्मेदार होगी। ग्राहक को गाड़ी की इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत ही क्लेम करना पड़ेगा (अगर तुरंत एक्टिवेट हो चुकी है तो)। अगर इंश्योरेंस एक्टिव नहीं है, तो पूरा नुकसान ग्राहक को खुद उठाना पड़ेगा।
4. सबक क्या है?
डिलीवरी लेते समय गाड़ी को सुरक्षित जगह पर ही ट्रायल करें। कोई भी धार्मिक या शगुन संबंधी रीति शोरूम की बजाय बाहर खुले और सुरक्षित स्थान पर करनी चाहिए। गाड़ी की चाबी लेते ही यह आपकी कानूनी जिम्मेदारी बन जाती है।
