100% Ethanol-Powered Car Launching in October: भारत में इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अक्टूबर में 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली टोयोटा इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल वाहन के लॉन्च कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी दी है। इसके साथ ही देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से आगे बढ़कर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और E-85 और E-100 ईंधन के इस्तेमाल की चर्चा तेज हो गई है।
इसी बीच ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) और आईआईटी दिल्ली ने ‘फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स: एनैबलिंग एनर्जी सिक्योरिटी एंड सस्टेनेबल मोबिलिटी इन इंडिया’ नाम से एक व्हाइट पेपर उपलब्ध करवाया है। इसमें भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए 10 सूत्रीय रोडमैप दिया गया है।
E20 से E85 और E100 की ओर बढ़ने की तैयारी
व्हाइट पेपर में भारत को मौजूदा ई20 व्यवस्था से ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ई85 और ई100 ईंधन की ओर ले जाने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी ढांचा सुझाया गया है। इसमें वाहन की टिकाऊ क्षमता, ईंधन की उपलब्धता, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ताओं की लागत जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चल सकते हैं। श्वेत पत्र के मुताबिक, भारत में यात्री वाहन क्षेत्र में पहला फ्लेक्स-फ्यूल वाहन जून 2026 में लॉन्च किया जा चुका है।
सिर्फ इथेनॉल बनाना नहीं, खपत के लिए भी तैयार करना जरूरी
आईआईटी दिल्ली ने कहा है कि भारत ने घरेलू इथेनॉल व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। अब चुनौती यह है कि उत्पादित इथेनॉल की मांग बढ़ाने के लिए वाहन तकनीक और ईंधन ढांचे को तैयार किया जाए। श्वेत पत्र में वाहन तकनीक, ईंधन की उपलब्धता, खुदरा ढांचा, कीमत, कच्चे माल की टिकाऊ उपलब्धता, उपभोक्ता अपनाने, वित्तपोषण और लंबे समय में बाजार विकसित करने जैसे क्षेत्रों में सुझाव दिए गए हैं।
इथेनॉल से इंजन खराब होने की चिंता पर क्या कहा?
श्वेत पत्र में ई20 को लेकर इंजन की सेहत और टिकाऊपन से जुड़ी बहस का भी जिक्र है। इसमें इथेनॉल के अनुकूल सील, ईसीयू कैलिब्रेशन और ज्यादा क्षमता वाले फ्यूल इंजेक्टर जैसे इंजीनियरिंग उपाय सुझाए गए हैं, ताकि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल में इंजन की सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रति लीटर नहीं, प्रति किलोमीटर लागत पर जोर
श्वेत पत्र की एक प्रमुख सिफारिश ‘कॉस्ट पर किलोमीटर’ यानी प्रति किलोमीटर खर्च के आधार पर ईंधन की कीमत को देखने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होने के कारण समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए श्वेत पत्र ई85 पर गतिशील खुदरा छूट की वकालत करता है। उदाहरण के तौर पर इसमें पेट्रोल की तुलना में करीब 25 प्रतिशत कीमत में कमी का ऐसा मॉडल सुझाया गया है, जिससे प्रति किलोमीटर उपभोक्ता की लागत में अतिरिक्त बोझ न आए।
दोपहिया वाहनों पर खास फोकस
श्वेत पत्र में दोपहिया वाहनों को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि देश की पेट्रोल खपत में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए दोपहिया क्षेत्र के लिए अलग इथेनॉल रणनीति तैयार करने का सुझाव दिया गया है, ताकि कच्चे तेल के आयात में कमी लाने की क्षमता बढ़ाई जा सके।
किसानों को भी फायदा पहुंचाने का रोडमैप
श्वेत पत्र में इथेनॉल के लिए कच्चे माल को सिर्फ गन्ने तक सीमित न रखने की बात कही गई है। इसमें मक्का और कृषि अवशेषों से बनने वाले दूसरी पीढ़ी यानी 2जी इथेनॉल को बढ़ावा देने का सुझाव है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे स्थानीय स्तर पर ग्रामीण आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
2,000 करोड़ लीटर से ज्यादा इथेनॉल क्षमता का दावा
एआईडीए की उप महानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि भारत की घरेलू इथेनॉल क्षमता अब 2,000 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है। उनके मुताबिक, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के आने के साथ अब अगली चुनौती इथेनॉल की मांग और उसके इस्तेमाल के लिए जरूरी ढांचा तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि आईआईटी दिल्ली का श्वेत पत्र उद्योग, नीति निर्माताओं और उपभोक्ताओं के लिए ई85 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अपनाने के लिए वैज्ञानिक, कीमत और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा रोडमैप उपलब्ध कराता है।
इथेनॉल से आगे फ्लेक्स-फ्यूल की ओर बढ़ेगा भारत?
आईआईटी दिल्ली के श्वेत पत्र के मुताबिक, भारत में इथेनॉल पर चर्चा अब सिर्फ पेट्रोल में मिश्रण के लक्ष्य तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, घरेलू ईंधन के इस्तेमाल और तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था को भी शामिल करने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट का जोर है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को सफल बनाने के लिए ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, जैव ईंधन, कृषि और नीति से जुड़े क्षेत्रों को मिलकर काम करना होगा। एआईडीए ने बताया है कि आईआईटी दिल्ली के इस श्वेत पत्र की प्रतियां अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
